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कैसे डैमेज कंट्रोल कर रहा चुनाव आयोग: वीडियो बनाकर हकीकत बता रहा, सोशल मीडिया पर एक्टिव, 5 विवादित फैसले वापस लिए

चुनाव आयोग ने SIR और वोटर लिस्ट विवाद के बीच सोशल मीडिया पर सफाई दी, गलतियां मानीं और नियमों में बदलाव किए. जानिए फॉर्म-6, फॉर्म-7 समेत पांच अहम बदलावों की पूरी कहानी.

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Lula da Silva ने हासिल की 44 लाख वोटों की बढ़त, चौथी बार ब्राजील के राष्ट्रपति बने

(फाइल फोटो के साथ) रियो डी जिनेरियो, 26 अक्टूबर (एपी) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुखर आलोचक ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा रविवार को चौथी बार राष्ट्रपति निर्वाचित हुए। इस चुनाव परिणाम से लातिन अमेरिका में अमेरिका के बढ़ते प्रभाव की आलोचना करने वालों को राहत मिली है। मतगणना में 100 प्रतिशत वोटों की गिनती पूरी होने के बाद ब्राजील के निर्वाचन न्यायालय ने घोषणा की कि जल्द ही 81 वर्ष के होने जा रहे लूला ने अपने प्रतिद्वंद्वी फ्लावियो बोल्सोनारो पर करीब 44 लाख वोटों की निर्णायक बढ़त हासिल कर ली है।

लूला को कुल मतों का 51.8 प्रतिशत मिला। बोल्सोनारो ने हार स्वीकार करने से इनकार कर दिया और चुनाव परिणाम रद्द करने की मांग की। इससे पहले मतदान केंद्रों पर शाम के समय अफरा-तफरी की स्थिति बन गई थी।

यह स्थिति मतदान का समय दो घंटे बढ़ाने के अंतिम समय में लिए गए फैसले के बाद पैदा हुई थी। बोल्सोनारो, पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं। लूला ने 2022 में जायर बोल्सोनारो को हराकर राष्ट्रपति पद हासिल किया था।

बोल्सोनारो के पिता को लूला से हारने के बाद तख्तापलट की कोशिश करने के मामले में 27 साल की जेल की सजा सुनाई गई। लूला की जीत लातिन अमेरिका में ट्रंप के सहयोगी दक्षिणपंथी राष्ट्रपति उम्मीदवारों के चुनाव जीतने के हालिया रुझान के उलट है। इससे लातिन अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में ब्राजील ट्रंप की ओर से लगाए गए बढ़े हुए शुल्कों के दबाव के बावजूद अमेरिका से स्वतंत्र बने रहने की स्थिति में होगा।

लूला के चुनाव प्रचार अभियान की ओर से जारी एक वीडियो में ब्राजील के निर्वाचन न्यायालय द्वारा दूसरे दौर के चुनाव में उनकी जीत की पुष्टि किए जाने के बाद उन्हें अपनी पत्नी एवं प्रथम महिला रोसांगेला दा सिल्वा और सहयोगियों के साथ जश्न मनाते हुए दिखाया गया। साओ पाउलो की मुख्य सड़क और रियो डी जेनेरियो के सिनेलैंडिया चौक पर हजारों समर्थकों की भीड़ को संबोधित करते हुए लूला ने ब्राजील की जनता के प्रति आभार जताया। उन्होंने लैंगिक या धार्मिक भेदभाव के बिना सभी ब्राजीलियाई लोगों का सम्मान करने का संकल्प लिया और बोल्सोनारो पर भी निशाना साधा।

लूला ने कहा, ‘‘यह झूठ और सच्चाई को नकारने की प्रवृत्ति की हार है।’’ उन्होंने ब्राजील की संप्रभुता की रक्षा के अपने संकल्प को भी दोहराया। उन्होंने कहा, ‘‘या तो मातृभूमि स्वतंत्र रहेगी या हम ब्राजील के लिए मर मिटेंगे। ब्राजील किसी भी देश के अधीन होकर या उसके इशारे पर चलने वाला देश नहीं बनेगा।’’ लूला पांच जनवरी, 2027 को राष्ट्रपति के रूप में अपना चौथा कार्यकाल शुरू करेंगे।

निर्वाचन न्यायालय की घोषणा के साथ ही मतदान केंद्रों पर शाम से बना असमंजस खत्म हो गया। इससे पहले, ब्राजील के उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश क्रिस्टियानो जानिन ने मतदान समाप्त होने के निर्धारित समय से तीन मिनट पहले फैसला सुनाया कि मतदान केंद्र दो घंटे और खुले रहेंगे। यह फैसला दोनों उम्मीदवारों की मांग के बाद लिया गया।

लूला ने साओ पाउलो और साल्वाडोर में मतदान केंद्रों तक मतदाताओं को ले जाने वाली बसों से जुड़ी समस्याओं के कारण मतदान का समय बढ़ाने की मांग की थी। इन दोनों शहरों में आम तौर पर मौजूदा राष्ट्रपति के पक्ष में रुझान रहता है। वहीं, बोल्सोनारो ने ब्राजील के दक्षिणी हिस्से में भारी बारिश के कारण मतदान का समय बढ़ाने का अनुरोध किया था।

इस क्षेत्र में उन्हें अधिक समर्थन मिलने की संभावना थी। इस फैसले के कारण मतों की गिनती शुरू होने में दो घंटे की देरी हुई। यह स्पष्ट नहीं था कि निर्धारित समय के बाद कितने मतदान केंद्र खुले रहे।

बोल्सोनारो ने दावा किया कि जानिन लूला के पूर्व वकील रह चुके हैं। उन्होंने मतदान का समय बढ़ाने के फैसले की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि इससे ‘‘खेल के बीच में ही उसके नियम बदल दिए गए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इन घटनाओं के संदर्भ में चुनाव के नतीजों को स्वीकार करना असंभव है।’’ यह स्पष्ट नहीं है कि बोल्सोनारो की शिकायत चुनाव परिणाम रद्द करने के लिए जरूरी कानूनी मानदंडों पर खरी उतर सकती है या नहीं। यदि उनके पास धोखाधड़ी के सबूत हैं, तो उन्हें मतों की दोबारा गिनती कराने का अनुरोध करने का अधिकार भी है।

हालांकि, इससे चुनाव परिणाम बदलने की संभावना नहीं है। पूर्व राष्ट्रपति बोल्सोनारो द्वारा नियुक्त उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश और निर्वाचन न्यायालय के अध्यक्ष कासियो नूनेस मार्केस ने कहा कि मतदान का समय बढ़ाए जाने से चुनाव परिणाम प्रभावित नहीं हुए। ब्राजील में 1985 में सैन्य तानाशाही समाप्त होने के बाद यह पहली बार है कि पहले दौर के चुनाव में दूसरे स्थान पर रहने वाले उम्मीदवार ने राष्ट्रपति पद हासिल किया है।

पहले दौर में बोल्सोनारो को 47 प्रतिशत और लूला को 45 प्रतिशत वोट मिले थे। दोनों के बीच 22 लाख वोटों का अंतर था। महंगाई और सुरक्षा को लेकर लोगों की चिंताओं के कारण लूला के लिए दोबारा चुनाव जीतना कठिन था।

बोल्सोनारो ने अपराध के खिलाफ सख्त रुख को अपने चुनाव प्रचार का प्रमुख मुद्दा बनाया और खाद्य पदार्थों की कीमतें घटाने का वादा किया। वहीं, अनिर्णय की स्थिति में मौजूद मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए लूला ने महंगी प्रोत्साहन योजनाओं पर जोर दिया। दोनों नेताओं को परिवार के सदस्यों और सहयोगियों से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना करना पड़ा है।

लूला ने 1970 के दशक में ट्रेड यूनियन नेता के रूप में अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था। इसके बाद उन्होंने वर्कर्स पार्टी की स्थापना में मदद की। इस पार्टी की ओर से उन्होंने तीन बार राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ा और आखिरकार 2002 में जीत हासिल की।

चार साल बाद वह फिर निर्वाचित हुए। 2010 में उनके मंत्रिमंडल की सदस्य दिल्मा रूसेफ ने उनकी जगह ली। रूसेफ 2014 में दोबारा निर्वाचित हुईं।

रूसेफ को 2016 में सरकारी लेखा-जोखा संबंधी हेरफेर के आरोपों के बीच महाभियोग के जरिए पद से हटा दिया गया था। इस दौरान भ्रष्टाचार की व्यापक जांच में लूला का नाम भी सामने आया। लूला ने 2018 में फिर राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की कोशिश की, लेकिन दोषी ठहराए जाने के बाद मार्च में उन्हें जेल भेज दिया गया।

580 दिन जेल में रहने के बाद लूला रिहा हुए। इसके बाद ब्राजील के उच्चतम न्यायालय ने उनकी सजा रद्द कर दी। इसके बाद लूला पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के सबसे मुखर आलोचकों में शामिल हो गए और 2022 में उन्हें मामूली अंतर से हराया।

इस बार के राष्ट्रपति चुनाव में पहले दौर में पिछड़ने के बाद लूला ने अपने चुनाव प्रचार की रणनीति बदली, युवा मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश की और लोकतांत्रिक मूल्यों तथा अपनी राजनीतिक विरासत के समर्थन में लाखों ब्राजीलियाई लोगों को सड़कों पर उतरने के लिए प्रेरित किया। लूला अब ट्रंप और निकारागुआ के राष्ट्रपति डेनियल ओर्टेगा के साथ अमेरिका महाद्वीप के सबसे उम्रदराज राष्ट्रपतियों में शामिल हो गए हैं। तीनों की उम्र 80 वर्ष है।

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  Sports

WPL 2027 Auction में UP Warriorz ने Sophie Molineux को 1.10 करोड़ में खरीदा

महिला प्रीमियर लीग 2027 के लिए खिलाड़ियों की नीलामी में कई बड़े नामों पर बोली लगी, तो कुछ खिलाड़ियों को कम कीमत में नई टीम भी मिल गई। ऑस्ट्रेलिया की कप्तान सोफी मोलिन्यू को यूपी वॉरियर्स ने 1.10 करोड़ रुपये में खरीदा, जबकि भारतीय बल्लेबाज किरण नवगिरे को दिल्ली कैपिटल्स ने 75 लाख रुपये में अपनी टीम में शामिल किया। इस नीलामी में युवा और बिना अंतरराष्ट्रीय अनुभव वाले खिलाड़ियों पर भी टीमों ने भरोसा जताया है।

कोच्चि में हुई नीलामी में कुल 27 खाली स्थानों को भरने के लिए 25 खिलाड़ियों को खरीदा गया। मौजूदा विजेता रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने मुख्य दौर में कोई खिलाड़ी नहीं खरीदा, लेकिन बाद में ऑस्ट्रेलिया की ऑलराउंडर जेस जोनासन को 40 लाख रुपये और दक्षिण अफ्रीका की क्लो ट्रायन को 30 लाख रुपये में अपने साथ जोड़ा। टीम ने तेजल हसबनिस को 30 लाख, वृंदा दिनेश को 10 लाख रुपये में भी खरीदा। दिल्ली कैपिटल्स और बेंगलुरु ने 4-4 खिलाड़ी खरीदे और दोनों के पास एक-एक स्थान बाकी है।

यूपी वॉरियर्स ने इस नीलामी में सबसे ज्यादा खरीदारी की। टीम के पास शुरुआत में 3.75 करोड़ रुपये की सबसे बड़ी रकम थी और उसे 8 स्थान भरने थे। ऑस्ट्रेलिया की कप्तान सोफी मोलिन्यू को खरीदने के लिए उसे अपनी पुरानी टीम बेंगलुरु से मुकाबला करना पड़ा। बेंगलुरु ने 1.05 करोड़ रुपये तक बोली लगाई, लेकिन इसके बाद पीछे हट गई। मोलिन्यू ने जुलाई में ऑस्ट्रेलिया को सातवीं बार महिला टी20 विश्व कप जिताने में अहम भूमिका निभाई थी और इस साल वह टीम की सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली गेंदबाज भी हैं।

यूपी वॉरियर्स के सीओओ और क्रिकेट निदेशक क्षेमल वाइंगंकर ने कहा कि टीम सोफी मोलिन्यू को किसी भी कीमत पर खरीदना चाहती थी। उनके मुताबिक, मोलिन्यू और ग्रेस हैरिस के आने से टीम को बल्लेबाजी और गेंदबाजी के संयोजन में बदलाव करने के कई विकल्प मिलेंगे। उन्होंने मोलिन्यू के नेतृत्व और गेंदबाजी की तारीफ की और कहा कि सोफी एक्लेस्टोन के साथ उनकी जोड़ी टीम के लिए असरदार साबित हो सकती है।

ग्रेस हैरिस को भी यूपी वॉरियर्स ने 30 लाख रुपये में वापस खरीदा। वह पहले तीन सत्रों में इसी टीम के लिए खेल चुकी हैं। पिछले सत्र में वह बेंगलुरु का हिस्सा थीं और स्मृति मंधाना के साथ पारी की शुरुआत करने के अलावा टीम की दूसरी सबसे ज्यादा रन बनाने वाली बल्लेबाज रही थीं। वाइंगंकर ने कहा कि हैरिस को इतनी कम कीमत में वापस पाना टीम के लिए अच्छा सौदा है। यूपी वॉरियर्स ने भारतीय ऑलराउंडर स्नेह राणा और विकेटकीपर बल्लेबाज सुषमा वर्मा को भी 30-30 लाख रुपये में खरीदा। स्नेह राणा महिला प्रीमियर लीग में अपनी चौथी टीम के लिए खेलेंगी। उन्होंने कप्तान मेग लैनिंग के नेतृत्व में खेलने को लेकर उत्साह जताया।

गुजरात जायंट्स ने भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज जी कमलिनी को 40 लाख रुपये में खरीदा। वह पहले मुंबई इंडियंस के लिए खेल चुकी हैं और 2025 में उन्हें 1.60 करोड़ रुपये में खरीदा गया था। गुजरात ने आयरलैंड की ऑलराउंडर ओरला प्रेंडरगैस्ट को 30 लाख और 16 वर्षीय समायरा राघव को 10 लाख रुपये में टीम में शामिल किया।

नीलामी में 15 साल की कर्नाटक की ऑलराउंडर उमा काशवी सबसे कम उम्र की खिलाड़ी बनीं। दिल्ली कैपिटल्स ने उन्हें 10 लाख रुपये में खरीदा। मुंबई इंडियंस ने सबसे कम 90 लाख रुपये की रकम के साथ नीलामी में हिस्सा लिया और श्वेता सहरावत, अक्षिता भगत, दिशा कासत, लतिका इनामदार, भारती रावल और सनिका चालके समेत 6 नए खिलाड़ियों को खरीदा। कुल 25 में से 12 खिलाड़ी ऐसे रहे, जिन्हें पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का मौका नहीं मिला था।

इंग्लैंड की बल्लेबाज सोफिया डंकली, जिनकी शुरुआती कीमत 50 लाख रुपये थी, और श्रीलंका की कप्तान चमारी अटापट्टू नहीं बिक सकीं। यूपी वॉरियर्स ने स्कॉटलैंड की कप्तान कैथरीन ब्राइस को 10 लाख रुपये में खरीदा, जबकि उनकी टीम की खिलाड़ी कर्स्टी गॉर्डन दिल्ली कैपिटल्स के पास गईं। गौरतलब है कि स्कॉटलैंड सहयोगी देश है, इसलिए उसकी खिलाड़ियों को अंतिम एकादश में पांचवीं विदेशी खिलाड़ी के रूप में उतारने की अनुमति होगी। इन खरीदारी के बाद सभी टीमें आगामी सत्र के लिए अपने संयोजन को मजबूत करने की तैयारी में हैं।

Wed, 28 Oct 2026 20:47:00 +0530

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