राइखस्टाग फायर: एक आग, जिसने हिटलर को तानाशाह बनने की खुली छूट दे दी
नई दिल्ली, 26 फरवरी (आईएएनएस)। एक आग जो अपनी तपिश में सबको जलाकर खाक करने का दम रखती है, लेकिन इसी आग ने किसी की दिल की मुराद पूरी कर दी। 27 फरवरी 1933 को कुछ ऐसा ही हुआ। उस रात बर्लिन में ठंडी हवा चल रही थी, लेकिन जर्मनी की राजनीति में जो आग भड़की, उसने पूरे देश का भविष्य बदल दिया।
जर्मनी की संसद भवन राइखस्टाग अचानक लपटों में घिर गई। यह घटना इतिहास में राइखस्टाग फायर के नाम से दर्ज है। उस समय जर्मनी में राजनीतिक अस्थिरता चरम पर थी और कुछ ही हफ्ते पहले एडोल्फ हिटलर को चांसलर नियुक्त किया गया था।
आग लगने के तुरंत बाद एक डच युवक मारिनस वान डेर लुब्बे को गिरफ्तार किया गया, जिसे कम्युनिस्ट विचारधारा से जुड़ा बताया गया। नाजी पार्टी ने बिना देर किए इस घटना को कम्युनिस्ट विद्रोह की साजिश घोषित कर दिया। हिटलर ने दावा किया कि यह जर्मन राष्ट्र के खिलाफ एक सुनियोजित हमला है और देश को बचाने के लिए कठोर कदम उठाने आवश्यक हैं।
सिर्फ एक दिन बाद, 28 फरवरी 1933 को राइखस्टाग फायर डिक्री जारी कर दी गई। इस आपात आदेश ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, प्रेस की आजादी और नागरिक अधिकारों को सस्पेंड कर दिया। पुलिस को बिना वारंट गिरफ्तारी का अधिकार मिल गया और हजारों लेफ्ट विंग के लोगों और विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया गया। लोकतंत्र की नींव को कानूनी रूप से कमजोर कर दिया गया।
इसके बाद मार्च 1933 में एनेबलिंग एक्ट पारित कराया गया, जिसने हिटलर को संसद की मंजूरी के बिना कानून बनाने की शक्ति दे दी। यही वह क्षण था जब जर्मनी का लोकतांत्रिक ढांचा लगभग समाप्त हो गया और नाजी शासन की औपचारिक शुरुआत हुई। एक आग, जिसकी साजिश को लेकर आज भी इतिहासकारों में बहस है, हिटलर के लिए सत्ता पर पूर्ण नियंत्रण का साधन बन गई।
इतिहासकार मानते हैं कि चाहे आग किसने लगाई, लेकिन नाजी नेतृत्व ने उसे अपने राजनीतिक हित में इस्तेमाल किया। भय और असुरक्षा का माहौल पैदा कर जनता को यह विश्वास दिलाया गया कि सख्त शासन ही देश को बचा सकता है। यही रणनीति आगे चलकर जर्मनी को तानाशाही, दमन और अंततः द्वितीय विश्व युद्ध की त्रासदी की ओर ले गई।
--आईएएनएस
केआर/
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IND vs ZIM: हार्दिक-सूर्या और तिलक का तूफान, भारत ने खड़ा किया टी20 वर्ल्ड कप इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा स्कोर
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संजू सैमसन-अभिषेक शर्मा ने दिलाई थी टीम इंडिया को अच्छी शुरुआत
टीम इंडिया के लिए संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा ओपनिंग करने उतरे. दोनों के तोबड़तोड़ शुरुआत की. अभिषेक और संजू सैमसन के बीच पहले विकेट के लिए 48 रनों की साझेदारी हुई. हालांकि संजू सैमसन बड़ा पारी नहीं खेल पाए और 15 गेंद पर 24 रन बनाकर आउट हो गए. इस दौरान उन्होंने एक चौका और 2 छक्का लगाए. उन्हें ब्लेसिंग मुज़ारबानी ने पवेलियन भेजा.
अभिषेक शर्मा ने जड़ी शानदार फिफ्टी
इसके बाद अभिषेक शर्मा और ईशान किशन के बीच दूसरे विकेट 72 रनों की साझेदारी हुई, लेकिन इसके बाद फिर जिम्बाब्वे के कप्तान सिकंदर रजा ने ईशान किशन को पवेलियन भेजा. ईशान किशन 24 गेंद पर 48 रन बनाए. इसके बाद एक शानदार अर्धशतक लगाकर अभिषेक आउट हुए. उन्हें टिनोटेंडा मापोसा ने पवेलियन भेजा. अभिषेक 30 गेंद पर 4 चौके और 4 छक्के की मदद से 55 रन बनाए.
सूर्या ने खेली तूफानी पारी
इसके बाद 172 रन के स्कोर पर कप्तान सूर्यकुमार यादव के रूप में भारत ने चौथा विकेट गंवाया. सूर्या ने 13 गेंदों पर 3 चौके और 2 छक्के की मदद से 33 रनों की पारी खेली. इसके बाद हार्दिक पांड्या और तिलक वर्मा ने तूफानी पारी खेल टीम इंडिया के स्कोर को 257 रनों तक पहुंचाया.
हार्दिक पांड्या ने लगाया अर्धशतक
हार्दिक 23 गेंद पर 2 चौका और 4 छक्के की मदद से नाबाद 50 रन बनाए. जबकि तिलक वर्मा ने 16 गेंदों पर 44 रनों की नाबाद पारी खेली. इस दौरान उनके बल्ले से 3 चौका और 4 छक्का निकला.
Blistering knock ???? Fiery finish ????
— BCCI (@BCCI) February 26, 2026
Hardik Pandya provides #TeamIndia with a big final flourish with 5⃣0⃣*(23) ????
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