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जरूरत की खबर- होली की एडवांस तैयारी:आज से ही शुरू करें स्किन केयर रूटीन, ताकि सिंथेटिक रंगों से न हो त्वचा को नुकसान

होली रंग-गुलाल, खुशियों और मौज-मस्ती का त्योहार है। हम कपड़े, पिचकारी और पकवान की तैयारियां तो पहले से कर लेते हैं, लेकिन अक्सर अपनी स्किन को भूल जाते हैं। जबकि केमिकल वाले रंग और धूप स्किन को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए होली पर रंग खेलने से पहले ही स्किन को तैयार करना जरूरी है, ताकि बाद में कोई समस्या न हो। इसलिए आज की जरूरत की खबर में जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. विजय सिंघल, सीनियर कंसल्टेंट, डर्मेटोलॉजी, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली सवाल- होली से 4-5 दिन पहले स्किन केयर रूटीन शुरू करना क्यों जरूरी है? जवाब- स्किन को अपनी प्रोटेक्टिव लेयर मजबूत करने और हाइड्रेशन को बैलेंस करने के लिए समय चाहिए। अगर पहले से स्किन केयर रूटीन फॉलो किया जाए तो स्किन कम सेंसिटिव और कम रिएक्टिव रहती है। इससे रंगों के केमिकल और धूप से होने वाली जलन, रैशेज या पिग्मेंटेशन का जोखिम घटता है। अचानक होली के एक दिन पहले तैयारी करने की बजाय कुछ दिन पहले से ‘प्रोटेक्ट मोड’ में रहना स्किन को ज्यादा सुरक्षित बनाता है। सवाल- स्किन बैरियर क्या होता है? जवाब- स्किन की सबसे ऊपरी लेयर बैरियर की तरह काम करती है। ये स्किन को किसी भी तरह के बाहरी नुकसान से बचाती है और अंदर की नमी को लॉक रखती है। इसे ऐसे समझिए- स्किन की सेल्स ‘ईंट’ हैं और उनके बीच मौजूद लिपिड (जैसे सेरामाइड) ‘सीमेंट’ का काम करते हैं। यही स्ट्रक्चर धूल, बैक्टीरिया, केमिकल, प्रदूषण और एलर्जेन्स को अंदर जाने से रोकता है। स्किन बैरियर कमजोर होने पर स्किन में ड्राईनेस, जलन, रेडनेस, पिंपल या पिग्मेंटेशन की समस्या बढ़ सकती है। सवाल- होली के रंग स्किन बैरियर को कैसे डैमेज करते हैं? जवाब- होली के रंग स्किन बैरियर को तीन तरीकों से नुकसान पहुंचा सकते हैं- आइए, अब इन कारकों को विस्तार से समझते हैं। केमिकल इरिटेशन कई सस्ते रंगों में सिंथेटिक डाई, मेटल सॉल्ट्स या इंडस्ट्रियल पिगमेंट मिलाए जाते हैं। ये स्किन की ऊपरी लेयर के लिपिड को प्रभावित कर सकते हैं। इससे बैरियर कमजोर होता है और जलन/लालिमा बढ़ती है। रंग छुड़ाते समय असावधानी रंग छुड़ाते समय जोर से स्क्रब करना या तौलिए से रगड़ना माइक्रो-टियर (स्किन की ऊपरी लेयर में बनने वाला बहुत बारीक स्क्रैच) बना सकता है। इससे मॉइश्चर कम होता है और स्किन ज्यादा सेंसिटिव हो जाती है। धूप का असर होली अक्सर खुले में खेली जाती है। UV (अल्ट्रावॉयलेट) किरणों का एक्सपोजर बैरियर को और कमजोर करता है। सवाल- होली के पहले स्किन केयर रूटीन कैसा होना चाहिए? जवाब- धूप और बार-बार रगड़ से स्किन बैरियर कमजोर हो सकता है। इसलिए आखिरी दिन हड़बड़ी में तैयारी करने की बजाय, 5–6 दिन पहले से एक प्लान्ड स्किन केयर रूटीन शुरू करना जरूरी है। ग्राफिक से समझते हैं कि होली के पहले स्किन केयर रूटीन कैसा होना चाहिए- सवाल- क्या अलग-अलग स्किन टाइप के लिए अलग-अलग स्किन केयर रूटीन जरूरी है? जवाब- हां, हर स्किन टाइप की जरूरत अलग होती है। पॉइंटर्स से समझते हैं- सवाल- क्या होली से पहले केमिकल पील, वैक्सिंग या लेजर ट्रीटमेंट करवाना सुरक्षित है? जवाब- नहीं, इन प्रक्रियाओं के बाद स्किन कुछ दिनों तक थिन, सेंसिटिव और इंफ्लेमेशन-प्रोन हो जाती है। ऐसे में रंगों के केमिकल, धूप और रगड़ से जलन, रैशेज या पिग्मेंटेशन बढ़ने का खतरा रहता है। केमिकल पील और लेजर के बाद सन-सेंसिटिविटी बढ़ती है। इसलिए इन्हें होली से कम-से-कम 2-3 हफ्ते पहले या फिर त्योहार के बाद करवाना बेहतर है। सवाल- क्या डाइट का भी स्किन पर असर पड़ता है? होली से पहले क्या खाएं ताकि स्किन कलर डैमेज कम हो और स्किन ग्लो करे? जवाब- हां, होली से पहले संतुलित और सही खानपान स्किन बैरियर को मजबूत करता है, स्किन इरिटेशन से बचाता है और नेचुरल ग्लो लाने में मदद करता है। सवाल- अगर स्किन सेंसिटिव है या पहले से एक्ने/पिग्मेंटेशन है तो क्या सावधानियां रखें? जवाब- होली से पहले स्किन को 'कूलिंग मोड' में रखें यानी स्किन को ऐसे फेज में रखें, जहां- इसके लिए ग्राफिक में देखें कि आपको क्या करना चाहिए- होली के बाद अगर स्किन में जलन या लालिमा हो तो एलोवेरा या सूदिंग जेल लगाएं। पिग्मेंटेशन-प्रोन स्किन में अगले कुछ दिनों तक धूप से खास बचाव करें, क्योंकि इंफ्लेमेशन के बाद दाग गहरे हो सकते हैं। अगर सूजन, तेज खुजली, पस वाले दाने हों या स्किन छिलने लगे तो डर्मेटोलॉजिस्ट से तुरंत संपर्क करें। सवाल- होली के बाद अगर रैशेज, जलन या एलर्जी हो जाए तो तुरंत क्या करें और कब डॉक्टर से मिलें? जवाब- पॉइंटर्स से समझते हैं- सवाल- होली के बाद कितने दिनों तक स्किन को एक्स्ट्रा केयर की जरूरत होती है? जवाब- होली में स्किन को रंगों से हुए नुकसान से उबरने के लिए लगभग 7 से 10 दिनों तक एक्स्ट्रा केयर (जैसे माइल्ड क्लींजर, हैवी मॉइश्चराइजर और सनस्क्रीन) की जरूरत होती है। इस दौरान स्किन को हाइड्रेट रखना, स्क्रब से बचना और देखभाल करना जरूरी है। सवाल- क्या घर पर बने उबटन या बेसन से रंग छुड़ाना सुरक्षित है? जवाब- हां, आमतौर पर ये सुरक्षित है। यह स्किन को नुकसान नहीं पहुंचाते और पक्का रंग, टैनिंग और इंप्योरिटीज को हटाने में मदद करते हैं। साथ ही स्किन को नमी व पोषण देते हैं। ध्यान रहे, इन्हें चेहरे पर जोर से न रगड़ें। ऐसा करने से स्किन में माइक्रो-इन्फ्लेमेशन, ड्राईनेस या पिग्मेंटेशन बढ़ सकता है। ……………………………. जरूरत की ये खबर भी पढ़ें… जरूरत की खबर- चाहिए चमकदार त्वचा तो खाएं विटामिन–C:इसकी कमी से होते 9 स्किन डैमेज, डाइट में शामिल करें ये हेल्दी फूड विटामिन C एक ऐसा जरूरी विटामिन है, जो हमारे शरीर के कई अहम कामों में बड़ी भूमिका निभाता है। इसे ‘एसेंशियल न्यूट्रिएंट’ कहा जाता है। शरीर इसे खुद नहीं बनाता बल्कि हमें इसे फूड के जरिए ही लेना पड़ता है। हाल के सालों में विटामिन C की पहचान सिर्फ सेहत तक सीमित नहीं रही है। पूरी खबर पढ़ें…

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पेरेंटिंग- क्या बच्चे को ट्यूशन पढ़ाना जरूरी है:उसके साथ के सारे बच्चे ट्यूशन जाते हैं, कहीं वो लेफ्ट-आउट तो नहीं फील करेगा

सवाल- मैं बनारस से हूं। मेरा 12 साल का बेटा छठवीं क्लास में पढ़ता है। वह पढ़ाई में काफी अच्छा है। टीचर्स भी तारीफ करते हैं। कुल मिलाकर अभी तक उसकी पढ़ाई को लेकर कोई चिंता नहीं है। लेकिन उसके सभी दोस्त ट्यूशन लेते हैं। क्लास के बाकी सारे बच्चे भी ट्यूशन जाते हैं। कहीं वो लेफ्ट–आउट तो नहीं फील करेगा? रिश्तेदारों, पड़ोसियों से भी अक्सर सुनने को मिलता है, “बच्चे को ट्यूशन भेजना बहुत जरूरी है।” क्या मुझे भी बेटे को ट्यूशन भेजना चाहिए? डर है कि कहीं वह पीछे न रह जाए। कृपया गाइड करें। एक्सपर्ट: डॉ. अमिता श्रृंगी, साइकोलॉजिस्ट, फैमिली एंड चाइल्ड काउंसलर, जयपुर जवाब- आपने जो सवाल पूछा है, वह आजकल लगभग सभी पेरेंट्स के मन में होता है। ऐसे में आपका डर भी स्वाभाविक है, लेकिन फैसला डर के आधार पर नहीं, बल्कि बच्चे की जरूरत के आधार पर होना चाहिए। जैसा कि आपने बताया कि आपका बच्चा पढ़ने में अच्छा है। होमवर्क समय पर कर लेता है और टीचर्स भी उसे एप्रिशिएट करते हैं। इसलिए फिलहाल उसे ट्यूशन दिलाने का विचार शायद ठीक नहीं होगा। यह तर्क कि ‘’सभी बच्चे ट्यूशन जा रहे हैं तो मुझे भी अपने बेटे को भेजना चाहिए,’’ सही नहीं है, क्योंकि हर बच्चा अलग होता है। कुछ बच्चों को जरूरत होती है, लेकिन कुछ एक्स्ट्रा सपोर्ट की जरूरत हो सकती है तो कुछ बच्चों के लिए क्लास में पढ़ाया जा रहा पाठ ही काफी होता है। ट्यूशन की जरूरत बच्चे की क्षमता से तय होनी चाहिए, न कि किसी को देखकर। सेल्फ कॉन्फिडेंस है ‘सफलता की कुंजी’ आपके सवाल से ऐसा लग रहा है कि आपका बेटा पढ़ने में काफी अच्छा है। यह अपने-आप में बहुत अच्छी बात है। ट्यूशन के बिना बच्चा अच्छा परफॉर्म कर रहा है, टीचर भी उसकी तारीफ कर रहे हैं, इसका मतलब है कि- ऐसे में अगर बच्चे पर जबरदस्ती ट्यूशन थोपा जाता है तो वह इससे परेशान हो सकता है। कई बार ट्यूशन बच्चों पर अनजाने में प्रेशर बनाता है। इससे फायदे की बजाय नुकसान हो सकता है। इसे ग्राफिक में देखिए- सेल्फ लर्निंग के फायदे जब बच्चा खुद से पढ़ने-समझने की कोशिश करता है तो उसमें सोचने और निर्णय लेने की क्षमता भी विकसित होती है। सेल्फ लर्निंग का सबसे बड़ा फायदा है कि बच्चे दूसरों पर निर्भर नहीं रहते हैं। इससे पढ़ाई उनके लिए बोझ नहीं, बल्कि एक स्वाभाविक प्रक्रिया बन जाती है। सेल्फ लर्निंग से बच्चों को कई फायदे मिलते हैं। ग्राफिक में देखिए- बच्चे को कब दिलाएं ट्यूशन? बच्चों को ट्यूशन की जरूरत तब होती है, जब बच्चा पढ़ाई में स्ट्रगल कर रहा हो या उसे सही दिशा और अतिरिक्त मार्गदर्शन की जरूरत हो। कभी भी जबरदस्ती या देखा-देखी में ट्यूशन नहीं लगाना चाहिए। कुछ ऐसे संकेत हैं, जिनसे ये समझा जा सकता है कि बच्चे को ट्यूशन की जरूरत है। ग्राफिक में देखिए- पेरेंट्स के लिए सुझाव पेरेंटिंग में माता-पिता को कुछ बातों का खास ख्याल रखना चाहिए। जैसेकि- अंत में यही कहूंगी कि आपका बेटा होनहार है। ऐसे में उसे दूसरों की देखादेखी ‘ट्यूशन की बैसाखी’ देने की जरूरत नहीं है। उसे अपनी उड़ान खुद भरने दें। रिश्तेदारों या पड़ोसियों की बातों से ज्यादा जरूरी है कि आप बच्चे की मानसिक स्थिति, आत्मविश्वास और वास्तविक जरूरत को समझें। याद रखें, ट्यूशन कोई स्टेटस सिंबल नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर लिया जाने वाला सहारा है। सही समय और सही वजह से लिया गया फैसला ही बच्चे के भविष्य को मजबूत बनाता है। ………………… पेरेंटिंग की ये खबर भी पढ़िए पेरेंटिंग- बेटी इंस्टा पर अकाउंट बनाना चाहती है: कहती है, 'सब दोस्तों का है, मेरा क्यों नहीं?' उसे ऑनलाइन दुनिया के खतरे कैसे समझाऊं आपका डर जायज है, लेकिन सोशल मीडिया पर पूरी तरह पाबंदी लगाना ठीक नहीं है। इससे बच्चों की जिज्ञासा बढ़ जाती है और वे इसे चोरी-छिपे इस्तेमाल करने लगते हैं। इसलिए 'पाबंदी' लगाने की बजाय आपको उसे सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में बताना चाहिए। साथ ही इसके खतरों के बारे में भी। पूरी खबर पढ़िए…

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Ranji Trophy Final: प्रसिद्ध कृष्णा ने कर्नाटक को दिलाई राहत, J&K के इतने बल्लेबाजों को किया ढेर

इस फाइनल में पहले बैटिंग कर रही जम्मू-कश्मीर ने कर्नाटक के गेंदबाजों को खूब थकाया और करीब सवा दो दिन तक बल्लेबाजी करते हुए लगभग 600 रन का स्कोर खड़ा किया. कर्नाटक के लिए सिर्फ प्रसिद्ध कृष्णा की कुछ असर डाल सके. Thu, 26 Feb 2026 11:46:16 +0530

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