एक अहम घटनाक्रम में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शुक्रवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर रोक लगाकर उन्हें बड़ी राहत दी। कोर्ट के आदेश में मामले में अगली सुनवाई तक ज़बरदस्ती कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा दी गई है। राहत की मांग वाली याचिका चल रही कानूनी कार्रवाई के बीच दायर की गई थी, और बेंच ने अधिकारियों को शंकराचार्य के खिलाफ तुरंत कोई कार्रवाई न करने का निर्देश दिया।
इलाहाबाद हाई कोर्ट में शुक्रवार को दोपहर करीब 3.45 बजे संत की एंटीसिपेटरी बेल अर्जी पर सुनवाई हो सकती है। उनके शिष्य संजय पांडे ने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने रोज़ाना के धार्मिक काम जारी रखे और हमेशा की तरह अपनी रोज़ की पूजा-पाठ की। मठ में बड़ी संख्या में मीडियाकर्मी मौजूद थे। अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि उनके वकील कोर्ट में मौजूद थे और कोर्ट के सामने सारे सबूत पेश करेंगे। उन्होंने कहा कि झूठ ज़्यादा दिन नहीं चलता। जिन्होंने झूठी कहानी बनाई है, वे बेनकाब हो रहे हैं। जैसे-जैसे लोगों को इस मनगढ़ंत मामले के बारे में पता चलेगा, सच्चाई सामने आ जाएगी।
मेडिकल जांच रिपोर्ट से जुड़े दावों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि एक मेडिकल रिपोर्ट हमारी संलिप्तता कैसे साबित कर सकती है? कहा जा रहा है कि रिपोर्ट में गलत काम साबित हुआ है। यह किसी का बयान हो सकता है, लेकिन इतने दिनों बाद की गई मेडिकल रिपोर्ट का क्या मतलब है?" उन्होंने कहा कि अगर कोई गलत काम हुआ भी होता, तो इससे अपने आप यह साबित नहीं होता कि कौन ज़िम्मेदार था। उन्होंने कहा, "जो बच्चा कभी हमारे पास नहीं आया, उसे आसानी से हमारे नाम से नहीं जोड़ा जा सकता।
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संयुक्त राष्ट्र के मंच पर एक बार फिर पाकिस्तान की पोल खुल गई, जब उसने जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाकर भारत पर आरोप लगाने की कोशिश की। लेकिन इस बार भारत ने तथ्यों के ऐसे तीर चलाए कि इस्लामाबाद की बयानबाजी हवा हो गई। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 61वें नियमित सत्र के उच्च स्तरीय खंड में भारत की ओर से प्रथम सचिव अनुपमा सिंह ने जिस स्पष्टता और दृढ़ता से जवाब दिया, उसने पाकिस्तान को आईना दिखा दिया।
भारत ने साफ कहा कि पाकिस्तान एक “खयाली दुनिया” में जी रहा है। जिस देश की अर्थव्यवस्था अंतरराष्ट्रीय कर्ज के सहारे चल रही हो, वह लोकतंत्र और मानवाधिकारों पर भाषण दे, यह अपने आप में विडंबना है। सच्चाई यह है कि पाकिस्तान ने आईएमएफ से जिस राहत पैकेज की गुहार लगाई, जम्मू-कश्मीर का विकास बजट उससे दोगुना से भी अधिक है। यह तुलना अपने आप में बताती है कि कौन आगे बढ़ रहा है और कौन कर्ज के दलदल में धंसा हुआ है।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को यह स्वीकार करना कठिन लग रहा है कि जम्मू और कश्मीर में लोकतंत्र मजबूत हो रहा है। हालिया लोकसभा और विधानसभा चुनावों में रिकॉर्ड मतदान इस बात का प्रमाण है कि वहां की जनता ने आतंकवाद और अलगाववाद की विचारधारा को नकार दिया है। यह वही विचारधारा है जिसे दशकों तक पाकिस्तान ने खुला या छिपा समर्थन दिया। लेकिन अब घाटी के लोग विकास, रोजगार और स्थिरता चाहते हैं और भारत सरकार उसी दिशा में काम कर रही है।
उन्होंने इस्लामी सहयोग संगठन (ओआईसी) का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘उच्च स्तरीय खंड के दौरान पाकिस्तान और ओआईसी द्वारा भारत के संदर्भ में की गई टिप्पणियों के बाद भारत अपना जवाब देने का अधिकार इस्तेमाल करने के लिए बाध्य है। हम इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हैं।’’ उन्होंने साफ कहा कि ऐसे देश से लोकतंत्र पर उपदेश सुनना अटपटा है जहां असैन्य सरकारें शायद ही कभी अपना कार्यकाल पूरा करती हैं। उन्होंने कहा, ‘‘जम्मू-कश्मीर में दुनिया के जिस सबसे बड़े पुल, चिनाब रेल पुल का पिछले साल उद्घाटन किया गया था, यदि वह फर्जी है तो फिर पाकिस्तान भ्रम या खयाली दुनिया में जी रहा है।’’
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के दुष्प्रचार को ‘‘तोते की तरह दोहराकर’’ ओआईसी केवल यह दर्शाता है कि उसने खुद को एक सदस्य द्वारा कितनी गहराई से प्रभावित होने दिया है। अनुपमा सिंह ने कहा, ‘‘पाकिस्तान का निरंतर दुष्प्रचार अब ईर्ष्या से भरा हुआ प्रतीत होता है। हम ऐसे दुष्प्रचार को महत्व नहीं देना चाहते लेकिन हम कुछ बिंदु रखेंगे और तथ्यों के आधार पर इसका खंडन करेंगे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘पाकिस्तान की कोई भी मनगढ़ंत बयानबाजी या दुस्साहसी दुष्प्रचार इस अटल तथ्य को बदल नहीं सकता कि जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय पूरी तरह कानूनी और अपरिवर्तनीय है तथा यह भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम (1947) एवं अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘दरअसल, इस क्षेत्र के संबंध में एकमात्र लंबित विवाद पाकिस्तान द्वारा भारतीय क्षेत्रों पर अवैध कब्जा है। हम पाकिस्तान से इन क्षेत्रों को खाली करने का आह्वान करते हैं, जिस पर उसने जबरन कब्जा कर रखा है।’’
बहरहाल, इस्लामी सहयोग संगठन पाकिस्तान के सुर में सुर मिलाते हुए चाहे जो भी कहे लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब इन घिसी-पिटी दलीलों से प्रभावित नहीं होता। पाकिस्तान को समझ लेना चाहिए कि वैश्विक मंचों पर खोखली बयानबाजी से उसकी आंतरिक आर्थिक और राजनीतिक समस्याएं हल नहीं होंगी। बेहतर होगा कि वह अपनी ऊर्जा आतंकवाद के निर्यात की बजाय अपने नागरिकों के भविष्य को सुधारने में लगाए। भारत आज आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है, जबकि पाकिस्तान को पहले अपनी जमीन पर हकीकत का सामना करना होगा। यही सच्चाई है और यही उसकी असली औकात भी।
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