भारत-नीदरलैंड्स आर्थिक रिश्तों को नई मजबूती, व्यापार और निवेश बढ़ाने पर जोर: पीयूष गोयल
नई दिल्ली, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने नीदरलैंड्स के साथ व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को और मजबूत बनाने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई है। अपनी नीदरलैंड्स यात्रा के दौरान उन्होंने समुद्री परिवहन, लॉजिस्टिक्स, सप्लाई चेन और भारतीय समुदाय से जुड़े कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया तथा दोनों देशों के बीच नई आर्थिक संभावनाओं पर चर्चा की।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, अपनी यात्रा के दौरान गोयल ने यूरोप के सबसे बड़े बंदरगाह पोर्ट ऑफ रॉटरडैम का दौरा किया, जहां उनके साथ बंदरगाह के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) बोडेवाइन सीमोंस भी मौजूद थे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि रॉटरडैम यूरोपीय बाजारों तक भारतीय उत्पादों की पहुंच का एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार है और वैश्विक व्यापार तथा आपूर्ति शृंखलाओं में इसकी रणनीतिक भूमिका बेहद अहम है।
गोयल ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच पोर्ट-आधारित विकास, लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार, सप्लाई चेन कनेक्टिविटी को मजबूत करने और व्यापार एवं निवेश के नए अवसरों को बढ़ावा देने पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ। उन्होंने कहा कि भारत अपने बंदरगाहों के आधुनिकीकरण और विश्वस्तरीय समुद्री अवसंरचना के विकास पर तेजी से काम कर रहा है तथा इस क्षेत्र में नीदरलैंड्स की विशेषज्ञता भारत के लिए काफी उपयोगी हो सकती है।
उन्होंने कहा कि भारत और नीदरलैंड्स के बीच समुद्री क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं, विशेष रूप से ऐसे समय में जब भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच रही है।
भारत-ईयू एफटीए लागू होने के बाद भारतीय निर्यातकों के लिए यूरोपीय बाजारों में बड़े अवसर पैदा होंगे। ऐसे में नीदरलैंड्स के अत्याधुनिक बंदरगाह, मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और यूरोप के विभिन्न बाजारों से उसकी उत्कृष्ट कनेक्टिविटी भारत-यूरोप व्यापार को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
बयान में आगे कहा गया है कि अपने दौरे के दौरान गोयल ने एम्स्टर्डम स्थित वाल्डोर्फ एस्टोरिया में भारतीय दूतावास द्वारा आयोजित भारतीय समुदाय के एक कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया, जिसमें लगभग 70 भारतीय मूल के कारोबारी, पेशेवर और सामुदायिक प्रतिनिधि शामिल हुए।
गोयल ने भारतीय समुदाय की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि प्रवासी भारतीय, भारत और नीदरलैंड्स के बीच आर्थिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर बढ़ते संपर्क आर्थिक सहयोग को और मजबूत आधार प्रदान कर रहे हैं।
इस कार्यक्रम के दौरान समुद्री लॉजिस्टिक्स, व्यापार, निवेश और भारत-ईयू एफटीए के संदर्भ में उभरती संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। साथ ही भारत और यूरोप के बीच गहरी आर्थिक एकीकरण प्रक्रिया में नीदरलैंड्स की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया।
--आईएएनएस
डीबीपी
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लगातार पांचवें दिन लाल निशान में बाजार, मिडकैप-स्मॉलकैप शेयर भी टूटे, निवेशकों की बढ़ी चिंता
वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में खुला. यह लगातार पांचवां दिन है जब घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्कों में गिरावट दर्ज की गई है. सेंसेक्स 72,990.04 पर खुला, जो अपने पिछले बंद भाव 73,123.83 से 133.79 अंक यानी 0.18 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है. वहीं निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 22,600.00 से 75.59 अंक यानी 0.33 प्रतिशत लुढ़ककर 22,524.40 पर खुला.
वहीं दिन के कारोबार में सेंसेक्स ने 609.25 अंकों यानी 0.83 प्रतिशत की गिरावट के साथ 72,514.57 का निम्नतम स्तर छुआ, जबकि निफ्टी 50 212.65 अंक या 0.94 प्रतिशत फिसलकर 22387.35 के दिन के निम्नतम स्तर पर पहुंच गया. व्यापक बाजार में निफ्टी मिड-कैप 100 और स्मॉल कैप दोनों में क्रमशः 0.81 प्रतिशत और 0.91 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. वहीं सेक्टरवार देखें तो, एनएसई पर अधिकांश सूचकांकों में गिरावट देखी गई, जिनमें निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी ऑटो, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज और निफ्टी आईटी शीर्ष गिरावट वाले सूचकांक रहे, जिनमें 1 प्रतिशत से ज्यादा तक की गिरावट दर्ज की गई. हालांकि, निजी बैंकिंग शेयरों में कुछ मजबूती देखने को मिली. निफ्टी प्राइवेट बैंक लगभग 0.49 प्रतिशत चढ़ा, जबकि फार्मा और हेल्थकेयर क्षेत्र के शेयरों ने भी अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया और बाजार को कुछ सहारा दिया.
बाजार की दिशा का अंदाजा लगाने के लिए निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 27-28 अक्टूबर को होने वाली नीतिगत बैठक और सितंबर तिमाही के नतीजों पर नजर रखेंगे. व्यापक रूप से यह उम्मीद की जा रही है कि फेड ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा, लेकिन भविष्य की नीतिगत दिशा पर उसका मार्गदर्शन अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड, डॉलर और उभरते बाजारों में विदेशी पोर्टफोलियो प्रवाह को प्रभावित कर सकता है.
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड की कीमतों में हाल के दिनों में मामूली नरमी जरूर आई है, लेकिन वे अब भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं. ऐसे में शेयर बाजार में किसी मजबूत और टिकाऊ तेजी की संभावना फिलहाल सीमित दिखाई देती है. उनका मानना है कि हालिया गिरावट के बाद कई शेयर आकर्षक वैल्यूएशन पर उपलब्ध हुए हैं, लेकिन निवेशकों को कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से जुड़े व्यापक आर्थिक जोखिमों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. विश्लेषकों ने यह भी कहा कि पिछले सप्ताह मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में आई तेज गिरावट का प्रमुख कारण मार्जिन फंडिंग पर आधारित ट्रेडों का अनवाइंड होना रहा. हालांकि इस करेक्शन के बाद कुछ चुनिंदा उच्च-विकास वाले क्षेत्रों में निवेश के नए अवसर उभर सकते हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) थीम में आई ठंडक भारत के लिए अपेक्षाकृत सकारात्मक साबित हो सकती है. हाल के महीनों में दक्षिण कोरिया और ताइवान से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की निकासी भारत की तुलना में अधिक रही है, जो भारतीय बाजार की अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति को दर्शाती है. पिछले कारोबारी सत्र, 23 अक्टूबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 887 करोड़ रुपए के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की थी. वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने लगातार चौथे सत्र भी खरीदारी जारी रखते हुए 3,236 करोड़ रुपए की इक्विटी खरीदी थी.
कमोडिटी बाजार में ब्रेंट क्रूड 2 प्रतिशत से अधिक गिरकर लगभग 114 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया. वहीं अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड भी 2 प्रतिशत से अधिक टूटकर 100.70 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. एशियाई बाजारों में भी निवेशकों का रुख सतर्क रहा। कच्चे तेल की कीमतें छह महीने के उच्च स्तर से नीचे आई हैं, लेकिन निवेशकों की नजर इस सप्ताह होने वाली प्रमुख केंद्रीय बैंकों की बैठकों और कॉरपोरेट नतीजों पर टिकी हुई है. विशेषज्ञों का मानना है कि ये घटनाएं एआई-आधारित बाजार रैली की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं.
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