CCS मीटिंग के बाद यूएई के राष्ट्रपति से PM मोदी ने की बात, UAE पर हुए हमलों की निंदा की
राजधानी दिल्ली लौटने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आवास पर सीसीएस की अहम बैठक बुलाई. सूत्रों की मानें तो ये बैठक पश्चिम एशिया के संकट को लेकर हो रही है. बैठक के बाद पीएम ने यूएई के राष्ट्रपति से बात की और यूएई पर हुए हमलों की निंदा की.
क्यों बुलाई गई CCS की आपात बैठक?
पीएम मोदी रात करीब दो बजे इस्राइल के दो दिवसीय दौरे से दिल्ली लौटे, जिसके बाद उन्होंने अपने आवास पर बैठक बुलाई. बैठक में ईरान पर हुए इस्राइली-अमेरिकी हमलों के वजह से पैदा हुए संकट, सुरक्षा हालात और भारत के रणनीतिक हितों पर चर्चा हुई. कैबिनेट मंत्रियों सहित वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी और विदेश नीति के जानकार इसमें शामिल हुए.
पीएम मोदी ने जताया दुख
सीसीएस मीटिंग के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से फोन पर बात की. खुद प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर इस बातचीत की जानकारी दी. प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि उन्होंने यूएई पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की है. उन्होंने जान गंवाने वाले लोगों के प्रति गहरा दुख जताया. उन्होंने बताया कि भारत इस कठिन समय में यूएई के साथ मजबूती से खड़ा है.
Spoke with President of the UAE, my brother Sheikh Mohamed bin Zayed Al Nahyan. Strongly condemned the attacks on the UAE and condoled the loss of lives in these attacks. India stands in solidarity with the UAE in these difficult times.
— Narendra Modi (@narendramodi) March 1, 2026
Thanked him for taking care of the Indian…
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका को दी बिना समझौते जवाब की चेतावनी
वॉशिंगटन, 1 मार्च (आईएएनएस)। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को अमेरिका के हवाई हमलों की कड़ी निंदा की। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत हो गई। उन्होंने इन हमलों को गैरकानूनी बताते हुए कहा कि तेहरान बिना किसी समझौते के इसका जवाब देगा। स्थानीय मीडिया एबीसी न्यूज से बात करते हुए अराघची ने वॉशिंगटन की सफाई को सिरे से खारिज कर दिया।
उन्होंने कहा, “संयुक्त राज्य अमेरिका जो कर रहा है वह आक्रामकता का कृत्य है। हम जो कर रहे हैं वह आत्मरक्षा का कृत्य है।”
यह बयान ईरान की कूटनीतिक और कानूनी स्थिति को स्पष्ट करता है, जिसमें अमेरिका को आक्रांता बताया गया है और तेहरान की प्रतिक्रिया को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत वैध ठहराया गया है। अराघची ने अपने बयान में तनाव कम करने का कोई संकेत नहीं दिया।
उन्होंने कहा, “हम अपनी रक्षा कर रहे हैं, चाहे जो भी करना पड़े।”
यह भाषा खुली और व्यापक प्रतिशोध की चेतावनी देती है। अराघची ने न तो कोई समय-सीमा बताई, न ही संभावित लक्ष्यों का जिक्र किया और न ही बातचीत के लिए तत्परता का संकेत दिया।
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अमेरिकी अधिकारी ईरान की मिसाइल अवसंरचना को कमजोर करने के उद्देश्य से जारी अभियान का वर्णन कर रहे हैं। हालांकि, अराघची ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को हुए नुकसान को स्वीकार नहीं किया और न ही खामेनेई की मौत के बाद राजनीतिक व्यवस्था में अस्थिरता का कोई संकेत दिया।
इस बीच, अमेरिकी सांसदों ने संकेत दिया कि अभियान जारी रहेगा।
सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी के अध्यक्ष टॉम कॉटन ने कहा कि आने वाले दिनों में ईरान की मिसाइलों, उसके मिसाइल लॉन्चरों और अंततः उसकी मिसाइल निर्माण क्षमता पर व्यवस्थित और क्रमबद्ध तरीके से ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
उन्होंने चेतावनी दी, “इसमें कोई संदेह नहीं है कि ईरान क्षेत्र में हमारे ठिकानों, हमारे अरब सहयोगियों और इजरायल को निशाना बनाना जारी रखेगा।”
अन्य अमेरिकी नेताओं ने हमले के खुफिया आधार पर सवाल उठाए। सीनेटर मार्क वार्नर ने कहा, “संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए कोई तात्कालिक खतरा नहीं था। सर्वोच्च नेता के मारे जाने के बाद आगे क्या होगा, इस बारे में हमें बहुत कम जानकारी है।”
सीनेटर एडम शिफ ने भी कार्रवाई के पैमाने की आलोचना करते हुए कहा, “इस व्यापक सैन्य अभियान के लिए, जिसका उद्देश्य शासन परिवर्तन था, कोई आधार नहीं था।”
अपने सर्वोच्च नेता की मृत्यु के बाद ईरान अब संक्रमण के दौर में प्रवेश कर रहा है। उसके संविधान के अनुसार, नए नेता के चयन की जिम्मेदारी असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स पर है। हालांकि, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) का व्यवस्था के भीतर महत्वपूर्ण प्रभाव है।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
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