एमपी टूरिज्म क्विज 2026 में बालाघाट बना विजेता, धार दूसरे और सीधी तीसरे स्थान पर, टीमों को मिले मध्य प्रदेश भ्रमण के निःशुल्क टूर पैकेज
भोपाल। मध्य प्रदेश के पर्यटन स्थलों, इतिहास और संस्कृति से जुड़े सवालों के जवाब देकर बालाघाट के विद्यार्थियों ने राज्य स्तरीय एमपी टूरिज्म क्विज-2026 का खिताब अपने नाम कर लिया। भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में आयोजित प्रतियोगिता में बालाघाट के शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की टीम पहले स्थान पर रही, जबकि धार के पब्लिक स्कूल ने दूसरा और सीधी के काशी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ने तीसरा स्थान हासिल किया। विजेता टीमों को पुरस्कार के रूप में मध्य प्रदेश के पर्यटन स्थलों के भ्रमण के लिए निःशुल्क टूर पैकेज दिए गए हैं। इनमें पर्यटन विभाग के होटलों में ठहरने की सुविधा भी शामिल है।
मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड और स्कूल शिक्षा विभाग के सहयोग से आयोजित इस प्रतियोगिता में प्रदेश के 53 जिलों के 24 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। सरकारी और निजी स्कूलों में कक्षा 9वीं से 12वीं तक पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए आयोजित क्विज की इस बार की थीम ‘द ट्रेजर आर्ट ऑफ एमपी’ रखी गई थी।
छह जिलों की टीमों के बीच हुआ फाइनल मुकाबला
जिला स्तर की प्रतियोगिताओं के बाद बालाघाट, धार, सीधी, मुरैना, सतना और उमरिया की टीमों ने राज्य स्तरीय फाइनल में जगह बनाई थी। इन टीमों के बीच मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक स्थलों, पर्यटन, प्राकृतिक विरासत और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े सवालों पर मुकाबला हुआ।
फाइनल में पहले तीन स्थान हासिल करने वाली टीमों को अलग-अलग अवधि के टूर पैकेज दिए गए। बालाघाट की विजेता टीम को पांच दिन और चार रात, धार की टीम को चार दिन और तीन रात तथा सीधी की टीम को तीन दिन और दो रात का निःशुल्क टूर पैकेज मिला है।
फाइनल में पहुंचीं मुरैना, सतना और उमरिया की टीमों को भी पर्यटन विभाग की ओर से मध्य प्रदेश भ्रमण का पुरस्कार दिया गया है। इसके अलावा जिला स्तरीय प्रतियोगिता की टीमों को भी तीन दिन और दो रात के भ्रमण का अवसर दिया गया है।
पर्यटन की जानकारी से करियर के अवसर भी मिलेंगे
प्रतियोगिता के विजेताओं को संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने टूर पैकेज के कूपन और मेडल प्रदान किए। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले अन्य विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र दिए गए।
मंत्री लोधी ने कहा कि पर्यटन क्विज का उद्देश्य बच्चों को प्रदेश के ऐतिहासिक स्थलों, संस्कृति और प्राकृतिक धरोहरों के बारे में जानकारी देना है। इससे विद्यार्थियों की सामान्य जानकारी बढ़ने के साथ पर्यटन क्षेत्र में उपलब्ध करियर के अवसरों के बारे में भी समझ विकसित होगी।
उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार और कारोबार की कई संभावनाएं हैं। विद्यार्थियों को इन अवसरों से परिचित कराने के लिए इस तरह की प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं।
अब तक 21 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों तक पहुंची पर्यटन क्विज
मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी. ने कहा कि अपने प्रदेश की विरासत और पर्यटन स्थलों की जानकारी विद्यार्थियों के भविष्य में भी काम आ सकती है। पर्यटन और ट्रैवल इंडस्ट्री में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं के लिए यह जानकारी उपयोगी साबित होगी।
उन्होंने विद्यार्थियों को प्रतियोगिताओं में भाग लेने, लगातार सीखने और अपने लक्ष्य पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया। उनका कहना था कि मध्य प्रदेश की संस्कृति और धरोहर की जानकारी रखने वाला हर विद्यार्थी प्रदेश का ब्रांड एंबेसडर बन सकता है।
टूरिज्म बोर्ड के अपर प्रबंध संचालक डॉ. अभय अरविंद बेडेकर ने बताया कि पर्यटन क्विज का आयोजन हर साल किया जाता है। इसके माध्यम से अब तक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 21 लाख से अधिक विद्यार्थी मध्य प्रदेश पर्यटन से जुड़ चुके हैं। प्रतियोगिता के जरिए बच्चों को ऐतिहासिक स्थलों के साथ प्रदेश के जंगलों, वन्यजीवों और सांस्कृतिक परंपराओं की जानकारी भी दी जाती है।
30 छात्राओं ने 35 मिनट में मंच पर प्रस्तुत की रामकथा
प्रतियोगिता के समापन पर भोपाल के शासकीय आदर्श आवासीय कन्या संस्कृत विद्यालय की 30 छात्राओं ने ‘श्री रामचरितम्’ की प्रस्तुति दी। छात्राओं ने शास्त्रीय अभिनय और लोक संगीत के जरिए भगवान श्रीराम के जन्म से लेकर वनवास, सीता हरण, राम-रावण युद्ध और राज्याभिषेक तक की कथा को 35 मिनट में मंच पर प्रस्तुत किया।
इसके अलावा विद्यार्थियों के लिए माइंड रीडर प्ले का भी आयोजन किया गया। पर्यटन क्विज के साथ इन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को प्रदेश की विरासत और भारतीय परंपराओं से जोड़ने का अवसर दिया।
उत्तराखंड में धान-गेहूं खरीद के लिए 1100 करोड़ रुपये, किसानों को पेंशन और पहाड़ों में खेती के लिए भी बजट
देहरादून। उत्तराखंड की धामी सरकार ने किसानों से धान और गेहूं की खरीद के लिए 1,100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। वित्त वर्ष 2026-27 के अनुपूरक बजट में अन्नपूर्ति योजना के तहत यह राशि प्रस्तावित की गई है। इसके साथ ही पहाड़ी इलाकों में खेती, कृषि उत्पादों से छोटे कारोबार, किसान पेंशन, मछली पालन और मधुमक्खी पालन के लिए भी बजट रखा गया है। सरकार का उद्देश्य फसलों की खरीद की व्यवस्था को मजबूत करने के साथ किसानों के लिए कमाई के दूसरे रास्ते तैयार करना है।
उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में खेती की परिस्थितियां मैदानी क्षेत्रों से अलग हैं। कई स्थानों पर किसान सिंचाई के बजाय बारिश पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में सरकार ने अनुपूरक बजट में मौसम के बदलाव के अनुसार खेती की व्यवस्था बेहतर बनाने वाली परियोजनाओं को भी शामिल किया है।
बारिश पर निर्भर खेती के लिए 70 करोड़ रुपये
उत्तराखंड जलवायु अनुकूल बारानी कृषि परियोजना के लिए 70 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं। जायका के सहयोग से जुड़ी इस परियोजना का उद्देश्य उन क्षेत्रों में खेती को बेहतर बनाना है, जहां सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं हैं और फसलें मुख्य रूप से बारिश के पानी पर निर्भर रहती हैं।
इस परियोजना के जरिए मौसम की बदलती परिस्थितियों के अनुसार कृषि गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। पहाड़ी इलाकों में खेती को लंबे समय तक बनाए रखने और किसानों की आजीविका को मजबूत करने के लिहाज से इस योजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
किसानों को फसल बेचने के साथ कारोबार का भी मिलेगा अवसर
कृषि उत्पादों के बेहतर इस्तेमाल और उनसे जुड़े छोटे कारोबार को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) के तहत लगभग 35 करोड़ रुपये रखे गए हैं।
इस योजना का संबंध कृषि उपज से खाद्य उत्पाद तैयार करने वाले छोटे उद्यमों से है। इसके जरिए किसानों और ग्रामीण उद्यमियों को केवल कच्ची फसल बेचने तक सीमित रहने के बजाय उससे तैयार उत्पादों के कारोबार की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है।
वहीं, सहकारिता के जरिए किसानों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना में 20 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। किसान पेंशन योजना के लिए भी 9 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं।
ट्राउट मछली पालन के लिए 28 करोड़, मधुमक्खी पालन को भी बढ़ावा
खेती के अलावा पहाड़ी क्षेत्रों में आय के दूसरे साधन विकसित करने पर भी ध्यान दिया गया है। अनुपूरक बजट में ट्राउट प्रोत्साहन योजना के लिए लगभग 28 करोड़ रुपये रखे गए हैं। ट्राउट मछली पालन पहाड़ी क्षेत्रों में आजीविका का एक विकल्प है और इस प्रावधान से इससे जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजना है।
इसके साथ ही नई मौन पालन नीति के लिए एक करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं। मौन पालन यानी मधुमक्खी पालन के जरिए शहद उत्पादन और उससे जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में खेती के साथ मधुमक्खी पालन किसानों के लिए अतिरिक्त कमाई का साधन बन सकता है।
पशुओं के संरक्षण से जुड़ी व्यवस्था के लिए भी बजट में राशि रखी गई है। गौ सदनों के निर्माण के लिए लगभग 9 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
फसल खरीद से लेकर छोटे उद्यमों तक सरकार का फोकस
अनुपूरक बजट में कृषि क्षेत्र के लिए रखी गई राशि को दो प्रमुख जरूरतों से जोड़ा गया है। पहली, किसानों से धान और गेहूं की खरीद के लिए वित्तीय व्यवस्था उपलब्ध कराना और दूसरी, खेती के साथ दूसरे रोजगार और कारोबार के अवसर बढ़ाना।
इसी वजह से फसल खरीद के बड़े प्रावधान के साथ खाद्य प्रसंस्करण, सहकारिता, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन जैसी योजनाओं को भी जगह दी गई है। प्रस्तावित राशि को विधानसभा की मंजूरी मिलने के बाद संबंधित योजनाओं के लिए उपलब्ध कराया जा सकेगा।
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