तमिलनाडु : उदयनिधि स्टालिन ने चेन्नई के कस्तूरबा गांधी अस्पताल में नए मैटरनिटी ब्लॉक का उद्घाटन किया
चेन्नई, 1 मार्च (आईएएनएस)। तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने रविवार को चेन्नई के चेपक में इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल ऑब्सटेट्रिक्स एंड गवर्नमेंट कस्तूरबा गांधी हॉस्पिटल फॉर विमेन एंड चिल्ड्रेन में एक नए बने मल्टी-स्टोरी मैटरनिटी और सर्जिकल ब्लॉक का उद्घाटन किया। इससे राज्य की राजधानी में मैटरनल और नियोनेटल हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा।
32.32 करोड़ रुपए की लागत से बनी यह मॉडर्न फैसिलिटी 66,658 स्क्वायर फीट में फैली है और इसमें एक ग्राउंड फ्लोर और दो ऊपरी फ्लोर हैं।
नए ब्लॉक से हॉस्पिटल की कैपेसिटी में 100 बेड जुड़ गए हैं और यह एडवांस्ड मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर से लैस है, जिसका मकसद महिलाओं और नवजात बच्चों की पूरी देखभाल को बेहतर बनाना है।
ग्राउंड फ्लोर पर पूरी तरह से इक्विप्ड ऑपरेशन थिएटर, एक ब्लड सैंपल कलेक्शन यूनिट और एक लैबोरेटरी है।
पहली और दूसरी मंजिल पर लेबर मॉनिटरिंग रूम, लेबर वार्ड, पोस्टनेटल केयर यूनिट, नियोनेटल केयर सेक्शन और संक्रामक बीमारियों के लिए आइसोलेशन वार्ड हैं।
बिल्डिंग में स्टेट-ऑफ-द-आर्ट ऑपरेशन थिएटर, लैप्रोस्कोपिक (मिनिमली इनवेसिव) सर्जिकल फैसिलिटी, पोस्ट-ऑपरेटिव केयर यूनिट, कंटीन्यूअस मॉनिटरिंग सिस्टम और स्पेशलाइज्ड एनेस्थीसिया और पेन मैनेजमेंट सर्विस भी हैं।
फैसिलिटी का उद्घाटन करने के बाद, उदयनिधि स्टालिन ने एडिशनल ब्लॉक में बनाए गए एडवांस्ड ऑपरेशन थिएटर और मैटरनिटी ट्रीटमेंट यूनिट का इंस्पेक्शन किया।
अधिकारियों ने उन्हें मरीजों की सुरक्षा को बेहतर बनाने, मुश्किलों को कम करने और मां और बच्चे की सेहत को बेहतर बनाने के लिए बनाए गए अपग्रेड किए गए इंफ्रास्ट्रक्चर के बारे में बताया।
यह बढ़ोतरी अस्पताल में मरीजों के भारी बोझ को देखते हुए की गई है।
अकेले 2025 में, इस संस्थान में 1,70,731 आउटपेशेंट विजिट और 1,32,886 इनपेशेंट एडमिशन दर्ज किए गए, जो राज्य के सबसे बड़े सरकारी मैटरनिटी अस्पतालों में से एक के तौर पर इसकी अहम भूमिका को दिखाता है। उसी साल, अस्पताल ने 6,265 नॉर्मल डिलीवरी और 2,730 सिज़ेरियन (एलएससीएस) प्रोसीजर किए। इसने 4,323 बड़ी सर्जरी, 8,418 छोटी सर्जरी और 1,200 परिवार कल्याण सर्जरी भी कीं, जो दी जाने वाली सेवाओं की बड़ी रेंज को दिखाता है।
उद्घाटन के मौके पर स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री मा. सुब्रमण्यम, सांसद दयानिधि मारन और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी पी. सेंथिल कुमार मौजूद थे। हेल्थ अधिकारियों ने कहा कि नया ब्लॉक हॉस्पिटल की हाई-क्वालिटी मैटरनल और नियोनेटल केयर देने की कैपेसिटी को काफी बढ़ाएगा, जिससे तमिलनाडु का पब्लिक हेल्थ सिस्टम और महिलाओं और बच्चों के लिए आसान और सस्ती हेल्थकेयर पर फोकस मजबूत होगा।
--आईएएनएस
एससीएच
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
ईशनिंदा की धमकी देकर ईसाई परिवार की संपत्ति पर कब्जे का आरोप, पाक मानवाधिकार संगठन ने जांच की मांग की
इस्लामाबाद, 1 मार्च (आईएएनएस)। पाकिस्तान के शहर गुजरांवाला में एक ईसाई परिवार की संपत्ति पर कथित तौर पर अवैध कब्जा करने और उसे वापस लेने की कोशिश पर ईशनिंदा (ब्लैसफेमी) के झूठे आरोप लगाने की धमकी देने का मामला सामने आया है। मानवाधिकार संगठन मानवाधिकार फोकस पाकिस्तान (एचआरएफपी) ने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए पीड़ित परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।
ईरान-आधारित प्रकाशन यूरेशिया समीक्षा की रिपोर्ट के अनुसार, सरवर मसीह और उनका परिवार 23 फरवरी से गंभीर धमकियों का सामना कर रहा है। आरोप है कि उनके एक मुस्लिम पड़ोसी ने उनकी जमीन पर कब्जा कर लिया और चेतावनी दी कि यदि परिवार ने अपनी संपत्ति वापस लेने की कोशिश की तो उन पर ईशनिंदा का आरोप लगा दिया जाएगा।
एचआरएफपी का कहना है कि कथित रूप से ईशनिंदा कानूनों का इस्तेमाल गैरकानूनी जमीन कब्जाने के औजार के रूप में किया गया। संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि सरवर मसीह और उनके परिवार को सुरक्षा दी जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया जाए।
रिपोर्ट के मुताबिक, कब्जे के बाद आरोपित लोगों ने घर पर धार्मिक बैनर, कुरान की आयतें और मदीना की तस्वीरें लगा दीं, ताकि विवाद को धार्मिक रंग दिया जा सके। सरवर मसीह, उनकी पत्नी और उनके भाई ने एचआरएफपी को बताया कि यदि उन्होंने इन बैनरों को हटाने की कोशिश की तो उन पर ईशनिंदा का झूठा आरोप लगाया जा सकता है।
परिवार का कहना है कि ऐसे किसी भी कदम से न केवल उनकी जान को खतरा है, बल्कि इलाके के अन्य ईसाई समुदाय की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है। गवाहों, जिनमें एक पांच वर्षीय मुस्लिम बच्चा मोहम्मद शाहिद भी शामिल है, ने बताया कि वे इस परिवार को बचपन से जानते हैं और यह संपत्ति उसी परिवार की है।
मसीह परिवार का दावा है कि आरोपितों ने चेतावनी लिखकर लगाई है कि जो भी दरवाजा खोलने या बैनर हटाने की कोशिश करेगा, उस पर इस्लामी सामग्री के अपमान का आरोप लगाया जाएगा और इलाके में घरों को आग के हवाले कर दिया जाएगा।
एचआरएफपी की जांच के अनुसार, मसीह परिवार पिछले सात दशकों से इस संपत्ति में रह रहा है और स्वामित्व को लेकर पहले कभी कोई कानूनी विवाद या अदालती मामला नहीं रहा। परिवार का कहना है कि ईशनिंदा के आरोपों का डर न्याय पाने में सबसे बड़ी बाधा बन रहा है, क्योंकि पहले भी ऐसे आरोपों के बाद ईसाई घरों पर हमले और आगजनी की घटनाएं हो चुकी हैं।
एचआरएफपी के अध्यक्ष नवीन वाल्टर ने कहा कि यह मामला एक चिंताजनक पैटर्न को दर्शाता है। उन्होंने फैसलाबाद नर्सेस केस और जरनवाला हिंसा जैसी घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि निजी विवादों, संपत्ति संघर्ष और कार्यस्थल के तनाव जैसे मामलों में भी ईशनिंदा के आरोपों का दुरुपयोग किया गया है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संपत्ति पर कब्जे के दौरान पुलिस ने हस्तक्षेप नहीं किया और न ही आरोपितों के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की। वाल्टर के अनुसार, “ईशनिंदा के आरोपों को लेकर बने भय के माहौल के कारण अक्सर प्रशासन और समुदाय समय पर कार्रवाई करने से हिचकते हैं।”
--आईएएनएस
डीएससी
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