बिहार की 5 राज्यसभा सीटों के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू होते ही राज्य की राजनीति गरमा गई है। एनडीए और महागठबंधन, दोनों ही खेमों में बैठकों का दौर जारी है। इस बीच, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव पूरी तरह एक्शन मोड में दिख रहे हैं।
तेजस्वी यादव का बड़ा दावा
तेजस्वी यादव ने विधानसभा में अपने विधायकों और गठबंधन के साथियों के साथ बैठक की। उन्होंने आत्मविश्वास के साथ कहा कि महागठबंधन के पास पर्याप्त संख्याबल है और वे राज्यसभा चुनाव न सिर्फ लड़ेंगे, बल्कि जीतेंगे भी। उन्होंने संकेत दिया कि अगले कुछ दिनों में उम्मीदवारों के नाम तय कर लिए जाएंगे। उनके इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में एक बार फिर किसी 'खेला' की चर्चा तेज हो गई है।
क्या कहता है सीटों का गणित?
राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए जरूरी आंकड़ों को देखें, तो महागठबंधन (आरजेडी, कांग्रेस, वाम दल और आईआईपी) के पास कुल 35 विधायक हैं। जीत पक्की करने के लिए तेजस्वी को अभी भी 6 अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। ऐसे में सबकी नजरें ओवैसी की पार्टी और बसपा के रुख पर टिकी हैं। दूसरी ओर, मौजूदा समीकरण के हिसाब से एनडीए को भी अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए 3 अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ सकती है।
निर्विरोध चुनाव या वोटिंग?
अगर 5 सीटों के लिए केवल 5 ही उम्मीदवार मैदान में उतरते हैं, तो चुनाव निर्विरोध संपन्न हो जाएगा। लेकिन यदि कोई छठा या सातवां उम्मीदवार मैदान में आता है, तो मतदान होना तय है। ऐसी स्थिति में क्रॉस वोटिंग का खतरा भी बढ़ सकता है। आने वाले कुछ दिन बिहार की सत्ता और विपक्ष, दोनों के लिए परीक्षा की घड़ी साबित होने वाले हैं।
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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायल का अपना दौरा पूरा कर लिया है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने इस दौरे की जानकारी देते हुए इसे भारत-इजरायल संबंधों के लिए एक बड़ा 'मील का पत्थर' बताया है। प्रधानमंत्री नेतन्याहू के निमंत्रण पर हुआ यह दौरा लगभग 9 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की दूसरी इजरायल यात्रा थी, जिसने पिछले दशक की प्रगति को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।
24 घंटे का दौरा, बड़े नतीजे
विदेश सचिव के अनुसार, यह दौरा महज 24 घंटे से थोड़ा ज्यादा समय का था, लेकिन इसके परिणाम बहुत व्यापक रहे हैं। पीएम मोदी की यह यात्रा पश्चिम एशिया के देशों के साथ भारत के मजबूत होते रिश्तों की कड़ी का हिस्सा है। पिछले एक साल में प्रधानमंत्री ने कुवैत, सऊदी अरब, जॉर्डन और ओमान जैसे देशों का दौरा कर इस क्षेत्र में भारत की मौजूदगी को सशक्त किया है।
नेसेट मेडल और ऐतिहासिक सम्मान
इस यात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण इजरायल की संसद 'नेसेट' में प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन रहा। खास बात यह है कि पीएम मोदी को भारत और इजरायल के बीच रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए 'नेसेट मेडल' से सम्मानित किया गया। वे इस सम्मान को पाने वाले दुनिया के पहले व्यक्ति बन गए हैं।
तकनीक, कृषि और रक्षा पर जोर
दौरे के दौरान दोनों नेताओं ने एक खास टेक्नोलॉजी प्रदर्शनी देखी और डेलिगेशन लेवल की विस्तृत बातचीत की। इस दौरान भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए रिश्तों को 'शांति, इनोवेशन और खुशहाली के लिए भारत-इजरायल स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' तक बढ़ाने का फैसला लिया गया। कुल 16 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सिक्योरिटी, साइंस, टेक्नोलॉजी और स्पेस रिसर्च, कृषि और जल प्रबंधन, डिफेंस और ट्रेड प्रमुख हैं।
दोनों देशों ने साइंस और टेक्नोलॉजी के जॉइंट कमीशन को अब 'मंत्रालय स्तर' तक बढ़ाने का फैसला किया है ताकि आपसी सहयोग और तेजी से हो सके।
पीएम का याद वाशेम का दौरा
प्रधानमंत्री ने यरुशलम में 'याद वाशेम' (वर्ल्ड होलोकॉस्ट रिमेंबरेंस सेंटर) जाकर पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग से मुलाकात की और उनकी 'एक पेड़ मां के नाम' पहल के तहत राष्ट्रपति भवन के बगीचे में ओक का पेड़ लगाया।
अपनी यात्रा के आखिरी पड़ाव में प्रधानमंत्री ने इजरायल में रहने वाले भारतीय यहूदी समुदाय और इंडोलॉजिस्ट से मुलाकात की। साथ ही, उन्होंने सांस्कृतिक क्षेत्र की हस्तियों और मशहूर टीवी सीरीज 'फौदा' के कलाकारों से भी बातचीत की। विदेश सचिव ने अंत में कहा कि यह दौरा दिखाता है कि भारत अपने द्विपक्षीय संबंधों में इजरायल को कितनी प्राथमिकता देता है।
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