AAP नेता संजय सिंह का दावा, उड़ीसा के सुंदरगढ़ जिले में आदिवासी समाज से 950 एकड़ जमीन जबरन छीनकर पूंजीपति को दी
आम आदमी पार्टी ने उड़ीसा के सुंदरगढ़ जिले में आदिवासियों की 950 एकड़ जमीन अधिग्रहित कर डालमिया सीमेंट को देने पर बड़ा दावा किया है. ‘आप’ के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि सरकार ने पेसा एक्ट को दरकिनार कर डालमिया सीमेंट के विस्तार के लिए आदिवासी समाज से 950 एकड़ जमीन जबरन छीन ली है. पेसा एक्ट कहता है कि आदिवासियों की जमीन लेने से पहले ग्राम पंचायतों की सहमति लेनी आवश्यक है. मगर, कोई सहमति नहीं ली गई और पुलिस के दम पर जबरदस्ती 5 ग्राम पंचायतों के 12 गांवों की जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया गया. उन्होंने कहा कि भाजपा और मोदी सरकार दलितों, आदिवासियों और वंचितों से नफरत करती है. गरीबों और आदिवासियों से जमीन छीनकर अपने पूंजीपति मित्रों को देना ही इनका एकमात्र लक्ष्य बन चुका है.
950 एकड़ जमीन जबरन अधिग्रहित की
“आप” मुख्यालय पर प्रेस वार्ता कर संजय सिंह ने बुधवार को कहा कि पूरे देश में किसान,आदिवासी, दलित और वंचित तबके के लोगों की जमीन को बिना मुआवजा दिए जबरन अधिग्रहित किया गया है. पुलिस बल लगाकर लोगों को बेदखल किया गया है. जहां-जहां भी इनकी डबल या सिंगल इंजन सरकार है, उनका एक ही लक्ष्य है कि किसी भी तरह से पूंजीपतियों के लिए जमीन पर कब्जा करना है. चाहे इसके लिए गोली या डंडा ही क्यों न चलाना पड़े. बिहार में एक रुपए में 10 लाख आम-लीची के पेड़ और हजारों एकड़ जमीन अडानी को दे दी गई थी. इसी तरह, उड़ीसा के सुंदरगढ़ जिले में डालमिया सीमेंट के विस्तार के लिए आदिवासियों की करीब 950 एकड़ जमीन जबरन अधिग्रहित की जा रही है.
डंडे-लाठी के दम पर उनकी जमीनें कब्जा ली
संजय सिंह ने बताया कि कानून और नियम कहते हैं कि बिना पंचायत और आदिवासी समाज की सहमति के उनकी जमीन का अधिग्रहण या कब्जा नहीं किया जा सकता है. लेकिन सुंदरगढ़ में पांच पंचायत और लगभग 11-12 गांवों के लोगों से कोई सहमति नहीं ली गई और डंडे-लाठी के दम पर उनकी जमीनें कब्जा ली गईं.
आदिवासियों की जमीनें छिनने से बचाई
यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी चल रहा है और मैंने इसे संसद में उठाने के लिए नोटिस भी दिया है. इस दौरान सुंदरगढ़ में जमीन मालिक राकेश रोशन ने कहा कि बहुत दुख की बात है कि उड़ीसा के मुख्यमंत्री, हमारे सुंदरगढ़ जिले से आने वाले केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री और यहां तक कि देश की राष्ट्रपति भी आदिवासी हैं, लेकिन इतने बड़े पदों पर होने के बावजूद आदिवासियों की जमीनें छिनने से बचाई नहीं जा रही हैं. हमारी 950 एकड़ से ज्यादा जमीनें हमारी जानकारी और सहमति के बिना ही काट ली गईं. जब हम अपना धान बेचने गए, तब हमें पता चला कि हमारी जमीन कम हो गई है. हमारी यह लड़ाई 2018 से जारी है. हमने विरोध प्रदर्शन किए, पदयात्रा निकाली और गवर्नर ऑफिस के सामने भी धरना दिया, लेकिन हमारे लोगों पर झूठे केस दर्ज किए गए और कई लोगों को गिरफ्तार भी किया गया.
202 फीट गहरे गड्ढे खोद दिए गए
इस दौरान राकेश रोशन का दावा है कि पुलिस बल लगाकर जबरन जमीन अधिग्रहण के समय हमारे खेतों में मसूर और उड़द की दालें बोई हुई थीं. उन फसलों को डोजर लगाकर साफ कर दिया गया और 202 फीट गहरे गड्ढे खोद दिए गए. करीब 27 एकड़ जमीन पर अब पत्थर निकालकर माइनिंग का काम चल रहा है. सीएजी और आरडीसी की रिपोर्ट भी कहती है कि ग्राम सभा की सहमति नहीं ली गई है. ग्राम सभा ने साफ कहा था कि वह 1 इंच भी जमीन नहीं देगी क्योंकि डालमिया सीमेंट पहले ही हमारी जमीन चार बार ले चुका है. हमारे पास भविष्य की पीढ़ियों के लिए मुश्किल से कुछ एकड़ जमीन बची है. आदिवासी होने के नाते जमीन हमारी रीढ़ की हड्डी है, जो हमें हमारी पहचान देती है.
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