न्यूजीलैंड और इंग्लैंड का मैच अगर बारिश में धुला, तो पाकिस्तान तुरंत हो जाएगी टूर्नामेंट से बाहर, यहां समझिए पूरा समीकरण
NZ vs ENG: टी-20 विश्व कप 2026 का एक अहम मुकाबला आज न्यूजीलैंड और इंग्लैंड के बीच खेला जाने वाला है. ये मैच कोलंबो के आर. प्रेमदासा स्टेडियम में खेला जाने वाला है, जिसपर सभी की नजरें टिकी होंगी. ग्रुप-2 से इंग्लैंड की टीम ने सुपर-8 के लिए क्वालीफाई कर लिया है. जबकि दूसरे स्पॉट के लिए पाकिस्तान और न्यूजीलैंड की टीमों के बीच जंग है. इसलिए न्यूजीलैंड और इंग्लैंड के बीच खेले जाने वाले मैच से ही पाकिस्तान की किस्मत का ही फैसला होने वाला है. मगर, सवाल उठता है कि यदि NZ VS ENG मैच बारिश में धुल जाता है, तो क्या होगा?
पाकिस्तान की किस्मत का होगा फैसला
न्यूजीलैंड और इंग्लैंड के बीच खेले जाने वाले मैच पर पाकिस्तान की भी नजरें टिकी होंगी. बात ऐसी है कि यदि इस मैच में इंग्लैंड जीत जाता है तो पाकिस्तान के पास सेमीफाइनल में जगह बनाने का एक मौका होगा. वहीं अगर आज न्यूजीलैंड की टीम जीत दर्ज करती है, तो पाकिस्तान के लिए टी20 वर्ल्ड कप 2026 का सफर खत्म हो जाएगा और वो पूरी तरह सेमीफाइनल में जगह बनाने से चूक जाएगी.
कैसा रहेगा आज कोलंबो का मौसम
आज रात कोलंबो में सिर्फ 3% ही बारिश की संभावना जताई जा रही है, जिससे न्यूजीलैंड और इंग्लैंड के बीच खेला जाने वाला मैच प्रभावित हो सकता है. अहम मुकाबले के दौरान आसमान में बादल बने रहने की आशंका है. तापमान 31 से 24 डिग्री तक रह सकता है. हवा 9 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चल सकती है.
Can New Zealand join England in the semi-finals of the #T20WorldCup? ????
— ICC (@ICC) February 27, 2026
How to watch ???? https://t.co/NPykWM7qqY pic.twitter.com/VW4dYeeqr0
बारिश हुई तो क्या होगा?
अंक तालिका पर गौर करें, तो इंग्लैंड की टीम ने तो सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई कर लिया है और श्रीलंका की टीम एलिमिनेट हो चुकी है. अब न्यूजीलैंड और पाकिस्तान सेमीफाइनल की रेस में है. लेकिन, अगर इंग्लैंड और न्यूजीलैंड का मैच वॉशआउट होता है, तो कीवी टीम 4 अंकों के साथ सेमीफाइनल में पहुंच जाएगी. वहीं, पाकिस्तान की टीम अपने आप ही टूर्नामेंट से बाहर हो जाएगी. चूंकि, उसके 2 मैच हो चुके हैं और उसके पास अभी 1 ही अंक है.
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न्यूयॉर्क में 1970 की फिल्म ‘अरण्येर दिन रात्रि’ चर्चा मेंं:सत्यजीत रे की 56 साल पुरानी फिल्म डिजिटल अवतार में री-लॉन्च, मध्य वर्ग के जातीय और मर्दाना अहंकार पर छिड़ी नई बहस
अमेरिका में 1970 की बंगाली फिल्म ‘अरण्येर दिन रात्रि’ को डिजिटल अवतार में री-लॉन्च किया गया है। मशहूर फिल्म निर्माता सत्यजित रे की इस फिल्म को नए 4के रूप में मैनहैटन के प्रसिद्ध आर्ट‑हाउस सिनेमाघर फिल्म फोरम में दो हफ्ते के लिए दोबारा दिखाया जा रहा है। पुरानी फिल्मों को संरक्षित करने वाली संस्था ‘द फिल्म फाउंडेशन’, फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन और जानस फिल्म्स ने मिलकर इसे नए रूप में सजाया-संवारा है। इसे पिछले साल न्यूयॉर्क फिल्म फेस्टिवल में दिखाया गया था और अब आम दर्शकों के लिए यह खुला है। कोलकाता के शहरी माहौल में रहे चार दोस्तों की मस्ती के पीछे छिपी पुरुष सत्ता और जातिगत अहंकार की कहानी पर आधारित अरण्येर दिन रात्रि 1970 में जितनी प्रासंगिक थी, आज भी उतनी ही सटीक है। फिल्म में कोलकाता (तब कलकत्ता) के उच्च जाति के पढ़े‑लिखे, अंग्रेजी बोलने वाले अविवाहित युवकों- अशीम, संजय, हरी और शेखर की कहानी है, जो शहर के शोर से दूर झारखंड में पलामू के जंगलों की यात्रा पर जाते हैं। यहां उनका सामना संथाल इलाके में आदिवासी समाज और गांवों से होता है। वे बिना बुकिंग सरकारी गेस्ट हाउस पर पहुंचकर चौकीदार को घूस देकर कमरे हथिया लेते हैं और हंसी उड़ाते हुए अंग्रेजी में कहते हैं- ‘भ्रष्टाचार के लिए ईश्वर को धन्यवाद।’ हॉलीवुड फिल्म समीक्षक जे. होबरमैन कहते हैं, ‘यह फिल्म केवल एक यात्रा की कहानी नहीं है, बल्कि यह बंगाल के मध्यम वर्ग का एक ऐसा चित्रण है, जो अपनी सुविधाओं के खोल में कैद है। इसका नया संस्करण आज की पीढ़ी को यह समझने में मदद करेगा कि क्यों सत्यजीत रे को विश्व सिनेमा का जादुई चितेरा कहा जाता है।’ ‘अरण्येर दिनरात्रि’ को 1970 में बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में ‘गोल्डन बियर’ के लिए नामांकित किया गया था। इस फिल्म की शूटिंग झारखंड के जंगलों में हुई थी, जिसे रे ने अपनी जादुई दृष्टि से ‘मोहक जादुई जंगल’ जैसा बना दिया था। नई चमक के साथ पर्दे पर लौटी, आज भी जादू बरकरार री‑रिलीज के साथ एक तरह से सवाल भी लौट आया है- क्या भारतीय सिनेमा ने आज तक रे की इस फिल्म की तरह ईमानदारी से अपने ‘कन्फर्टेबल’ मध्य वर्ग, मर्दाना हठधर्मिता और आदिवासी समुदायों के प्रति नजरिये को स्क्रीन पर पूरी शिद्दत से रखा है? न्यूयॉर्क, लॉस एंजिलिस और अन्य शहरों के शो के बाहर युवा दर्शक जिस तरह फिल्म की पॉलिटिक्स और जेंडर पर चर्चा करते दिख रहे हैं, वे बताते हैं कि 1970 की यह यात्रा सिर्फ चार दोस्तों की पिकनिक नहीं, हमारी सामाजिक स्मृति की भी एक जरूरी वापसी है। नई चमक के साथ लौटी इस क्लासिकल फिल्म का जादू 56 साल बाद भी कायम है।
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