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Toll Tax Relief: 1 नवंबर से नया लोकल टोल पास, ₹1,500 में सालभर की राहत; जानें कौन उठा सकेगा फायदा

Toll Tax Relief: सड़क पर रोज आना-जाना करने वाले स्थानीय लोगों के लिए केंद्र सरकार की तरफ से एक बहुत बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है. नेशनल हाईवे पर बने टोल नाकों से बार-बार गुजरने वाले आसपास के बाशिंदों की जेब पर अब भारी बोझ नहीं पड़ेगा. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने स्थानीय निवासियों के लिए एक नया सालाना टोल पास पेश करने का निर्णय लिया है. इस योजना के लागू होने के बाद हाईवे के पास रहने वाले लोगों को हर फेरे पर पूरा पैसा चुकाने की मजबूरी से छुटकारा मिल जाएगा. सरकार का यह कदम रोजमर्रा के सफर को बेहद सुगम और काफी किफायती बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है.

नए नियमों के दायरे में आने वाली छूट

सरकार ने नेशनल हाईवे फीस निर्धारण और वसूली से जुड़े पांचवें संशोधन नियम को मंजूरी देकर इस व्यवस्था को औपचारिक रूप दे दिया है. इस नई व्यवस्था के तहत टोल प्लाजा के बीस किलोमीटर के दायरे में निवास करने वाले लोगों को साल भर के लिए रियायती दर पर पास जारी किया जाएगा. सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने भी इस पहल की पुष्टि करते हुए साफ किया है कि यह कदम आम नागरिकों के रोजमर्रा के जीवन को सहज बनाने के लिए उठाया गया है. इसके अंतर्गत आने वाले लोग एक तय मुश्त रकम देकर पूरे बारह महीने बिना अतिरिक्त टोल दिए हाईवे से आवागमन कर सकेंगे.

पास की कीमत और जगह का गणित

इस सालाना पास की दरें टोल प्लाजा की भौगोलिक स्थिति पर निर्भर करेंगी. सरकार ने इसे दो अलग-अलग वर्गों में बांटा है. यदि कोई टोल प्लाजा नगरपालिका या स्थानीय कस्बे की सीमा से बाहर स्थित है, तो वहां के आसपास रहने वाले पात्र लोगों को सालाना पास के लिए पंद्रह सौ रुपये का भुगतान करना होगा. वहीं अगर कोई टोल प्लाजा नगरपालिका या शहरी निकाय की सीमा के भीतर आता है, तो वहां के लिए इस वार्षिक पास की दर तीन हजार रुपये तय की गई है. दोनों ही स्थितियों में यह रकम पूरे साल के लिए होगी, जिससे रोज आने-जाने वाले परिवारों की बचत में भारी इजाफा देखने को मिलेगा.

किन्हें मिलेगा इस सुविधा का फायदा

इस योजना का लाभ उठाने के लिए सरकार ने कुछ बेहद अहम नियम तय किए हैं ताकि व्यवस्था पारदर्शी बनी रहे. यह पास केवल गैर-व्यावसायिक यानी निजी गाड़ियों के लिए ही मान्य होगा. व्यावसायिक श्रेणी में चलने वाली गाड़ियों, टैक्सियों या माल ढोने वाले वाहनों को इस योजना से पूरी तरह अलग रखा गया है. इसके साथ ही गाड़ी पर सही तरीके से एक्टिव और वैध फास्टैग लगा होना अनिवार्य होगा. वाहन मालिक के पते और पहचान के प्रमाण की जांच के बाद ही गाड़ी के फास्टैग को इस सालाना पास प्रणाली से जोड़ा जाएगा, जिससे प्लाजा पर बिना रुके बैरियर अपने आप खुल सकेगा.

एक ही प्लाजा पर काम करेगा यह कार्ड

वाहन चालकों को यह बात अच्छी तरह समझनी होगी कि यह पास कोई ऑल इंडिया पास नहीं है. यह सुविधा केवल उसी एक तयशुदा टोल प्लाजा के लिए मान्य रहेगी, जिसके बीस किलोमीटर के दायरे में आवेदक का निवास स्थान मौजूद है. आप इस पास के जरिए किसी अन्य प्लाजा या हाईवे पर मुफ्त सफर नहीं कर पाएंगे. इसके अलावा यह सुविधा ऐसे आधुनिक एक्सप्रेसवे या हाईवे पर भी लागू नहीं होगी, जहां क्लोज्ड यूजर फीस कलेक्शन सिस्टम काम करता है. क्लोज्ड सिस्टम में गाड़ियां चढ़ने और उतरने की दूरी के हिसाब से पैसा चुकाती हैं, इसलिए वहां यह नियम प्रभावी नहीं रहेगा.

इन रास्तों पर नहीं मिलेगी कोई छूट

मंत्रालय ने यह भी साफ किया है कि अगर किसी टोल प्लाजा के आसपास सर्विस रोड मौजूद है या स्थानीय आवाजाही के लिए कोई वैकल्पिक रास्ता पहले से उपलब्ध है, तो वहां भी यह रियायती पास लागू नहीं किया जाएगा. इसका सीधा मतलब यह निकलता है कि बीस किलोमीटर के दायरे में रहने मात्र से हर किसी को यह पास खुद-ब-खुद नहीं मिल जाएगा. जिन इलाकों में लोगों के पास टोल से बचने का कोई दूसरा जमीनी रास्ता नहीं है, उन्हीं जगहों पर सरकार स्थानीय निवासियों को यह बड़ी राहत प्रदान करने जा रही है.

लागू होने की तारीख और आगे की तैयारी

यह पूरी योजना एक नवंबर से देश भर में प्रभावी तरीके से जमीन पर उतार दी जाएगी. राजमार्ग प्राधिकरण और संबंधित एजेंसियां टोल सॉफ्टवेयर को नए नियमों के अनुरूप ढालने में जुट गई हैं. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जरूरत पड़ने पर हर साल पहली अप्रैल को इन पास की दरों की समीक्षा की जा सकती है. फिलहाल स्थानीय लोगों के लिए यह खबर किसी बड़े वरदान से कम नहीं है, क्योंकि हर महीने हजारों रुपये टोल में गंवाने वाले परिवारों को अब नाममात्र के सालाना खर्च पर बेरोकटोक आने-जाने का अधिकार मिल जाएगा.

यह भी पढ़ें: देश में फरवरी से राजमार्गों पर शुरू हो जाएंगे बैरियर-फ्री टोल : नितिन गडकरी

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