दिल्ली प्रदूषण : पर्यावरणविद् भावरीन कंधारी की सलाह, 'रोकथाम के प्रयास पूरे साल चलने चाहिए'
नई दिल्ली, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए ग्रैप (ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान) लागू किया गया है। प्रसिद्ध पर्यावरणविद् भावरीन कंधारी ने दिल्ली में प्रदूषण के बढ़ते स्तर और एक्यूआई (वायु गुणवत्ता सूचकांक) को लेकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बुधवार को आईएएनएस को बताया कि यह एक्शन प्लान हर साल आता है। इस साल समय से पहले इसके बारे में बात हुई और समय से पहले इसे शुरू कर दिया गया।
Tata Group पर Rahul Gandhi के आरोपों पर Nirmala Sitharaman का पलटवार, कांग्रेस पर साधा निशाना
देश के बड़े उद्योगों और कारोबार को लेकर राजनीतिक बयानबाजी एक बार फिर तेज हो गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के टाटा समूह को लेकर दिए गए बयान पर पलटवार किया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि टाटा समूह को जानबूझकर बर्बाद किया जा रहा है। इस पर निर्मला सीतारमण ने कहा कि विपक्ष के नेता को हर मुद्दे पर राजनीति करने से बचना चाहिए और कारोबारी तथा कानूनी मामलों को बिना ठोस आधार के आपराधिक रंग देना ठीक नहीं है।
निर्मला सीतारमण ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के जरिए राहुल गांधी को जवाब दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता होने के नाते राहुल गांधी को हर विषय को राजनीतिक विवाद बनाने से बचना चाहिए। वित्त मंत्री के मुताबिक, कारोबारी और कानूनी मामलों को आसानी से अपराध से जोड़कर पेश करना स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने राहुल गांधी के आरोपों को भारतीय उद्योग जगत पर बेबुनियाद सवाल उठाने वाला बताया।
दरअसल, राहुल गांधी ने बुधवार को आरोप लगाया था कि देश के कारोबारियों को प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हाथों की कठपुतली की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि उद्योग जगत के बड़े कारोबारी इस मामले पर चुप क्यों हैं। टाटा समूह को लेकर उनकी टिप्पणी के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया।
राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए निर्मला सीतारमण ने कहा कि वह बार-बार भारतीय उद्योगों और उद्यमियों की उपलब्धियों पर सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या राहुल गांधी कारोबारियों को उनके साथ जुड़कर अविश्वास और नकारात्मकता फैलाने के लिए उकसाने की कोशिश कर रहे हैं।
वित्त मंत्री ने कांग्रेस के पुराने आर्थिक फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी पार्टी के शासनकाल में लंबे समय तक चली लाइसेंस और कोटा व्यवस्था ने भारतीय उद्यमियों की काम करने की आजादी को सीमित किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस व्यवस्था ने देश में उद्यमिता की भावना को दबाया और करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकलने के पर्याप्त अवसर नहीं मिले।
इसके उलट, निर्मला सीतारमण ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की नीतियों का बचाव किया। उन्होंने कहा कि सरकार भारतीय उद्योगों को रोजगार और आर्थिक विकास का अहम आधार मानती है। उनके अनुसार, सरकार की नीतियां कारोबार को बढ़ावा देने, उद्योगों को समर्थन देने और निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से बनाई गई हैं।
गौरतलब है कि भारत में उद्योगों की भूमिका को लेकर राजनीतिक दलों के बीच लंबे समय से बहस होती रही है। एक ओर उद्योगों को रोजगार, निवेश और आर्थिक विकास का प्रमुख माध्यम माना जाता है, वहीं दूसरी ओर कारोबारी समूहों और सरकार के संबंधों को लेकर विपक्ष सवाल उठाता रहा है। ऐसे मामलों में आरोपों और उनके समर्थन में पेश किए गए तथ्यों के आधार पर ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना महत्वपूर्ण होता है।
निर्मला सीतारमण ने राजनीतिक दलों, सरकारों और संस्थाओं से उद्योगों को समर्थन देने, किसानों को मजबूत बनाने और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए मिलकर काम करने की अपील भी की। उन्होंने न्यायपालिका का जिक्र करते हुए कहा कि संविधान सभी नागरिकों को न्याय की गारंटी देता है और अदालतों की जिम्मेदारी उसकी रक्षा करना है।
वित्त मंत्री ने राहुल गांधी, उनकी पार्टी और कांग्रेस के पूर्व प्रधानमंत्रियों पर न्यायपालिका का सम्मान कम करने का आरोप भी लगाया। अपने बयान के अंत में उन्होंने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें हर जगह गलत इरादे या साजिश नजर आने से बचना चाहिए। इस तरह टाटा समूह को लेकर शुरू हुआ विवाद अब उद्योग, आर्थिक नीतियों और न्यायपालिका पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गया है।
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