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स्ट्रगल, बॉडी शेमिंग-रिजेक्शन झेलकर बनीं स्टार:लोगों ने कहा- हीरोइन नहीं बन सकती, सुसाइड के ख्याल आए, मृणाल ठाकुर बोलीं, कमजोरियों को अपनी ताकत बनाया

टीवी की दुनिया से बॉलीवुड तक अपनी दमदार एक्टिंग और काबिलियत के बल अपनी एक अलग पहचान बना चुकी एक्ट्रेस मृणाल ठाकुर के लिए यह सफर आसान नहीं था। करियर के शुरुआती दौर में उन्हें डिमोटिवेटिंग और नकारात्मक अनुभवों का सामना करना पड़ा था। उनके लुक को देख कर कहा जाता था कि हिरोइन नहीं बन सकती हैं। ऐसे कमेंट्स सुनकर मृणाल घर पर आकार खूब रोती थीं। कई बार तो उन्होंने ट्रेन के नीचे कूदकर सुसाइड तक करने की सोची। ऐसे समय में मृणाल के घर वालों ने बहुत सराहा दिया। एक्ट्रेस ने कड़ी मेहनत और समर्पण से अपने स्ट्रगल का समाना किया। उनकी मेहनत रंग लाई और आज एक सक्सेसफुल एक्ट्रेस हैं। आज की सक्सेस स्टोरी में आइए, जानते हैं अभिनेत्री मृणाल ठाकुर के करियर और लाइफ से जुड़ी ऐसी ही कुछ और खास बातें। जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि मृणाल ठाकुर का जन्म 1अगस्त 1992 को महाराष्ट्र के धुले में हुआ। उनके पिता उदय ठाकुर बैंक में कार्यरत थे, जिनकी नौकरी ट्रांसफरेबल थी। पोस्टिंग के कारण परिवार धुले से मुंबई शिफ्ट हो गया। मां वंदना ठाकुर गृहिणी हैं। परिवार में उनके एक बड़े भाई धवल ठाकुर और एक बड़ी बहन लोचन ठाकुर हैं। बहन एक मेकअप आर्टिस्ट के रूप में जानी जाती हैं, जबकि उनके भाई धवल ठाकुर इंजीनियर हैं और अभिनेता के रूप में काम करते हैं, खासकर जियो हॉटस्टार की वेब सीरीज 'ठुकरा के मेरा प्यार' से उन्हें पहचान मिली। धुले से मुंबई तक का सफर पिता की बैंक नौकरी के चलते परिवार ने मुंबई में स्थायी रूप से रहना शुरू किया। यही बदलाव मृणाल के जीवन का अहम मोड़ साबित हुआ, क्योंकि आगे की पढ़ाई और करियर की दिशा मुंबई से ही तय हुई। मुंबई में पढ़ाई और कॉलेज लाइफ मृणाल ने अपनी स्कूली शिक्षा मुंबई में पूरी की। इसके बाद उन्होंने मुंबई के KC College से मास मीडिया में ग्रेजुएशन शुरू किया। हालांकि एक्टिंग में बढ़ती व्यस्तता के कारण वह अपनी डिग्री पूरी नहीं कर सकीं। कॉलेज के दौरान ही उन्हें ऑडिशन और टीवी की दुनिया का अनुभव मिलने लगा था। डॉक्टर नहीं, जर्नलिस्ट बनने का सपना मृणाल के माता-पिता चाहते थे कि वह डेंटिस्ट बनें। उन्होंने एंट्रेंस परीक्षा भी पास कर ली थी, लेकिन उनका मन पत्रकारिता की ओर झुका। मुंबई आतंकी हमलों की रिपोर्टिंग से प्रेरित होकर वह क्राइम रिपोर्टर बनना चाहती थीं। पिता की अनुमति से उन्होंने जर्नलिज्म में एडमिशन लिया, मगर किस्मत उन्हें कैमरे के सामने ले आई। मजाक में दिया ऑडिशन, मिल गया पहला ब्रेक कॉलेज के दौरान मजाक-मजाक में दिए गए एक ऑडिशन ने मृणाल की जिंदगी बदल दी। उन्हें 2012 में स्टार प्लस के टीवी शो ‘मुझसे कुछ कहती... ये खामोशियां’ में काम करने का मौका मिला। यही उनका पहला बड़ा ब्रेक था, जिसने अभिनय के सफर की औपचारिक शुरुआत कर दी। मराठी सिनेमा से फिल्मी शुरुआत टीवी के बाद उन्होंने मराठी फिल्मों की ओर रुख किया। उनकी पहली मराठी फिल्म ‘Hello Nandan’ थी। इस फिल्म से उन्होंने बड़े पर्दे पर कदम रखा और क्षेत्रीय सिनेमा में अपनी पहचान बनानी शुरू की। परिवार की चिंता और सपोर्ट शुरुआत में परिवार को एक्टिंग करियर को लेकर चिंता थी, क्योंकि पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। जब काम और पढ़ाई साथ संभालना मुश्किल हुआ, तो पिता ने उन्हें एक स्पष्ट दिशा चुनने की सलाह दी। परिवार के समर्थन ने ही मृणाल को अपने फैसले पर टिके रहने की ताकत दी। ‘बुलबुल’ बनकर घर-घर पहचान टीवी शो ‘कुमकुम भाग्य’ में ‘बुलबुल’ के किरदार ने मृणाल को घर-घर में पहचान दिलाई। इस भूमिका के बाद वह दर्शकों के बीच ‘बुलबुल’ के नाम से मशहूर हो गईं और उनके करियर को नई ऊंचाई मिली। बॉडी शेमिंग, रिजेक्शन और डिप्रेशन का दौर हालांकि करियर की शुरुआत में मृणाल को लुक्स और फिगर को लेकर ताने सुनने पड़े। उन्हें गांव की लड़की और यहां तक कि मटका कहकर बुलाया गया। करियर के शुरुआती दिनों में मृणाल को लोकल ट्रेन से कूदकर आत्महत्या करने जैसे ख्याल भी आते थे। स्ट्रगल के दिनों में वह टाउन से अंधेरी तक लोकल ट्रेन और बस से सफर कर ऑडिशन देती थीं। इंफिनिटी मॉल के वॉशरूम में ड्रेस बदलकर ऑडिशन देना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। ‘लव सोनिया’ से बदली किस्मत साल 2018 में इंडो-अमेरिकन फिल्म ‘लव सोनिया’ ने उनके करियर को नया मोड़ दिया। फिल्म में उनके अभिनय की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई। यही उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुई। हालांकि जब फिल्मों के लिए मृणाल ऑडिशन दे रही थीं तब उन्हें यह कहकर रिजेक्ट कर दिया जाता था कि टीवी पर काफी एक्सपोज हो चुकी हैं, फिल्मों में कोई नहीं लेगा। मृणाल ठाकुर की फिल्म ‘लव सोनिया’ ह्यूमन ट्रैफिकिंग पर आधारित थी। मृणाल ने बताया कि जब फिल्म के लिए कास्टिंग चल रही थी, तब उनका ऑडिशन एक ऐसे फोल्डर में बंद करके रख दिया गया था, जिस पर साफ लिखा था कि खोलना मना है। यानी वह फाइल जिसे देखा ही नहीं जाना था। हालांकि, फिल्म के निर्देशक तबरेज नूरानी ने वह फोल्डर खोला, ऑडिशन देखा और उन्हें पर्सनली मिलने के लिए बुलाया। आमने-सामने की बातचीत के बाद निर्देशक को यकीन हो गया कि वह सोनिया का किरदार निभा सकती हैं। लुक को लेकर करनी पड़ी मेहनत फिल्म में सोनिया एक गांव की सीधी-सादी लड़की है। इस किरदार के लिए एक्ट्रेस को अपने लुक को लेकर भी काफी समझाना पड़ा। उन्होंने बताया कि उन्हें निर्माता डेविड वोमार्क और टीम के बाकी सदस्यों को यह भरोसा दिलाना पड़ा कि मेकअप, हेयर स्टाइलिंग और तकनीकी मदद से किरदार के मुताबिक नैचुरल लुक दिया जा सकता है। उन्होंने टीम से खासतौर पर रिक्वेस्ट की कि उन्हें यह मौका दिया जाए। सिर्फ खूबसूरती काफी नहीं मृणाल कहती हैं- बाहरी दुनिया अक्सर सोचती है कि वह खूबसूरत है, सफल है, इसलिए उसे सब कुछ आसानी से मिल गया होगा। लेकिन सच्चाई यह है कि हर किसी को अपनी लाइफ में संघर्ष करना पड़ता है। सिर्फ खूबसूरती ही काफी नहीं होती, इसके लिए कई और चीजों की जरूरत होती है। शोहरत की कीमत भी चुकानी पड़ती है उन्होंने आगे कहा- कभी-कभी मैं सोचती हूं काश मैं एक आम लड़की की तरह जिंदगी जी पाती। शोहरत आपको छोटी-छोटी खुशियों का भी त्याग करने पर मजबूर कर देती है। सफलता और सुंदरता से परे, दिल में हमेशा एक आम इंसान की तरह जीने की चाहत रहती है। गंभीर अभिनेत्री के तौर पर पहचान, लेकिन स्ट्रगल जारी ‘लव सोनिया’ में मृणाल ठाकुर के इमोशनल और रॉ परफॉर्मेंस ने क्रिटिक्स और मेकर्स का ध्यान खींचा। लेकिन इस फिल्म का मृणाल को सिर्फ इतना फायदा हुआ कि उन्हें टीवी एक्ट्रेस के टैग से बाहर निकलने का मौका मिला। जबकि उनके बारे में कहा जाता था कि टीवी में काम करने की वजह से चेहरा इतना एक्सपोज हो जाता है कि फिल्मों में कोई सीरियसली नहीं लेगा। फिल्मों में मृणाल को दर्शकों ने स्वीकार तो किया, लेकिन ‘लव सोनिया’ के बाद भी उन्हें संघर्ष करना पड़ा, लेकिन अब उन्हें बड़े बैनर्स में ऑडिशन के मौके मिलने लगे। ऐसे मिला ‘सुपर 30’ का मौका ‘लव सोनिया’ देखने के बाद कई फिल्ममेकर्स ने मृणाल को नोटिस किया। उसी दौरान डायरेक्टर विकास बहल अपनी फिल्म ‘सुपर 30’ के लिए एक नए चेहरे की तलाश में थे, जो किरदार में सादगी और मजबूती दोनों ला सके। मृणाल ने फिल्म के लिए ऑडिशन दिया। उनका टेस्ट इतना प्रभावशाली रहा कि उन्हें ऋतिक रोशन के अपोजिट लीड रोल के लिए चुन लिया गया। फिल्म में उन्होंने आनंद कुमार की पत्नी ‘सु्प्रिया’ का किरदार निभाया। इस किरदार के लिए मृणाल को तीन राउंड ऑडिशन देना पड़ा था। पहले राउंड मे बेसिक ऑडिशन हुआ था, जिसमें सीन परफॉर्म करवाया गया। दूसरे राउंड में इंटेंस सीन टेस्ट हुआ था, ताकि उनके इमोशनल रेंज को परखा जा सके। तीसरे राउंड के ऑडिशन में सुप्रिया के किरदार के लिए सादे और बिहारी लुक में स्क्रीन टेस्ट लिया गया। कैसे मिला ‘बटला हाउस’ में मौका? ‘सुपर 30’ के बाद मृणाल ठाकुर इंडस्ट्री में एक भरोसेमंद नई अभिनेत्री के रूप में देखी जाने लगी थीं। फिल्म में उनकी सादगी और इमोशनल परफॉर्मेंस ने मेकर्स का ध्यान खींचा। जब ‘बटला हाउस’ की कास्टिंग चल रही थी, तब डायरेक्टर निखिल आडवाणी और उनकी टीम एक ऐसे चेहरे की तलाश में थे जो रियलिस्टिक और जमीन से जुड़ा लगे। ‘सुपर 30’ में मृणाल का काम देखने के बाद उन्हें इस फिल्म के लिए अप्रोच किया गया। इस फिल्म में मृणाल ने जॉन अब्राहम की पत्नी का किरदार निभाया। जॉन अब्राहम के साथ उनकी जोड़ी को सराहा गया, खासकर उन दृश्यों में जहां परिवार और ड्यूटी के बीच भावनात्मक संघर्ष दिखाया गया। इस किरदार के लिए भी मृणाल को ऑडिशन देना पड़ा था। साउथ की फिल्म ‘सीता रामम’ से पैन-इंडिया पहचान मिली ‘लव सोनिया’ और सुपर 30’ में उनकी परफॉर्मेंस देखकर साउथ के फिल्ममेकर्स ने उन्हें नोटिस किया। उसी दौरान डायरेक्टर हन्‍नु राघवपुड़ी अपनी पीरियड लव स्टोरी ‘सीता रामम’ के लिए एक नए चेहरे की तलाश में थे, ऐसा चेहरा जो शाही अंदाज भी ला सके और मासूमियत भी। फिल्म में मृणाल को ‘सीता महालक्ष्मी’/‘नूरजहां’ का ड्यूल शेड वाला किरदार निभाना था, इसलिए मेकर्स उनके एक्सप्रेशन, स्क्रीन प्रेजेंस और क्लासिकल लुक को लेकर काफी सजग थे। आखिरकार, मृणाल की हिंदी फिल्मों में दिखी नैचुरल एक्टिंग, उनका सॉफ्ट लेकिन स्ट्रॉन्ग स्क्रीन प्रेजेंस मे क्लासिक ब्यूटी और 60 के दशक के लुक में फिट बैठा दिया। फिल्म रिलीज होते ही बड़ी हिट साबित हुई और मृणाल को पैन-इंडिया पहचान मिली। सच कहें तो इस फिल्म ने उन्हें सिर्फ एक्ट्रेस नहीं, बल्कि रोमांटिक आइकन बना दिया। मृणाल ठाकुर की आने वाली फिल्में मृणाल ठाकुर अब तक ‘घोस्ट स्टोरी', ‘तूफान’, ‘धमाका’, ‘जर्सी’, ‘गुमराह’ और ‘सन ऑफ सरदार 2’ जैसी कई प्रमुख फिल्मों में काम कर चुकी हैं। हाल ही में उनकी फिल्म ‘दो दीवाने शहर में’ सिद्धांत चतुर्वेदी के साथ रिलीज हुई है। इसके अलावा ‘डकैत: ए लव स्टोरी’, ‘है जवानी तो इश्क होना है’, ‘पूजा मेरी जान’ और ‘अल्लू अर्जुन’ के साथ साउथ की साइंस-फिक्शन एक्शन फिल्म रिलीज होने वाली है। ___________________________ पिछले हफ्ते की सक्सेस स्टोरी पढ़िए... संघर्ष, ट्रॉमा-रिजेक्शन से उठकर स्ट्रॉन्ग एक्ट्रेस बनीं भूमि पेडनेकर:बोलीं- स्कूल में बुलिंग होती थी, तभी सोचा कि एक दिन सबको कुछ बनकर दिखाऊंगी संघर्ष, ट्रॉमा, रिजेक्शन और सामाजिक तानों के बीच खुद को साबित करने वाली अभिनेत्री का नाम है भूमि पेडनेकर। मुंबई की चमकदार फिल्म इंडस्ट्री में पहचान बनाना आसान नहीं होता, खासकर तब जब शुरुआत आत्म-संदेह,असुरक्षा और निजी आघातों से भरी हो। पूरी खबर पढ़ें..

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नीरज पांडे डायरेक्टर करेंगे आरडी बर्मन की बायोपिक:मणिकर्णिका बना चुके कमल जैन कर रहे हैं प्रोड्यूस, कभी न देखा गया सिनेमाई अनुभव बनाने की योजना

लीजेंड्री सिंगर और कंपोजर आरडी बर्मन की बायोपिक मेगा स्कैल पर बन रही है। ये भारत की सबसे चर्चित अपकमिंग फिल्मों में से है, जिसे कमल जैन प्रोड्यूस कर रहे हैं। इस फिल्म का निर्देशन नीरज पांडे करने वाले हैं। दैनिक भास्कर के सूत्रों के अनुसार, आरडी बर्मन की बायोपिक के प्रोड्यूसर इस फिल्म को मेगा-स्केल पर, भारत में पहले कभी न देखे गए सिनेमाई अनुभव के रूप में बनाने की योजना बना रहे हैं। यह बायोपिक पहले ही भारत से आने वाली सबसे बहुप्रतीक्षित फिल्मों में से एक के रूप में सुर्खियां बटोर रही है। और ऐसा होना स्वाभाविक भी है, एक ऐसे देश में जो संगीत को जीता है, वहां महानतम दिग्गज आरडी बर्मन के असाधारण जीवन और विरासत को बड़े पर्दे पर लाने से बड़ा विषय और कोई नहीं हो सकता। फिल्ममेकर एवं निर्देशक नीरज पांडे अपनी प्रशंसित फिल्मों जैसे ए वेंसडे, बेबी, स्पेशल और ब्लॉकबस्टर बायोपिक एम.एस.धोनीः द अनटोल्ड स्टोरी के लिए जाने जाते हैं। प्रोड्यूसर कमल जैन ने हाल ही में अत्यंत सफल पीरियड ड्रामा मणिकर्णिकाः द क्वीन ऑफ झांसी का निर्माण किया था, जिसमें कंगना रनौत मुख्य भूमिका में थीं। दैनिक भास्कर ने आरडी बर्मन की बायोपिक के निर्माताओं, प्रतिष्ठित फिल्ममेकर एवं निर्देशक नीरज पांडे और प्रोड्यूसर कमल जैन से फिल्म की प्रतिष्ठित स्टारकास्ट के बारे में जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया। हालांकि, इस विषय पर दोनों निर्माता टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं थे। राहुल देव बर्मन, जिन्हें आरडी बर्मन के नाम से जाना जाता है, एक भारतीय संगीत निर्देशक और गायक थे, जिन्हें हिंदी फिल्म संगीत जगत के सबसे महान और सफल संगीत निर्देशकों में से एक माना जाता है। 1960 के दशक से लेकर 1990 के दशक तक, बर्मन ने 331 फिल्मों के लिए संगीत तैयार किया और अपनी अनूठी धुनों के माध्यम से फिल्म संगीत को एक नई ऊंचाईयों पर पहुचाया। उन्होंने महान गायकों जैसे किशोर कुमार, लता मंगेशकर, आशा भोसले और मोहम्मद रफी के साथ व्यापक रूप से काम किया। आरडी बर्मन ने साल 1980 में आशा भोसले से विवाह किया। इस जोड़ी ने साथ मिलकर बॉलीवुड के कई सुपरहिट गीत दिए और अनेक लाइव प्रस्तुतियां भी कीं। उन्होंने प्रसिद्ध गीतकारों जैसे मजरूह सुल्तानपुरी, आनंद बक्शी और गुलजार के साथ भी व्यापक रूप से काम किया और अपने करियर के कुछ सबसे यादगार गीतों की रचना की। “पंचम” के नाम से प्रसिद्ध, वे महान संगीतकार सचिन देव बर्मन और उनकी पत्नी, बंगाली गीतकार मीरा देव बर्मन के इकलौते पुत्र थे।

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