Rahul Gandhi मानहानि केस में बरी, Jammu बाजार में आग से 40 दुकानें खाक
सोमवार को अपराह्न दो बजे तक ‘भाषा’ की विभिन्न फाइल से जारी मुख्य समाचार इस प्रकार हैं;
प्रादे37 : अदालत राहुल लीड बरी कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सुलतानपुर की विशेष अदालत ने मानहानि मामले में बरी किया सुलतानपुर/लखनऊ, उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर जिले की विशेष सांसद-विधायक अदालत ने सोमवार को कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को मानहानि के एक मामले में दोषमुक्त कर दिया है।
दि33 : ब्रिक्स दूसरीलीड संसदीय मंच आतंकवाद जैसी चुनौतियां सीमाओं तक सीमति नहीं, संवाद और संसदीय सहयोग जरूरी: बिरला नयी दिल्ली, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को कहा कि वैश्विक संघर्ष, आर्थिक अस्थिरता, आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का प्रभाव किसी एक देश की सीमाओं तक सीमित नहीं रहता और इनसे निपटने में संवाद, कूटनीति तथा संसदीय सहयोग महत्वपूर्ण हैं।
प्रादे32 : केरलम न्यायालय दुर्घटना न्यायाधीश चेरानेल्लूर सड़क दुर्घटना: केरल उच्च न्यायालय ने न्यायधीश के खिलाफ मामला दर्ज करने की अनुमति दी कोच्चि, केरल उच्च न्यायालय ने सोमवार को पुलिस को उस अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश के खिलाफ मामला दर्ज करने की अनुमति दे दी, जिसके 17 वर्षीय बेटे द्वारा कथित तौर पर चलाई जा रही कार की टक्कर से 55 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई थी।
दि31 : दिल्ली भाजपा खरगे प्रदर्शन दिल्ली भाजपा का खरगे के घर के पास विरोध प्रदर्शन, प्रधानमंत्री मोदी के ‘अपमान’ के लिए माफी की मांग नयी दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कथित अपमानजनक बयानों को लेकर दिल्ली भाजपा ने सोमवार को उनके आवास के पास विरोध प्रदर्शन किया।
प्रादे27 : जम्मू कश्मीर लीड आग बाजार जम्मू रेलवे स्टेशन के पास बाजार में भीषण आग, करीब 40 दुकानें जलकर खाक जम्मू, जम्मू रेलवे स्टेशन के पास एक बाजार में भीषण आग लगने से करीब 40 दुकानें जलकर खाक हो गईं और बाजार का चहल-पहल वाला व्यावसायिक इलाका मलबे में तब्दील हो गया। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
प्रादे43 : उप्र राहुल हादसा एसआईटी राहुल गांधी के काफिले की गाड़ियों की टक्कर : जांच के लिए एसआईटी गठित लखनऊ, उत्तर प्रदेश पुलिस ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के काफिले के पीछे चल रहे वाहनों की टक्कर की घटना की जांच के लिए विशेष अन्वेषण दल (एसआईटी) गठित किया है।
दि27 : न्यायालय लखीमपुर खीरी मामला लखीमपुर खीरी हिंसा: न्यायालय ने आशीष मिश्रा को दिवाली पर गृहनगर जाने की अनुमति दी नयी दिल्ली, उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को 2021 के लखीमपुर हिंसा मामले के आरोपी और पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा को अपने परिवार के साथ दिवाली मनाने के लिए गृहनगर जाने की अनुमति दे दी।
अर्थ6 : ग्लांस एल कैटरन जियो प्लेटफॉर्म्स समर्थित एआई एजेंटिक कॉमर्स मंच ‘ग्लांस’ में एल कैटरटन का रणनीतिक निवेश नयी दिल्ली, जियो प्लेटफॉर्म्स समर्थित स्वदेशी एआई एजेंटिक कॉमर्स मंच ‘ग्लांस’ ने उपभोक्ता क्षेत्र पर केंद्रित निवेश कंपनी एल कैटरटन से नई इक्विटी शेयर जारी कर अघोषित राशि जुटाने की सोमवार को जानकारी दी।
दि21 : कांग्रेस खरगे सीईसी ‘वोट चोरी’ के खुलासों के बावजूद ज्ञानेश कुमार को बचाने में जुटी सरकार : खरगे नयी दिल्ली, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार को आरोप लगाया कि ‘‘वोट चोरी के अनगिनत खुलासों’’ के बावजूद केंद्र सरकार मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए हर हथकंडा अपना रही है।
अर्थ11 : हुंदै बिक्री परिदृश्य हुंदै का 2027 में क्रेटा, नई बेयोन की सालाना 2.5 लाख इकाइयां बेचने का लक्ष्य नयी दिल्ली, वाहन विनिर्माता कंपनी हुंदै मोटर इंडिया का लक्ष्य 2027 में अपनी क्रेटा और नई बेयोन की कम से कम 2.50 लाख इकाइयां बेचने का है। कंपनी तेजी से बढ़ते मध्यम आकार के एसयूवी खंड में अपना नेतृत्व बनाए रखना चाहती है।
वि5 : ब्राजील लीड चुनाव ट्रंप के मुखर आलोचक लूला ब्राजील में फिर जीते, बोल्सोनारो ने चुनाव नतीजे ‘रद्द’ करने की मांग की रियो डी जिनेरियो, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुखर आलोचक ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा रविवार को फिर राष्ट्रपति निर्वाचित हुए।
खेल2 : खेल भारत मोर्कल लीड किशन ईशान किशन न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरे टी20 से भी बाहर वेलिंगटन, भारत के गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्कल ने सोमवार को कहा कि चोटिल विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में भी नहीं खेल पाएंगे।
खेल8 : खेल भारत संभावना टी20 श्रृंखला में अजेय बढ़त हासिल करने उतरेगा भारत, भुवनेश्वर पर होगी निगाह वेलिंगटन, बल्लेबाजों के दम पर पहले दो मैचों में जीत हासिल करने वाली भारतीय टीम न्यूजीलैंड के खिलाफ मंगलवार को यहां होने वाले तीसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच में अपना विजय अभियान जारी रखकर अजेय बढ़त हासिल करने की कोशिश करेगी जिसमें तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार और अर्शदीप सिंह के प्रदर्शन पर निगाह टिकी रहेगी।
MP-MLA Court Explained: क्या होती है सांसद-विधायकों की विशेष अदालत, कैसे होती है सुनवाई? यहीं से मानहानि मामले में बरी हुए राहुल गांधी
MP-MLA Court Explained: उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए अदालत ने 26 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को मानहानि के एक मामले में बरी कर दिया. यह मामला साल 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान दिए गए उनके एक बयान से जुड़ा था.
आरोप था कि राहुल गांधी ने उस समय भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी. स्थानीय भाजपा नेता विजय मिश्रा ने इस बयान को लेकर मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी. अदालत ने सुनवाई के बाद राहुल गांधी को दोषमुक्त कर दिया. रिपोर्टों के मुताबिक, अदालत ने टिप्पणी को मानहानिकारक नहीं माना.
इस फैसले के साथ करीब आठ साल से चल रही कानूनी लड़ाई को इस मामले में विराम मिला. लेकिन यह सवाल भी चर्चा में है कि एमपी-एमएलए अदालत आखिर होती क्या है? इसमें किन मामलों की सुनवाई होती है, इसकी शुरुआत कब हुई और क्या इन अदालतों में सचमुच फैसले जल्दी आते हैं?
क्या होती है MP-MLA कोर्ट?
एमपी-एमएलए कोर्ट सांसदों यानी मेंबर ऑफ पार्लियामेंट और विधायकों यानी मेंबर ऑफ लेजिसलेटिव असेंबली से जुड़े आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए नामित विशेष अदालत होती है. इसका मुख्य उद्देश्य जनप्रतिनिधियों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों को प्राथमिकता के आधार पर सुनना और अनावश्यक देरी कम करना है.
यह समझना जरूरी है कि हर राज्य में इसके लिए अलग इमारत या बिल्कुल नई अदालत होना जरूरी नहीं है. कई जगह पहले से काम कर रही मजिस्ट्रेट या सत्र अदालतों को सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए नामित किया जाता है. इस तरह एमपी-एमएलए कोर्ट कोई अलग न्याय व्यवस्था नहीं, बल्कि मौजूदा न्यायिक ढांचे में मामलों को प्राथमिकता देने की व्यवस्था है.
इन अदालतों में भी फैसला कानून, उपलब्ध सबूतों, गवाहों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर होता है. किसी नेता का सांसद या विधायक होना उसे दोषी या निर्दोष नहीं बनाता. कोर्ट को हर मामले में स्वतंत्र रूप से फैसला करना होता है.
यहां किन मामलों की सुनवाई होती है?
इन अदालतों में मौजूदा और पूर्व सांसदों एवं विधायकों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की सुनवाई हो सकती है. इनमें हत्या, हत्या का प्रयास, दंगा, मारपीट, धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार, आपराधिक धमकी और चुनाव से जुड़े अपरध जैसे मामले शामिल हो सकते हैं. आपराधिक मानहानि के मामले भी यहां सुने जा सकते हैं, बशर्ते संबंधित अदालत को उस मामले की सुनवाई का अधिकार दिया गया हो.
हालांकि, सिर्फ इतना कि किसी मामले में सांसद या विधायक का नाम है, यह तय करने के लिए पर्याप्त नहीं कि उसकी सुनवाई एमपी-एमएलए कोर्ट में ही होगी. मामले का अधिकार क्षेत्र, आरोपों की प्रकृति और हाईकोर्ट की ओर से तय की गई व्यवस्था भी अहम होती है.
सुप्रीम कोर्ट ने सांसदों और विधायकों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामलों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया है. जिन मामलों में उम्रकैद या मृत्युदंड जैसी सजा का प्रावधान है, उन्हें प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए गए हैं. इसका मकसद यह है कि गंभीर आरोपों वाले मामले वर्षों तक लंबित न रहें.
कब और क्यों शुरू हुई यह व्यवस्था?
सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों की सुनवाई तेज करने की जरूरत काफी समय से महसूस की जा रही थी. मार्च 2018 में केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट को दी गई जानकारी के मुताबिक, देशभर में सांसदों और विधायकों के खिलाफ हजारों आपराधिक मामले दर्ज थे. बड़ी संख्या में मामले लंबित होने की चिंता बढ़ी कि जनप्रतिनिधियों से जुड़े मुकसदों का फैसला आने में लंबा समय लग सकता है.
2017 में सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे मामलों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष अदालतें बनाने की दिशा में कदम उठाया. शुरुआत में केंद्र सरकार के साथ मिलकर अलग विशेष अदालतों की स्थापना पर विचार हुआ. बाद में व्यवस्था को व्यवहारिक बनाने के लिए राज्यों औऱ हाईकोर्टों को मौजूदा अदालतों को नामित करने एवं जरूरत के अनुसार अतिरिक्त अदालतें तय करने को कह गया.
4 दिसंबर 2018 को सुप्री्म कोर्ट ने हाईकोर्टों को अपने क्षेत्राधिकार में उपयुक्त मजिस्ट्रेट और सत्र अदालतों की पहचान करने एवं जनप्रतिनिधियों के मामलों की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई की व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए. यानी इस व्यवस्था का मकसद केवल नई अदालतें बनाना नहीं, बल्कि लंबित मुकदमों के नियमित मामलों की भीड़ में दबने से रोकना था.
देश में कितनी एमपी-एमएलए अदालतें हैं?
इन अदालतों की संख्या को लेकर एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है. केंद्र सरकार की विशेष अदालत योजना के तहत 11 अदालतों का आंकड़ा अलग से बताया जाता रहा है. वहीं कई राज्यों में मौजूदा जिला, मजिस्ट्रेट या सत्र अदालतों को भी सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए नामित किया गया है.
इसलिए देश में ऐसे मामलों की सुनवाई करने वाली अदालतों की कुल संख्या सिर्फ 11 मानना सही नहीं होगा. कोर्ट की संख्या समय के साथ बदल सकती है, क्योंकि हाईकोर्ट अपने राज्य में लंबित मामलों और जरूरत के मुताबिक अतिरिक्त अदालतों को नामित कर सकता है.
अदालतों की निगरानी कौन करता है?
एमपी-एमएलए कोर्ट संबंधित राज्य की न्यायायिक व्यवस्था और हाईकोर्ट के अधीन काम करती हैं. हाईकोर्ट लंबित मामलों की स्थिति की समीक्षा कर सकता है, रिपोर्ट मंगा सकता है और सुनवाई में अनावश्यक देरी रोकने के लिए निर्देश दे सकता है.
सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2023 में भी इस विषय पर निर्देश दिए थे. हाईकोर्टों से सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों की निगरानी के लिए उचित व्यवस्था बनाने और लंबित मुकदमों की प्रगति देखने को कहा गया था। इसका मतलब यह नहीं कि हाईकोर्ट हर मामले का फैसला खुद करता है. मुकदमे का निर्णय संबंधित ट्रायल कोर्ट ही करती है, जबकि निगरानी का उद्देश्य सुनवाई को प्रभावी बनाना है.
क्या इन अदालतों में जल्दी फैसले आते हैं?
विशेष अदालतों का मकसद मुकदमों को प्राथमिकता देना है, लेकिन इससे हर मामले का फैसला तय समय में हो जाए, इसकी गारंटी नहीं मिलती. गवाहों का समय पर पेश न होना, जांच में देरी, दस्तावेजों की कमी, बार-बार स्थगन और कोर्ट में काम का बोझ सुनवाई की गति को प्रभावित कर सकते हैं.
सरकारी आंकड़ों और न्यायिक रिपोर्टों में अलग-अलग समय पर मामलों के निपटारे की संख्या सामने आती रही है. उदाहरण के लिए 2018 में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि सांसदों और विधायकों के खिलाफ हजारों आपराधिक मामले लंबित थे. लेकिन किसी एक साल में निपटाए गए मामलों की संख्या से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि हर मुकदमे का निपटारा पहले से तेज हो गया है.
इसके लिए यह देखना जरूरी है कि कितने नए मामले दर्ज हुए, कितने पुराने मामले खत्म हुए और औसतन एक मुकदमे में कितना समय लगा.
राहुल गांधी के मामले से क्या समझें?
राहुल गांधी के खिलाफ सुल्तानपुर में दर्ज मानहानि की शिकायत 4 अगस्त 2018 को दाखिल की गई थी. यह मामला कर्नाटक चुनाव के दौरान अमित शाह को लेकर दिए गए बयान से जुड़ा था. शिकायतकर्ता विजय मिश्रा ने आरोप लगाया था कि बयान से मानहानि हुई.
राहुल गांधी ने आरोपों का विरोध किया. मामले में आवाज के नमूने का मिलान कराने की मांग भी उठी थी, लेकिन संबंधित अदालतों ने उस मांग को स्वीकार नहीं किया. 26 अक्टूबर 2026 को सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए अदालत ने राहुल गांधी को बरी कर दिया.
यह फैसला दिखाता है कि एमपी-एमएलए अदालतें राजनीतिक रूप से चर्चित मामलों की सुनवाई भी करती हैं, लेकिन उनका काम राजनीतिक नतीजा देना नहीं, बल्कि कानून के आधार पर निर्णय करना है. ऐसी अदालतों की असली सफलता केवल मुकदमों की संख्या घटाने में नहीं, बल्कि निष्पक्ष सुनवाई, समयबद्ध फैसलों और न्यायिक प्रक्रिया पर जनता का भरोसा बनाए रखने में है.
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