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तेलंगाना पुलिस ने एआई-सक्षम आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली शुरू की

हैदराबाद, 5 अगस्त (आईएएनएस)। तेलंगाना पुलिस ने तेलंगाना आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (टीजी-ईआरएसएस) - डायल 112 का शुभारंभ किया है। यह अत्याधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से लैस एक एकीकृत मंच है, जिसे राज्य भर के नागरिकों को त्वरित, स्मार्ट और अधिक समन्वित आपातकालीन सहायता प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है।

उन्नत मंच पुलिस, अग्निशमन सेवाएं, एम्बुलेंस सेवाएं, महिला सुरक्षा, बाल संरक्षण, आपदा प्रतिक्रिया और अन्य आपातकालीन सेवाओं को एकल राष्ट्रीय आपातकालीन नंबर 112 के माध्यम से एकीकृत करता है, जिससे नागरिकों को आपातकालीन सहायता के लिए एक एकीकृत गेटवे मिलता है।

इस प्रणाली का उद्घाटन पुलिस महानिदेशक सीवी आनंद ने हैदराबाद स्थित तेलंगाना एकीकृत कमान और नियंत्रण केंद्र (टीजीआईसीसीसी) में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, सरकारी अधिकारियों और सहयोगी एजेंसियों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में किया।

डीजीपी ने कहा कि अगली पीढ़ी के डायल 112 प्लेटफॉर्म का शुभारंभ तेलंगाना की प्रौद्योगिकी-आधारित पुलिसिंग और नागरिक-केंद्रित आपातकालीन प्रतिक्रिया की दिशा में निरंतर प्रगति में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उन्होंने पाया कि आपात स्थितियों के दौरान नागरिकों के लिए डायल 112 संपर्क का पहला बिंदु है और प्रत्येक कॉल को जिस दक्षता, गति और व्यावसायिकता के साथ संभाला जाता है, वह पुलिस और अन्य आपातकालीन सेवाओं में जनता के विश्वास को सीधे प्रभावित करता है।

उन्नत तकनीकों से संचालित इस प्रणाली में डुप्लिकेट और गैर-आपातकालीन कॉलों की बुद्धिमत्तापूर्ण फिल्टरिंग, गंभीरता और तात्कालिकता के अनुसार घटनाओं का एआई-आधारित प्राथमिकता निर्धारण, स्मार्ट कॉल रूटिंग, एआई-सहायता प्राप्त फील्ड संसाधनों का प्रेषण, आपातकालीन वार्तालापों का ध्वनि-से-पाठ प्रतिलेखन, स्थान-आधारित सेवाओं, उन्नत स्थान सेवाओं और गूगल मैप्स के माध्यम से उन्नत कॉलर-स्थान पहचान, रियल टाइम परिचालन डैशबोर्ड और प्रदर्शन विश्लेषण, कॉल लेने वालों और डिस्पैचरों के लिए एक एकीकृत एकल-विंडो इंटरफेस और ड्रोन तथा अन्य उभरती आपातकालीन प्रतिक्रिया तकनीकों के साथ एकीकरण शामिल हैं।

डीजीपी ने बताया कि उन्नत प्रणाली से कॉल हैंडलिंग दक्षता में पहले ही उल्लेखनीय सुधार हुआ है। कॉल लेने वालों द्वारा लिया जाने वाला औसत समय 100 सेकंड से घटकर 69 सेकंड हो गया है, जबकि डिस्पैचर का समय 90 सेकंड से घटकर 64 सेकंड हो गया है। परिणामस्वरूप, कुल कॉल सेंटर प्रोसेसिंग समय 190 सेकंड से घटकर 133 सेकंड हो गया है, जो लगभग 30 प्रतिशत का सुधार दर्शाता है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रसंस्करण और प्रेषण चरणों के दौरान बचाया गया हर सेकंड जीवन बचाने, स्थिति को बिगड़ने से रोकने और संकट में फंसे लोगों को समय पर सहायता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

तेलंगाना में वर्तमान में शहरी क्षेत्रों में आपातकालीन प्रतिक्रिया का औसत समय लगभग छह मिनट, ग्रामीण क्षेत्रों में 15 मिनट और राज्य का औसत 10 मिनट 30 सेकंड है। डीजीपी के अनुसार, यह राष्ट्रीय औसत लगभग 18 मिनट से काफी बेहतर है और तेलंगाना को आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रदर्शन में अग्रणी राज्यों में शामिल करता है।

--आईएएनएस

एमएस/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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भारतीय रेलवे ने जुलाई तक वित्त वर्ष 2027 के पूंजीगत व्यय का 39 प्रतिशत खर्च किया: सरकार

नई दिल्ली, 5 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय रेलवे ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए निर्धारित पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) बजट का करीब 39 प्रतिशत हिस्सा जुलाई तक खर्च कर लिया है। इस दौरान रेलवे ने स्वदेशी ट्रेन टक्कर रोधी प्रणाली कवच के विस्तार और ट्रेनों की गति बढ़ाने के लिए रेल पटरियों के आधुनिकीकरण पर भी तेजी से काम किया है। यह जानकारी सरकार ने बुधवार को संसद में दी।

लोकसभा में एक लिखित जवाब में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि चालू वित्त वर्ष के लिए रेलवे को 2,93,030 करोड़ रुपए का बजटीय आवंटन मिला है, जिसमें से जुलाई तक 1,14,973 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं।

रेल मंत्री ने कहा कि रेलवे में सुरक्षा से जुड़े कार्यों पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ा है। वर्ष 2013-14 में जहां सुरक्षा मद पर 39,200 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे, वहीं 2026-27 में यह बढ़कर 1,20,389 करोड़ रुपए हो गया है।

स्वदेशी ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (एटीपी) सिस्टम कवच के बारे में जानकारी देते हुए वैष्णव ने बताया कि 31 जुलाई 2026 तक कवच के संस्करण 4.0 को 2,633 रूट किलोमीटर पर चालू किया जा चुका है। इसमें दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा जैसे उच्च घनत्व वाले प्रमुख रेल कॉरिडोर शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि कवच 4.0 में लोकेशन की अधिक सटीक पहचान, बड़े यार्डों में बेहतर सिग्नल सूचना, ऑप्टिकल फाइबर आधारित स्टेशन-टू-स्टेशन इंटरफेस और इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम के साथ सीधा एकीकरण जैसी आधुनिक सुविधाएं जोड़ी गई हैं। इससे पूरे रेलवे नेटवर्क में इस प्रणाली का बड़े पैमाने पर विस्तार आसान होगा।

रेल मंत्री के अनुसार, ट्रैक किनारे कवच प्रणाली का कार्य 21,794 रूट किलोमीटर पर शुरू किया गया है, जिसमें गोल्डन क्वाड्रिलेटरल, गोल्डन डायगोनल, हाई-डेंसिटी नेटवर्क और अन्य चिन्हित रेलखंड शामिल हैं। वहीं, अब तक 6,290 लोकोमोटिव में कवच प्रणाली स्थापित की जा चुकी है।

इसके अलावा, 7,190 और लोकोमोटिव तथा 1,200 ईएमयू और मेमू रेक को भी कवच प्रणाली से लैस करने का काम जारी है।

वैष्णव ने बताया कि जून 2026 तक कवच परियोजना पर 3,875 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं, जबकि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इस परियोजना हेतु 2,066 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

रेल मंत्री ने कहा कि भारतीय रेलवे ने अधिक गति वाली ट्रेनों के संचालन के लिए अपने नेटवर्क को भी व्यापक रूप से उन्नत किया है। वर्ष 2014 में केवल 5,036 किलोमीटर रेल मार्ग ऐसे थे, जहां 130 किलोमीटर प्रति घंटा या उससे अधिक गति की ट्रेनें चल सकती थीं। 2026 में यह आंकड़ा बढ़कर 24,173 किलोमीटर हो गया है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में रेलवे नेटवर्क का लगभग 81 प्रतिशत हिस्सा 110 किलोमीटर प्रति घंटा या उससे अधिक गति की ट्रेनों के संचालन में सक्षम है, जबकि 2014 में यह आंकड़ा लगभग 40 प्रतिशत था।

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि मिशन रफ्तार के तहत गोल्डन क्वाड्रिलेटरल के नई दिल्ली-मुंबई और नई दिल्ली-हावड़ा कॉरिडोर को 160 किलोमीटर प्रति घंटा तक की रफ्तार से ट्रेन संचालन के लिए अपग्रेड किया जा रहा है।

बुनियादी ढांचे के विकास पर जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 से 2026 के बीच भारतीय रेलवे ने 36,429 किलोमीटर नई रेल लाइनों का निर्माण किया है। यह औसतन 8.32 किलोमीटर प्रतिदिन की रफ्तार है, जो 2009-14 के दौरान दर्ज 4.2 किलोमीटर प्रतिदिन की तुलना में लगभग दोगुनी है।

उन्होंने कहा कि 1 अप्रैल 2026 तक रेलवे की कुल 514 आधारभूत संरचना परियोजनाएं कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं। इनमें 169 नई लाइनें, 29 गेज परिवर्तन परियोजनाएं और 316 दोहरीकरण परियोजनाएं शामिल हैं। ये परियोजनाएं करीब 40,000 किलोमीटर रेल मार्ग को कवर करती हैं और इनकी अनुमानित लागत लगभग 8.31 लाख करोड़ रुपए है।

रेल मंत्री के अनुसार, इन परियोजनाओं में से अब तक 12,583 किलोमीटर रेल मार्ग का काम पूरा किया जा चुका है, जिस पर 3.05 लाख करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं।

इसके अलावा, उन्होंने बताया कि भारतीय रेलवे अपने विभिन्न प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से हर साल लगभग 6 लाख कर्मचारियों को प्रशिक्षण देता है। कौशल विकास और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के तहत डिजिटल तकनीक, लॉजिस्टिक्स और आधुनिक माल परिवहन संचालन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

--आईएएनएस

डीबीपी

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