सेबी का ब्रोकर्स, पोर्टफोलियो मैनेजर्स और म्यूचुअल फंड्स को सख्त निर्देश, सोशल मीडिया पर पंजीकरण की स्पष्ट जानकारी दें
मुंबई, 26 फरवरी (आईएएनएस)। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (एसईबीआई) ने गुरुवार को सभी विनियमित सभी संस्थाओं को निर्देश दिया कि वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिभूति बाजार से संबंधित सामग्री पोस्ट करते समय अपना पंजीकृत नाम और पंजीकरण संख्या स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करें।
यह नया नियम 1 मई से लागू होगा। यह निर्देश स्टॉक ब्रोकरों, पोर्टफोलियो प्रबंधकों, म्यूचुअल फंडों और वितरकों जैसे अन्य मध्यस्थों और एजेंटों पर लागू होगा।
सेबी ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य निवेशकों को पंजीकृत और विनियमित संस्थाओं द्वारा साझा की गई सामग्री को आसानी से पहचानने और सोशल मीडिया पर अपंजीकृत या अनियमित संस्थाओं द्वारा पोस्ट की गई सामग्री से अलग करने में मदद करना है।
सर्कुलर के अनुसार, यह नियम प्रतिभूति बाजार से संबंधित वीडियो, लिखित पोस्ट और अन्य सामग्री सहित सभी प्रकार की सामग्री पर लागू होगा।
यह नियम यूट्यूब, टेलीग्राम, इंस्टाग्रास, फेसबुक, व्हाट्सएप, एक्स, लिंक्डइन, रेडइट और थ्रेड्स के साथ अन्य सभी प्लेटफॉर्म पर लागू होगा।
सेबी ने कहा है कि विनियमित संस्थाओं और उनके एजेंटों को अपने सोशल मीडिया हैंडल के होम पेज पर अपना पंजीकृत नाम और पंजीकरण संख्या प्रमुखता से प्रदर्शित करनी होगी। उन्हें शेयर बाजार से संबंधित प्रत्येक वीडियो या पोस्ट की शुरुआत में भी इन विवरणों का उल्लेख करना होगा।
नियामक ने बताया कि हाल के वर्षों में, उसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग करके समन्वित शेयर हेरफेर और पंप-एंड-डंप योजनाओं को चलाने वाली कई संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई की है।
बाजार के जानकारों का मानना है कि विनियमित सामग्री की स्पष्ट पहचान से निवेशकों को बेहतर निर्णय लेने और भ्रामक जानकारी से बचने में मदद मिलेगी।
सेबी ने आगे स्पष्ट किया कि एकाधिक पंजीकरण रखने वाली संस्थाओं को अपने सोशल मीडिया होम पेज पर एक वेब लिंक प्रदान करना होगा जो उपयोगकर्ताओं को उनके सभी एसईबीआई-पंजीकृत नामों और पंजीकरण संख्याओं की सूची वाले पेज पर ले जाए। इसके अलावा, उन्हें यह स्पष्ट रूप से बताना होगा कि सामग्री किस विशिष्ट पंजीकरण के तहत प्रकाशित की जा रही है।
--आईएएनएस
एबीएस/
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NCERT की किताब पर मचा बवाल: PM मोदी ने जताई सख्त नाराजगी, पूछा- "बच्चों को हम क्या पढ़ा रहे हैं?"
एनसीईआरटी की क्लास 8 की नई सोशल साइंस की किताब को लेकर शुरू हुआ विवाद अब और गहरा गया है. ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ शीर्षक से शामिल अध्याय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर सुप्रीम कोर्ट Supreme तक ने सख्त रुख अपनाया है.
प्रधानमंत्री की नाराजगी
सरकारी सूत्रों के अनुसार, हाल ही में नवनिर्मित प्रधानमंत्री कार्यालय परिसर ‘सेवा तीर्थ’ में आयोजित कैबिनेट बैठक के दौरान यह मुद्दा प्रमुखता से उठा. प्रधानमंत्री ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से पूछा कि इस तरह की संवेदनशील सामग्री को मंजूरी कैसे दी गई और इसकी निगरानी किस स्तर पर हो रही थी. सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने सख्त लहजे में सवाल किया कि आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों को आखिर क्या पढ़ाया जा रहा है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए और लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई होनी चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट की रोक
मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने विवादित अध्याय वाली पुस्तक के आगे प्रकाशन, छपाई और डिजिटल प्रसार पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है. अदालत ने संकेत दिया है कि वह पूरे प्रकरण की गहन जांच चाहती है. मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव और National Council of Educational Research and Training के निदेशक को नोटिस जारी किया है. अदालत ने पूछा है कि उनके खिलाफ अवमानना अधिनियम या अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए.
किताब में क्या था विवादित
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नई सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ नामक अध्याय के अंतर्गत ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ शीर्षक से एक खंड जोड़ा गया था. इसमें न्यायपालिका के समक्ष मौजूद चुनौतियों का उल्लेख किया गया था, जिनमें विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार, मामलों का भारी बैकलॉग, जजों की कमी, जटिल कानूनी प्रक्रियाएं और आधारभूत ढांचे की कमजोरियां शामिल थीं. इसी सामग्री को लेकर विवाद खड़ा हुआ और इसे न्यायपालिका की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला बताया गया.
आगे की कार्रवाई
फिलहाल पुस्तक के प्रकाशन पर रोक है और सरकार पाठ्यपुस्तकों की स्वीकृति प्रक्रिया की समीक्षा कर रही है. सूत्रों का कहना है कि पूरे सिस्टम की जांच की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न उत्पन्न हो. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब मामले की गहन जांच की संभावना है. आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि इस प्रकरण में किस स्तर पर चूक हुई और शिक्षा मंत्रालय पाठ्यक्रम में क्या बदलाव करता है.
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