PM Kisan Yojana: पीएम किसान की 22वीं किस्त से पहले अलर्ट, इन वजहों से लाखों किसानों की अटक सकती है रकम
PM Kisan Yojana: देश की बड़ी आबादी आज भी खेती पर निर्भर है. किसानों की आय बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना चला रही है. इस योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल 6,000 रुपये तीन बराबर किस्तों में दिए जाते हैं. अब तक 21 किस्तें जारी हो चुकी हैं और करोड़ों किसान 22वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं. हालांकि इस बार भी कई किसानों को झटका लग सकता है. तो आइए यहां जानते हैं कि किन किसानों को ये राशि नहीं मिलेगी.
जमीन नहीं होने पर पैसे नहीं मिलेंगे
आपको बता दें कि सरकार ने हाल में लाभार्थियों का दोबारा सत्यापन (वेरिफिकेशन) किया है. जांच के दौरान कई नाम सूची से हटा दिए गए, क्योंकि वे तय नियमों पर खरे नहीं उतरे. योजना का सबसे अहम नियम यह है कि लाभ सिर्फ उन्हीं किसानों को मिलेगा जिनके नाम पर कृषि योग्य जमीन दर्ज है. जो किसान बटाई या किराये पर खेती करते हैं लेकिन जमीन उनके नाम नहीं है, वे पात्र नहीं माने जाएंगे. राज्य सरकारों के भूमि रिकॉर्ड से डेटा मिलान किया जाता है. अगर रिकॉर्ड अधूरा या गलत है तो किस्त रुक सकती है.
अन्य वजहें
कई राज्यों में फार्मर आईडी भी अनिवार्य कर दी गई है. इसके अलावा e-KYC कराना जरूरी है. जिन किसानों ने अब तक e-KYC पूरी नहीं की है, उनकी अगली किस्त अटक सकती है. यह प्रक्रिया आधिकारिक पोर्टल या मोबाइल ऐप के जरिए ओटीपी से की जा सकती है. कुछ मामलों में बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन भी जरूरी होता है.
ध्यान रखें ये बातें
बैंक खाते का आधार से लिंक होना भी अनिवार्य है. अगर NPCI मैपिंग अपडेट नहीं है या बैंक डिटेल्स में गड़बड़ी है तो पेमेंट फेल हो सकता है. नाम, जन्मतिथि या आधार नंबर में गलती भी समस्या बन सकती है.
कब आएगी 22वीं किस्त?
22वीं किस्त की तारीख की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है, लेकिन संभावना है कि होली से पहले राशि ट्रांसफर हो सकती है. किसान https://pmkisan.gov.in/ पर जाकर “Know Your Status” विकल्प से अपना स्टेटस जांच सकते हैं. e-KYC और Land Seeding की स्थिति जरूर देखें. समय रहते जरूरी सुधार कर लेने से 2,000 रुपये की किस्त सुरक्षित मिल सकेगी.
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इजरायल-ईरान युद्ध के बीच सुरक्षित निवेश की बढ़ी मांग, सोना-चांदी 3 प्रतिशत उछले
मुंबई, 2 मार्च (आईएएनएस)। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त सैन्य अभियान के कारण सुरक्षित निवेश की मांग मजबूत हो गई है, जिसके चलते सोमवार को कीमती धातुओं में बड़ी उछाल देखने को मिली। इस दौरान, सोने-चांदी की कीमतों में 3 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
एमसीएक्स पर अप्रैल वायदा सोना दिन के कारोबार में 3 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 1,67,915 रुपए प्रति 10 ग्राम के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। वहीं मार्च वायदा चांदी भी 3 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 2,85,978 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई, जो दिन का उच्चतम स्तर रहा।
हालांकि खबर लिखे जाने तक (सुबह 10.46 बजे के करीब) एमसीएक्स पर 2 अप्रैल एक्सपायरी वाला गोल्ड 4,612 रुपए यानी 2.85 प्रतिशत की उछाल के साथ 1,66,716 रुपए प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था, जबकि 5 मार्च एक्सपायरी वाली चांदी 2.66 प्रतिशत यानी 7,311 रुपए की तेजी के साथ 2,82,309 रुपए प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी।
तेहरान पर इजरायल द्वारा कमान केंद्रों और हवाई सुरक्षा को निशाना बनाकर किए गए हमलों के जवाब में इजरायली क्षेत्र और खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी मिसाइल हमले किए गए, जिससे अनिश्चितता और बढ़ गई।
रविवार को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद क्षेत्र में तनाव ज्यादा बढ़ गया। व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका से बाजार जोखिम से बचाव की मुद्रा में आ गए और होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने की चिंता बढ़ी, जिससे सुरक्षित निवेश की मांग में तेज उछाल आया।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के कमोडिटी विश्लेषक मानव मोदी ने कहा, अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच सोने ने पिछले सप्ताह की तेजी को आगे बढ़ाया। साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति को लेकर बनी अनिश्चितता ने भी वैश्विक आर्थिक जोखिम बढ़ाया है।
डॉलर इंडेक्स 0.24 प्रतिशत बढ़कर 97.85 पर पहुंच गया, जिससे विदेशी मुद्राओं में खरीद करने वाले निवेशकों के लिए डॉलर आधारित सोना महंगा हो गया और पीली धातु की तेजी पर कुछ रोक लगी।
कच्चे तेल की कीमतों में भी 7 प्रतिशत से अधिक की उछाल आई, क्योंकि बाजार को आशंका है कि अमेरिका-ईरान युद्ध से क्षेत्रीय आपूर्ति में बड़ी बाधा आ सकती है।
निवेशक अब प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से जारी होने वाले महत्वपूर्ण विनिर्माण पीएमआई आंकड़ों पर नजर रख रहे हैं, जबकि इस सप्ताह बाजार की दिशा अमेरिकी श्रम बाजार के आंकड़ों पर निर्भर करेगी।
हाल की तेजी वर्ष 2025 में सोने में 64 प्रतिशत की वृद्धि के बाद आई है। यह उछाल केंद्रीय बैंकों की मजबूत खरीद, विनिमय आधारित निधियों में भारी निवेश और अमेरिका में मौद्रिक नीति में नरमी की उम्मीद से प्रेरित रहा है।
जेपी मॉर्गन का अनुमान है कि वर्ष 2026 के अंत तक सोना 6,300 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है, जबकि बैंक ऑफ अमेरिका ने कीमत 6,000 डॉलर प्रति औंस तक जाने की संभावना जताई है।
--आईएएनएस
डीबीपी/
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