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Bombay High Court ने Pune छात्रा पर FIR की रद्द, ऑपरेशन सिंदूर रीपोस्ट का था मामला

बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार को पुणे के एक इंजीनियरिंग छात्रा के खिलाफ दर्ज FIR को खारिज कर दिया। छात्रा पर 'ऑपरेशन सिंदूर' से जुड़ी एक विवादित सोशल मीडिया पोस्ट को दोबारा शेयर करने का आरोप था। कोर्ट ने कहा कि युवावस्था में हुई गलती को अपने आप जानबूझकर किया गया आपराधिक कृत्य नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी पोस्ट को आपत्तिजनक मान लेना ही, किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हो सकता। न्यायमूर्ति मिलिंद एन. जाधव ने खदीजा शहाबुद्दीन शेख की याचिका को स्वीकार कर लिया। उन्होंने कहा कि अभियोजन पक्ष ऐसे पर्याप्त सबूत पेश करने में विफल रहा, जिनसे इन अपराधों के लिए जरूरी 'आपराधिक इरादा' साबित हो सके। अदालत ने कहा कि ऐसी सामग्री जो आपत्तिजनक हो सकती है, और ऐसा आचरण जो आपराधिक अपराध की श्रेणी में आता है। इन दोनों के बीच के अंतर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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शेख की ओर से पेश वकील फरहाना शाह ने दलील दी कि उनकी मुवक्किल उस पोस्ट की मूल लेखिका नहीं थीं; उन्होंने केवल उस सामग्री को रीपोस्ट किया था जो पहले से ही सोशल मीडिया पर मौजूद थी। उन्होंने बताया कि शेख ने 7 मई, 2025 को दो घंटे के भीतर ही स्वेच्छा से उस पोस्ट को हटा दिया था, साथ ही सार्वजनिक रूप से खेद जताया और माफी भी मांगी। इसके बावजूद, 9 मई 2025 को शेख के खिलाफ FIR दर्ज की गई और उसी दिन उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। शाह ने आगे दलील दी कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जो जरूरी आपराधिक इरादे या जानकारी को साबित करता हो, और इस पोस्ट की वजह से कोई वास्तविक सांप्रदायिक अशांति भी नहीं हुई। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि शेख इंजीनियरिंग की एक युवा छात्रा हैं, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ मुकदमा जारी रखने से उनके करियर और भविष्य की संभावनाओं पर बुरा असर पड़ेगा।

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राज्य ने याचिका का विरोध करते हुए तर्क दिया कि आपत्तिजनक सामग्री को दोबारा पोस्ट करने पर आपराधिक दायित्व भी बन सकता है। उन्होंने आगे कहा कि पोस्ट को हटा देने और माफी मांग लेने से ही ऐसा दायित्व अपने आप खत्म नहीं हो जाता। अदालत ने गौर किया कि इसके परिणामस्वरूप कोई गैर-कानूनी घटना सामने नहीं आई है। अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि आपराधिक कार्यवाही का उद्देश्य सजा देने के बजाय सुधार लाने वाला होना चाहिए, खासकर युवा छात्रों के मामले में। इसके बाद अदालत ने कोंढवा पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR को रद्द कर दिया।

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जोधपुर में 21 लाख ऑनलाइन फॉलोअर वाले यूट्यूबर Omprakash Bishnoi सरपंच चुनाव हारे, मिले सिर्फ 33 वोट

सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में फॉलोअर होना चुनाव जीतने की गारंटी नहीं है। इसका उदाहरण जोधपुर जिले की ओसियां तहसील में सरपंच पद के चुनाव के नतीजे में देखने को मिला, जहां ज्योतिषी और चेहरा पढ़ने का दावा करने वाले लोकप्रिय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर एवं यूट्यूबर ओमप्रकाश बिश्नोई को डिजिटल मंचों पर 21 लाख से अधिक फॉलोअर होने के बावजूद करारी हार का सामना करना पड़ा। बिश्नोई ने इंदों की ढाणी-द्वितीय ग्राम पंचायत में सरपंच पद का चुनाव लड़ा था।

करीब 1,600 मतदाताओं वाले इस गांव में उन्हें महज 33 वोट मिले। ऑनलाइन लोकप्रियता और कड़े चुनावी मुकाबले की उम्मीदों के बीच उनकी हार को अप्रत्याशित माना जा रहा है। सोशल मीडिया मंच इंस्टाग्राम पर बिश्नोई के 14 लाख से अधिक फॉलोअर, फेसबुक पर दो लाख से ज्यादा फॉलोअर और यूट्यूब पर करीब 5.5 लाख सब्सक्राइबर हैं।

वह ज्योतिषी के साथ-साथ एक गोशाला के अध्यक्ष भी हैं। उनकी चुनावी हार सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। कई लोगों ने इस ओर ध्यान दिलाया कि भविष्य बताने और चेहरा पढ़ने का दावा करने वाले बिश्नोई अपने ही चुनावी भविष्य का अनुमान नहीं लगा सके।

स्थानीय चुनावों में सोशल मीडिया पर पसंद और टिप्पणियों के मुकाबले व्यक्तिगत संपर्क, गांव के मामलों में भागीदारी और लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं से जुड़ाव अधिक मायने रखता है। बिश्नोई का अनुभव ऑनलाइन लोकप्रियता और जमीनी स्तर पर स्वीकार्यता के बीच अंतर को रेखांकित करता है। इससे यह बहस भी शुरू हो गई है कि क्या डिजिटल मंचों पर लोकप्रियता को वास्तव में वोटों में बदला जा सकता है।

नतीजे घोषित होने के बाद बिश्नोई ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट कर अपने पैतृक गांव के मतदाताओं का आभार जताया और उनके फैसले को स्वीकार किया। उन्होंने लिखा, “मेरी जन्मभूमि इंदों की ढाणी द्वितीय ग्राम पंचायत के सभी मतदाताओं का भरपूर समर्थन देने के लिए दिल से धन्यवाद। मेरे गांव के करीब 1,600 लोगों में से मेरे अपने परिवार के केवल 33 सदस्यों ने मेरे पक्ष में मतदान किया।

उन्होंने कहा, “मैंने अपने गांव से सरपंच पद का चुनाव लड़ा। मेरा चुनाव कार्यालय पूरी तरह नशामुक्त रहा, यह भी मेरे लिए संतोष की बात है। हर कोई आपके साथ खड़े होने का दावा करता है, लेकिन ऐसे समय में ही पता चलता है कि कौन वास्तव में दिल से आपका समर्थन करता है।

भगवान द्वारकाधीश आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी करें।” हार पर उनकी संयमित प्रतिक्रिया और नशामुक्त चुनाव अभियान पर जोर देने की सोशल मीडिया पर सराहना हुई है। हालांकि, नतीजे ने चुनावी राजनीति में उतरने वाली डिजिटल मंचों पर लोकप्रिय हस्तियों के सामने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या ऑनलाइन लाखों फॉलोअर जमीनी स्तर पर मतदाताओं के भरोसे की जगह ले सकते हैं।

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  Sports

17 ओवर में ही वनडे मैच जीती टीम इंडिया, वनडे सीरीज में भी क्लीन स्वीप

वैष्णवी शर्मा के बाद शेफाली वर्मा और प्रतिका रावल के तूफानी अर्धशतकों के दम पर भारत ने 17 ओवर में मैच जीत लिया. टीम इंडिया ने टी20 के बाद वनडे सीरीज में भी क्लीन स्वीप किया. Wed, 28 Oct 2026 18:51:37 +0530

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