SL vs NZ: मेजबान श्रीलंका टी20 वर्ल्ड कप 2026 से बाहर, न्यूजीलैंड ने सुपर-8 में 61 रनों से हराया
SL vs NZ: श्रीलंका की टीम टी20 वर्ल्ड कप 2026 से बाहर हो गई है. मेजबान श्रीलंका को सुपर-8 के दूसरे मैच में न्यूजीलैंड ने 61 रनों से हरा दिया है. इससे पहले सुपर-8 के पहले मैच में इंग्लैंड ने श्रीलंका को हराया था. इन 2 हार के बाद श्रीलंकाई टीम टूर्नामेंट से बाहर हो गई है. कोलंबो में खेले गए इस मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड ने 168 रन बनाए थे. जवाब में श्रीलंका 8 विकेट पर 107 रन ही बना सकी.
श्रीलंका शुरुआत रही थी खराब
न्यूजीलैंड के दिए 169 रनों की लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंका की टीम की भी शुरुआत बहुत खराब रही. श्रीलंका ने 77 रन के स्को पर 7 विकेट गंवा दिए. पथुम निसांका पारी की पहली ही गेंद पर आउट हो गए. इसके बाद चरित असलंका 5 रन बनाकर चलते बने. फिर कुसल मेंडिस 22 गेंद पर सिर्फ 11 रन बनाकर पवेलियन लौटे.
श्रीलंकाई बल्लेबाजों का निराशाजनक प्रदर्शन
इसके बाद पवन रथनायके भी 18 गेंद पर सिर्फ 10 रन बनाकर आउट हो गए. कप्तान दासुन शनाका के रूप में श्रीलंका ने पांचवा विकेट 45 रन के स्कोर पर गंवा दिया. दासुन शनाका सिर्फ 3 रन बनाकर चलते बने. इसके बाद दुशान हेमंथा भी सिर्फ 3 रन बनाकर चलते बने, फिर कुसल मेंडिस 23 गेंद पर 31 रन बनाकर आउट हुए. इसके बाद डुनिथ वेललेज ने पारी को संभालने की कोशिश जरूर की, लेकिन मैच हाथ से निकल चुका था. डुनिथ वेललेज 29 रन बनाए. श्रीलंका की टीम 20 ओवर में 8 विकेट पर 107 रन ही बना सकी.
रचिन रवींद्र ने चटकाए 4 विकेट
न्यूजीलैंड के लिए रचिन रवींद्र ने 4 विकेट लिए. मैट हैनरी ने 2 विकेट चटकाए. जबकि कप्तान मिचेल सैंटनर और ग्लेन फिलिप्स को 1-1 सफलता मिली.
ऐसी रही न्यूजीलैंड की बल्लेबाजी
टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड ने 7 विकेट पर 169 रनों स्कोर बनाया, लेकिन कीवी टीम ने भी 84 रन के स्कोर पर 6 विकेट गंवा दिए थे, लेकिन कप्तान मिचेल सैंटनर और कोल मैककॉन्ची ने पारी को संभाला और 84 रनों की साझेदारी कर 168 तक पहुंचाया. मिचेल सैंटनर 26 गेंद पर 47 रन बनाए. रचिन रविंद्र 22 गेंद पर 32 रन बनाए. जबकि कोल मैककॉन्ची 23 गेंद पर नाबाद 31 रन बनाए. वहीं फिल एलन ने 23 रनों का योगदान दिया. श्रीलंका के लिए दुष्मंथा चमीरा और महीश थीक्षाना ने 3-3 विकेट लिए. जबकि डुनिथ वेललेज को एक सफलता मिली.
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हमास हमले के पीड़ितों के प्रति संवेदना, गाजा शांति पहल को भारत का समर्थन : इजरायल की संसद में बोले पीएम मोदी
तेल अवीव, 25 फरवरी (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि भारत ने भी लंबे समय तक आतंकवाद का दर्द झेला है। उन्होंने कहा कि वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत पूरी मजबूती और विश्वास के साथ इजराइल के साथ खड़ा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “मैं भारत के लोगों की ओर से 7 अक्टूबर को हमास के बर्बर आतंकी हमले में जान गंवाने वालों और प्रभावित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना लेकर आया हूं। हम आपका दर्द समझते हैं, आपके दुख में शामिल हैं। भारत इस कठिन समय में और आगे भी पूरे विश्वास के साथ खड़ा है। इजरायल ने भी लंबे समय तक आतंकवाद का दर्द झेला है।”
उन्होंने यह बात इजरायल की संसद में अपने ऐतिहासिक संबोधन के दौरान कही। किसी भारतीय प्रधानमंत्री का यह पहला संबोधन था। पीएम मोदी के भाषण के दौरान सांसदों ने कई बार तालियां बजाकर सराहना की।
अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा समर्थित गाजा शांति पहल एक रास्ता दिखाती है। उन्होंने कहा, “उम्मीद को बनाए रखना जरूरी है। गाजा शांति पहल, जिसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने समर्थन दिया है, एक समाधान का रास्ता देती है। भारत ने इस पहल का स्पष्ट समर्थन किया है। हमारा मानना है कि इससे क्षेत्र के सभी लोगों के लिए, फिलिस्तीन मुद्दे सहित, न्यायपूर्ण और स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। हमारे सभी प्रयास बुद्धिमत्ता, साहस और मानवता से प्रेरित होने चाहिए।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि वे फिर से इजरायल आकर बेहद खुश हैं और उन्हें इस भूमि से हमेशा विशेष लगाव रहा है।
उन्होंने कहा, “मैं 1.4 अरब भारतीयों की शुभकामनाएं और मित्रता, सम्मान और साझेदारी का संदेश लेकर आया हूं।” उन्होंने यह भी बताया कि उनका जन्म 17 सितंबर 1950 को हुआ था, उसी दिन जब भारत ने औपचारिक रूप से इजरायल को मान्यता दी थी।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने होलोकॉस्ट को मानव इतिहास के सबसे अंधकारमय अध्यायों में से एक बताया।
उन्होंने कहा, “उन कठिन वर्षों में भी मानवता के कुछ उदाहरण सामने आए। गुजरात के नवानगर के महाराजा, जिन्हें जाम साहब के नाम से भी जाना जाता है, उन्होंने पोलैंड के बच्चों को शरण दी, जिनमें यहूदी बच्चे भी शामिल थे। जब उनके पास जाने के लिए कोई जगह नहीं थी तो उन्होंने मदद की थी।”
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत में यहूदी समुदाय बिना किसी उत्पीड़न या भेदभाव के डर के साथ रहता आया है।
उन्होंने कहा, “उन्होंने (यहूदी) अपनी आस्था को सुरक्षित रखा और समाज में पूरी तरह भागीदारी की।”
इससे पहले, इजरायल की संसद में प्रधानमंत्री मोदी का जोरदार स्वागत किया गया। सभी सदस्य खड़े होकर तालियां बजा रहे थे और पूरा सदन “मोदी, मोदी” के नारों से गूंज उठा।
स्पीकर अमीर ओहाना ने हिंदी में कहा, “मिस्टर प्राइम मिनिस्टर, जेरूसलम में आपका स्वागत है, केसेट में आपका स्वागत है।”
--आईएएनएस
एएमटी/एमएस
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