यूपी में सपा के ‘PDA दिवस’ को मायावती ने बताया नाटक, अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए दिया जवाब
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की बिसात अभी से बिछने लगी है और राजनीतिक दलों के बीच बयानों के तीर चलने शुरू हो गए हैं। ताजा मामला समाजवादी पार्टी द्वारा बहुजन नायक कांशीराम की जयंती को ‘PDA दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा से जुड़ा है, जिस पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने …
संघ प्रमुख बोले- देशहित के लिए तीन बच्चे जरूरी:मोहन भागवत ने नशा रोकने का फार्मूला सुझाया, कहा- पैरेंट्स बच्चों को समय दें
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के शताब्दी वर्ष में संघ प्रमुख डॉ मोहन भागवत पंजाब प्रवास पर हैं। वो तीन दिन से पंजाब में हैं और अलग-अलग वर्ग के लोगों मिल रहे हैं। संघ प्रमुख ने देश की डेमाग्राफी में हो रहे बदलाव से लेकर नशे के संबंध में पूछे गए सवालों के खुलकर जवाब दिए। संघ प्रमुख ने कहा कि देश हित के लिए तीन बच्चे जरूरी हैं। ऐसा कई शोधों में भी साबित हो चुका है। उन्होंने कहा कि हमारे लोगों के बच्चों की संख्या कम हो रही है और वो बढ़ रहे हैं। जो चिंता का विषय हे। उन्होंने कहा कि तीन बच्चे सर्वोत्तम, दो बच्चे खराब और एक बच्चा पैदा करना बेहद खराब है। वहीं पंजाब में बढ़ते नशे के सवाल पर उन्होंने गहरी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि बच्चे के नशे के गर्त में जाना या सुसाइड करने के पीछे सबसे बड़ा कारण है उसका अकेलापन। उन्होंने कहा कि बच्चा जब घर से बाहर जाता है और ठोकर खाता है तो उसे यह नहीं पता कि उसने रोना किसके पास है। पैरेंट्स बच्चे को समय नहीं दे रहे जिसकी वजह से वो अकेले में जाकर या तो सुसाइड कर रहा है या फिर वो नशे के गर्त में जा रहा है। उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए फार्मूला सुझाया और कहा कि पैरेंट्स अपने बच्चे का दर्द असफलता को सुने और उसे सफल बनने में सहयोग करे। संघ प्रमुख ने शादी को उम्र को लेकर भी कहा। उन्होंने कहा कि 19 से 25 साल की उम्र में शादी हो जानी चाहिए। इससे पारिवारिक झगड़े भी कम हो जाएंगे। उन्हाेंने कहा कि पंजाब समेत देश की डेमोग्राफी में बदलाव आ रहा है और संघ इसे रोकने के लिए लगातार प्रयासरत है। संघ प्रमुख बोले, हिंदू धर्म नहीं जीवन पद्धति है संघ प्रमुख ने हिंदू और सिख धर्म को लेकर एक सवाल के जवाब में कहा है कि हिंदू धर्म नहीं है यह जीवन जीने की पद्धति है। जिसमें यह स्पष्ट है कि सभी लोग अपने अपने हिसाब से अपना जीवन और पूजा पद्धति को अपनाएं। एक दूसरे से वैर भाव न हो यही हिंदू धर्म है। उन्होंने हिंदू शब्द की लंबी व्याख्या की। उन्होंने कहा कि सिख, जैन, बौध सभी की अपनी मान्यताएं हैं और वो सभी अपनी मान्यताओं को मानें यही तो जीवन पद्धति है। संघ को जानने के लिए एक बार शाखाओं में जरूर आएं संघ प्रमुख ने कहा कि पांच तरीके से आप संघ को जान सकते हैं। पहले संघ से जुड़ें और दायित्व लें। यह न कर सकें तो अपनी रूचि के अनुसार संघ के प्रकल्पों से जुड़ें। यही भी न हो तो संघ के लोगों से मिलकर कोई काम करें। इसमें भी आप समर्थ नहीं हैं तो संघ के लोगों से संपर्क करें। यह भी नहीं कर सकते तो अपने हिसाब से समाज सेवा निस्वार्थ भाव से करें तो हम समझेंगे कि आप संघ को जान चुकी हैं। RSS की तरफ से तय किए गए पंच परिवर्तन क्या हैं, जानिए.. 1. सामाजिक समरसता: आरएसएस ने देश व समाज के विकास के लिए समाजिक समरसता को पहले नंबर पर रखा है। इसके तहत ‘आप मैं एक रक्त’ स्लोगन के तहत काम करेंगे। महापुरुषों, गुरुओं, देवी देवताओं की तिथियों को मिलकर मनाएंगे। परिवार में एक वक्त भोजन सभी मिलकर करेंगे। जाति के आधार पर भेदभाव नहीं करेंगे। 2. पर्यावरण संरक्षण: पर्यावरण सरंक्षण को लेकर संघ लंबे समय से काम कर रहा है। इस शताब्दी वर्ष में गिलास में पानी और थाली में जूठा खाना न छोड़ने का संकल्प लेंगे। कमरे निकलते वक्त लाइट, पंखा बंद करके निकलेंगे। थर्मोकॉल व प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं करेंगे। रसायनमुक्त खेती और गौ-आधारित खेती को बढ़ावा देंगे। 3. परिवार प्रबोधन: सप्ताह में एक दिन पूरा परिवार एक साथ बैठकर सत्संग, भोजन व संवाद करेंगे। पूजा के समय मोबाइल-टीवी बंद रखेंगे। परिवार में महान पुरुषों व भगवत चर्चा करेंगे। बेटे बेटियों की संगति पर नजर रखेंगे और परिवार मित्र की भूमिका निभाएंगे। 4. स्व आधारित जीवन: जन्म दिन, शादी सालगिरा समेत हर पलों को भारतीय रीति रिवाजों के साथ मनाएंगे। स्थानीय व स्वदेशी उत्पाद प्रयोग करनेंगे। हस्ताक्षर भारतीय भाषा में करेंगे। अभिवादन सत श्री अकाल, राम राम, नमस्कार व नमस्ते का प्रयोग करेंगे। व्यायाम, योग जरूर करेंगे। 5. नागरिक कर्तव्य बोध: देश हित के लिए हर कार्य करना चाहे वो संभव हो या असंभव। ट्रैफिक नियमों का पालन करना होगा। घर का कचरा, गंदा पानी व अन्य सामान सड़क या गली में नहीं फेंकेंगे। राष्ट्रीय पर्वो में सहभागिता निभाएंगे। संघ के विस्तार पर रहेगा फोकस संघ प्रमुख का मुख्य फोकस पंजाब में संघ के विस्तार पर है। वो लोगों को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को जानने के लिए संघ की शाखाओं में आने के लिए कहते रहे हैं। देश में संघ की स्थापना 1925 में हुई तो पंजाब में संघ की एंट्री 1937 में हुई। पंजाब में पहली बार 1938 में कैंप लगाया गया जिसमें 100 स्वयं सेवकों ने हिस्सा लिया था। वर्तमान में पंजाब में संघ के 150 के करीब पूर्ण कालिक संघ प्रचारक काम कर रहे हैं।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Mp Breaking News




















