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Utrakhand Protest | Congress | UKD-Congress कार्यकर्ताओं का जोरदार प्रदर्शन

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SIR पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: EC ने खारिज किए अकेले फैसले लेने के आरोप, हलफनामे में दी सफाई

Supreme Court hearing on SIR: चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले में मंगलवार को सुनवाई हुई। इस मामले में राहुल गांधी, असदुद्दीन ओवैसी और अन्य विपक्षी नेताओं की ओर से याचिकाएं दाखिल की गई हैं। याचिकाओं में चुनाव आयोग के कामकाज, फैसले लेने के तरीके और SIR के दौरान कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने पूरे मामले की जांच किए जाने की मांग की है।

सुनवाई से पहले चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अपना हलफनामा दाखिल किया था। आयोग ने इसमें उन आरोपों को खारिज किया है, जिनमें कहा गया था कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने दूसरे निर्वाचन आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद SIR से जुड़े फैसले अकेले लिए। आयोग का कहना है कि इस प्रक्रिया में सभी निर्वाचन आयुक्तों की राय पर विचार किया जाता है और संबंधित फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

 फैसले लेने की प्रक्रिया पर आयोग की सफाई 

चुनाव आयोग ने अपने जवाब में बताया कि फैसले लेने के लिए फाइल पहले संबंधित अधिकारियों और निर्वाचन आयुक्तों के पास जाती है। इसके बाद फाइल मुख्य निर्वाचन आयुक्त के सामने रखी जाती है। आयोग के मुताबिक, फैसले किसी एक व्यक्ति की मर्जी से नहीं लिए जाते, बल्कि तय प्रक्रिया के तहत विचार-विमर्श किया जाता है।

आयोग ने कैबिनेट सचिव को लिखे गए पत्रों के आधार पर लगाए गए आरोपों को भी गलतफहमी बताया। हलफनामे में 28 जुलाई के आंतरिक कार्य-विभाजन आदेश का जिक्र करते हुए कहा गया कि वह लागू नहीं हुआ था। आयोग का पक्ष है कि SIR से जुड़े फैसलों को लेकर जिस तरह सवाल उठाए जा रहे हैं, वे वास्तविक प्रक्रिया को सही तरीके से नहीं दिखाते।

 फॉर्म-6 में बदलाव के आरोप भी खारिज 

मामले में मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 को लेकर भी विवाद है। याचिकाकर्ताओं की ओर से आरोप लगाया गया है कि ऑनलाइन फॉर्म-6 में बदलाव किए गए और चुनाव आयोग ने इस संबंध में ऐसा प्रेस नोट जारी किया, जिससे लगा कि सुप्रीम कोर्ट ने इन बदलावों की अनुमति दी है।

चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि फॉर्म-6 में बदलाव करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। हलफनामे के अनुसार, 21 अक्टूबर से ऑनलाइन पोर्टल पर फॉर्म-6 और घोषणा-पत्र को अलग-अलग दिखाने की व्यवस्था शुरू की गई। आयोग ने कहा कि घोषणा-पत्र में किए गए बदलावों का उद्देश्य मतदाताओं की पुरानी जानकारी को जोड़ने की प्रक्रिया को आसान बनाना है।

आयोग के मुताबिक, इस व्यवस्था के तहत वर्ष 2002-03 की पुरानी मतदाता सूची से मैपिंग करने में सुविधा मिलेगी। इससे लोगों को अतिरिक्त दस्तावेज देने की जरूरत भी कम हो सकती है। हालांकि, फॉर्म-6 को लेकर याचिकाकर्ताओं की आपत्तियां सुनवाई का अहम हिस्सा बनी हुई हैं।

मेनका गुरुस्वामी ने उठाया फॉर्म-6 का मुद्दा 

सुनवाई के दौरान सांसद डोला सेन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मामला केवल SIR तक सीमित नहीं है, बल्कि आयोग के कामकाज और ऑनलाइन फॉर्म-6 में कथित बदलावों से भी जुड़ा है। उन्होंने आयोग की ओर से जारी प्रेस नोट का भी जिक्र किया।

गुरुस्वामी ने अदालत से मामले में नोटिस जारी करने की मांग की। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अदालत आरोपों की जांच करेगी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले में नोटिस जारी किया। सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह की भाषा और आरोपों को किसी अन्य उद्देश्य से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

 जवाब दाखिल करने के लिए मांगा समय 

चुनाव आयोग का हलफनामा मिलने के बाद याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने अदालत से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। उन्होंने बताया कि आयोग का हलफनामा उन्हें एक दिन पहले ही मिला है। ऐसे में उसका अध्ययन करने और अपना पक्ष रखने के लिए सात से दस दिन का समय दिया जाना चाहिए।

इस पर अदालत में जवाब दाखिल करने के लिए समय देने को लेकर चर्चा हुई। मुख्य न्यायाधीश ने जवाब दाखिल करने की बात कही और समय को लेकर भी सवाल किया। अब याचिकाकर्ताओं को आयोग के जवाब पर अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।

पश्चिम बंगाल की अपीलों का भी जिक्र 

चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में पश्चिम बंगाल का मामला भी उठाया। आयोग के अनुसार, SIR के बाद मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने से जुड़े मामलों में 16.10 लाख अपीलें राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अधिकारियों की ओर से दाखिल की गईं। आयोग ने इन अपीलों के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेशों का हवाला भी दिया।

सुनवाई के दौरान मामले की विचारणीयता यानी अदालत में याचिकाओं पर सुनवाई की जा सकती है या नहीं, इस सवाल पर भी दलीलें रखी गईं। इसी दौरान अधिवक्ता मैथ्यूज नेडुमपारा ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखनी शुरू की, जिसके बाद अदालत की ऑडियो-वीडियो सुविधा बंद हो गई।

फिलहाल, मामले में चुनाव आयोग ने अपने फैसलों और प्रक्रिया का बचाव किया है, जबकि याचिकाकर्ताओं ने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। अब आगे की कार्यवाही में याचिकाकर्ताओं के जवाब और दोनों पक्षों की दलीलों पर नजर रहेगी। अगली सुनवाई की तारीख अभी घोषित नहीं की गई है।

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  Sports

न्यूजीलैंड दौर पर भारतीय टीम को बड़ा झटका, वनडे सीरीज से बाहर हुए प्रसिद्ध कृष्णा, आकिब नबी की खुल सकती है किस्मत

भारतीय क्रिकेट टीम को न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज से पहले बड़ा झटका लगा है. टीम इंडिया के तेज गेंदबाज प्रसिद्ध कृष्णा चोट से पूरी तरह नहीं उबर पाने के कारण वनडे सीरीज में नहीं खेल पाएंगे. ऐसे में उनकी जगह आकिब नबी को मौका मिल सकता है. आकिब न्यूजीलैंड ए के खिलाफ चार दिवसीय टेस्ट मैच में अपनी गेंदबाजी से प्रभावित कर चुके हैं. Wed, 28 Oct 2026 19:30:46 +0530

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