आसियान रक्षा बैठक से इतर मिले राजनाथ सिंह और पीट हेगसेथ, जानें क्या हुई बात?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज फिलीपींस में 13वीं आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक (ADMM)-प्लस के दौरान अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के साथ मुलाकात की। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में, श्री सिंह ने बताया कि उन्होंने 10 साल के भारत-अमेरिका रक्षा ढांचे की प्रगति की समीक्षा की। यह ढांचा सैन्य तकनीक, सूचना साझा करने और संयुक्त उत्पादन के क्षेत्रों में रणनीतिक तालमेल को बढ़ावा देता है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की मजबूत साझेदारी, एक स्वतंत्र, खुले और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए एक आधारस्तंभ बनी हुई है। भारत और अमेरिका ने पिछले साल अक्टूबर में रक्षा रूपरेखा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। यह समझौता दोनों रणनीतिक साझेदारों के बीच द्विपक्षीय रक्षा साझेदारी को और मजबूत करने के लिए एक महत्वाकांक्षी रूपरेखा प्रस्तुत करता है। हेगसेथ और सिंह दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्रों के संगठन (आसियान) के सदस्य देशों और उसके कुछ संवाद साझेदारों के समूह की बैठक आसियान डिफेंस मिनिस्टर्स मीटिंग प्लस (एडीएमएम-प्लस) में शामिल होने के लिए सेबू में हैं। दोनों नेताओं के बीच यह बैठक फिलीपीन के सेबू में एक बहुपक्षीय सम्मेलन से इतर हुई। एडीएमएम-प्लस 11 सदस्यीय आसियान (दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन) और उसके आठ संवाद साझेदारों - भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया, जापान, न्यूजीलैंड, दक्षिण कोरिया, रूस और अमेरिका का मंच है। रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में हेगसेथ के साथ अपनी बातचीत को शानदार बताया।
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उन्होंने कहा हमने 10 वर्षीय भारत-अमेरिका रक्षा रूपरेखा की प्रगति की समीक्षा की। इसके तहत सैन्य प्रौद्योगिकी, सूचनाओं के आदान-प्रदान और संयुक्त उत्पादन के क्षेत्र में रणनीतिक तालमेल को बढ़ावा दिया जा रहा है। हमारी मजबूत साझेदारी स्वतंत्र, मुक्त और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए एक आधार बनी हुई है। अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत के रक्षा मंत्री सिंह के साथ बहुत अच्छी मुलाकात रही। हमने अपनी प्रमुख रक्षा साझेदारी की रूपरेखा के एक वर्ष पूरे होने के अवसर पर सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के दौरान दोनों देशों के राजनयिक संबंधों में जारी तनाव के बावजूद भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंध मजबूत हुए हैं। करीब 11 साल पहले अमेरिका ने भारत को प्रमुख रक्षा साझेदार का दर्जा दिया था, जिससे महत्वपूर्ण सैन्य उपकरणों और प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान का रास्ता खुला।
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दोनों देशों ने पिछले कुछ वर्षों में रक्षा और सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए हैं। इनमें 2016 में हुआ ‘लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट’ (लेमोआ) शामिल है जिसके तहत दोनों देशों की सेनाएं मरम्मत और जरूरी सामान की आपूर्ति के लिए एक-दूसरे के सैन्य अड्डों का इस्तेमाल कर सकती हैं। भारत और अमेरिका ने 2018 में ‘कम्युनिकेशंस कम्पैटिबिलिटी एंड सिक्योरिटी एग्रीमेंट’ (कॉमकासा) पर भी हस्ताक्षर किए थे। यह दोनों देशों की सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करता है और अमेरिका से भारत को अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी की बिक्री का मार्ग प्रशस्त करता है। अक्टूबर 2020 में दोनों देशों ने द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को और मजबूत करने के लिए ‘बेसिक एक्सचेंज एंड कोऑपरेशन एग्रीमेंट’ (बेका) पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच अत्याधुनिक सैन्य प्रौद्योगिकी, रसद और भू-स्थानिक मानचित्रों को साझा करने का प्रावधान है। सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री रिचर्ड मार्ल्स के साथ भी बैठक की। रक्षा मंत्री ने कहा हमने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग की समीक्षा करने, सैन्य तालमेल बढ़ाने और सुरक्षा संबंधी क्षेत्रीय चुनौतियों से निपटने के मुद्दों पर सार्थक चर्चा की। भारत स्वतंत्र, मुक्त और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए ऑस्ट्रेलिया के साथ अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी को बहुत महत्व देता है।
नोएल टाटा 6 बड़ी कंपनियों के बोर्ड से हटेंगे:12 नवंबर को 70 साल के होंगे, रिटायरमेंट पॉलिसी के तहत फैसला; टाटा संस के बोर्ड में बने रहेंगे
टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा 12 नवंबर को 70 साल के होने जा रहे हैं। नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स के लिए टाटा ग्रुप की रिटायर्ड पॉलिसी के तहत वे समूह की 6 प्रमुख कंपनियों के बोर्ड से इस्तीफा देंगे। हालांकि, वे टाटा संस के बोर्ड में टाटा ट्रस्ट्स के नॉमिनी डायरेक्टर के रूप में बने रहेंगे। यह बदलाव ऐसे समय पर हो रहा है, जब टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के रीअपॉइंटमेंट, टाटा संस की लिस्टिंग और ग्रुप के गवर्नेंस नियमों को लेकर मतभेद चल रहा हैं। जानिए इस फैसले और इससे जुड़े विवाद से जुड़े प्रमुख सवाल-जवाब… सवाल 1: नोएल टाटा किन 6 कंपनियों के बोर्ड से हटने जा रहे हैं? जवाब: नोएल टाटा ट्रेंट, वोल्टास, टाटा इन्वेस्टमेन्ट कॉर्पोरेशन, टाटा इंटरनेशनल, ट्रेंट हाइपरमार्केट प्राइवेट लिमिटेड और दुबई स्थित टाटा इंटरनेशनल वेस्ट एशिया DMCC के नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन पद से हटेंगे। इसके अलावा, वे टाटा स्टील और टाइटन कंपनी के नॉन-एग्जीक्यूटिव वाइस-चेयरमैन और इंडिटेक्स ट्रेंट रिटेल इंडिया के डायरेक्टर पद से भी इस्तीफा देंगे। सवाल 2: क्या वे टाटा समूह की किसी भी ऑपरेटिंग कंपनी में बने रहेंगे? जवाब: हां, वे ट्रेंट लिमिटेड और टेस्को के जॉइंट वेंचर 'ट्रेंट हाइपरमार्केट लिमिटेड' के बोर्ड में बने रहेंगे। यह कंपनी स्टार बाजार और स्टार डेली नाम से रिटेल स्टोर्स का संचालन करती है। सवाल 3: 70 साल की उम्र में रिटायरमेंट का नियम क्या है और यह नोएल टाटा पर कैसे लागू होता है? जवाब: टाटा समूह के गवर्नेंस फ्रेमवर्क के तहत एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स के लिए रिटायरमेंट की उम्र 65 साल और नॉन-एग्जीक्यूटिव/नॉन-इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स के लिए 70 साल है। नोएल टाटा 12 नवंबर को 70 साल के हो रहे हैं, इसलिए वे पॉलिसी का पालन करते हुए ऑपरेटिंग कंपनियों के बोर्ड से हट रहे हैं। सवाल 4: जब वे 6 कंपनियों से हट रहे हैं, तो टाटा संस के बोर्ड में कैसे बने रहेंगे? जवाब: टाटा संस में उनकी भूमिका अलग है। वे वहां किसी ऑपरेटिंग कंपनी के डायरेक्टर के रूप में नहीं, बल्कि टाटा ट्रस्ट्स के 'नॉमिनी डायरेक्टर' के रूप में शामिल हैं। टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की लगभग 66% हिस्सेदारी है। होल्डिंग कंपनी में शेयरहोल्डर द्वारा नामित डायरेक्टर्स के नियम ऑपरेटिंग कंपनियों के नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स से अलग होते हैं, इसलिए वे टाटा संस के बोर्ड में बने रहेंगे। सवाल 5: नोएल टाटा के हटने से इन 6 कंपनियों पर क्या असर पड़ेगा? जवाब: ट्रेंट, वोल्टास, टाटा इंटरनेशनल और टाटा इन्वेस्टमेन्ट कॉर्पोरेशन में नए चेयरमैन की नियुक्ति करनी होगी। वहीं टाटा स्टील और टाइटन में वाइस-चेयरमैन का पद खाली होगा। कॉर्पोरेट गवर्नेंस विशेषज्ञों का मानना है कि प्रमोटर परिवार या प्रभावशाली पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा रिटायरमेंट नियमों का पालन करना संस्थागत अनुशासन का अच्छा संकेत है। सवाल 6: एन. चंद्रशेखरन के साथ नोएल टाटा का विवाद क्या है? जवाब: विवाद एन. चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल को लेकर है। 17 सितंबर को टाटा संस के बोर्ड ने चंद्रशेखरन को 21 फरवरी 2027 से अगले 5 साल के लिए दोबारा चेयरमैन नियुक्त करने का प्रस्ताव बहुमत से पास किया था। नोएल टाटा ने इसका विरोध किया था। सवाल 7: चंद्रशेखरन के री-अपॉइंटमेंट पर नोएल टाटा की मुख्य आपत्ति क्या है? जवाब: नोएल टाटा के मुताबिक, टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के तहत किसी भी फैसले के लिए टाटा ट्रस्ट्स द्वारा नामित डायरेक्टर्स की मंजूरी अनिवार्य है। टाटा संस बोर्ड में ट्रस्ट्स के दो नॉमिनी डायरेक्टर हैं नोएल टाटा और वेणु श्रीनिवासन। श्रीनिवासन ने प्रस्ताव का समर्थन किया था, जबकि नोएल टाटा ने विरोध। नोएल टाटा का तर्क है कि बहुमत या चेयरमैन का कास्टिंग वोट ट्रस्ट के नॉमिनी की मंजूरी का विकल्प नहीं हो सकता। सवाल 8: 26 अक्टूबर को भेजे गए खत में नोएल टाटा ने क्या नए सवाल उठाए हैं? जवाब: नोएल टाटा ने टाटा संस के कंपनी सेक्रेटरी सुप्राकाश मुखोपाध्याय को पत्र लिखकर कॉर्पोरेट अफेयर्स मिनिस्ट्री (MCA) में चंद्रशेखरन की री-अपॉइंटमेंट से जुड़ी फाइलिंग पर सवाल उठाए। उन्होंने 17 सितंबर की मीटिंग के फाइनल मिनट्स, वोटिंग रिकॉर्ड और ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग मांगी है। इसके अलावा, उन्होंने पूछा कि क्या री-अपॉइंटमेंट के लिए तय सेलेक्शन कमेटी बनाई गई थी और क्या चंद्रशेखरन व श्रीनिवासन के परिवारों से जुड़े बिजनेस सौदों में कोई कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट तो नहीं है। सवाल 9: इस विवाद में एन. चंद्रशेखरन की उम्र का क्या रोल है? जवाब: चंद्रशेखरन 63 साल के हैं और 2 जून 2028 को 65 साल के हो जाएंगे। टाटा ग्रुप के नियमों के मुताबिक एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स के लिए रिटायरमेंट की उम्र 65 साल है। अगर चंद्रशेखरन 2032 तक पद पर रहते हैं, तो वे 65 की उम्र सीमा पार कर जाएंगे। इसके लिए ग्रुप पॉलिसी में विशेष छूट की जरूरत होगी। सवाल 10. टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर दोनों पक्षों में क्या मतभेद है? जवाब: भारतीय रिजर्व बैंकद्वारा टाटा संस को अपर-लेयर NBFC के रूप में वर्गीकृत करने के कारण उस पर शेयर बाजार में लिस्ट होने का दबाव है। चंद्रशेखरन का रुख लिस्टिंग की तैयारियों की ओर है, जबकि नोएल टाटा के नेतृत्व वाला टाटा ट्रस्ट्स होल्डिंग कंपनी की लिस्टिंग के खिलाफ है। ये खबर भी पढ़ें… टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के री-अपॉइंटमेंट पर विवाद: नोएल टाटा ने 5 साल के कार्यकाल पर सवाल उठाए; बोर्ड मीटिंग की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग मांगी टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने टाटा संस के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को दिए गए दूसरे 5 साल के एक्सटेंशन को चुनौती दी है। उन्होंने नियमों की अनदेखी, वोटिंग नियमों के उल्लंघन और 'कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट' यानी हितों के टकराव के आरोप लगाए हैं। द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, नोएल टाटा ने टाटा संस के कंपनी सेक्रेटरी को खत लिखकर 17 सितंबर की बोर्ड मीटिंग का रिकॉर्ड मांगा है। पूरी खबर पढ़ें…
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