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"7 अक्टूबर का हमला बर्बर था, भारत आपके दुख में साथ है"- पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को इजरायल की संसद 'नेसेट' में एक ऐतिहासिक और प्रभावशाली भाषण दिया. उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत और इजरायल दोनों ही आतंकवाद के खिलाफ एक जैसी और बिना किसी समझौते वाली नीति रखते हैं.
26/11 और 7 अक्टूबर का दर्द एक जैसा
पीएम मोदी ने 7 अक्टूबर के हमलों की निंदा करते हुए कहा, "मैं उन परिवारों के लिए भारत के लोगों की गहरी संवेदनाएं लाया हूं, जिनका संसार उजड़ गया. हम आपका दर्द समझते हैं." उन्होंने आगे 26/11 के मुंबई हमलों को याद करते हुए कहा कि भारत ने लंबे समय तक आतंकवाद का दंश झेला है.उन्होंने याद दिलाया कि मुंबई हमलों में इजरायली नागरिक भी मारे गए थे, जो दोनों देशों के साझा दर्द को दर्शाता है.
आतंकवाद पर 'जीरो टॉलरेंस'
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि किसी भी मकसद के लिए मासूम नागरिकों की हत्या को सही नहीं ठहराया जा सकता. उन्होंने कहा, "आतंकवाद का लक्ष्य समाजों को अस्थिर करना और विकास को रोकना है. इसके खिलाफ दुनिया को एकजुट होकर काम करना होगा क्योंकि कहीं भी फैला आतंक पूरी दुनिया की शांति के लिए खतरा है."
'फौलादी गठबंधन' की तैयारी
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मोदी के दौरे को लेकर भावुक होते हुए उन्हें अपना 'भाई' बताया. नेतन्याहू ने कहा कि भारत और इजरायल कट्टरवाद के खिलाफ एक 'फौलादी गठबंधन' (Iron Alliance) बनाएंगे. उन्होंने मोदी को इजरायल का महान मित्र और वैश्विक मंच का एक बड़ा नेता करार दिया.
शांति के लिए बातचीत का समर्थन
पीएम मोदी ने केवल युद्ध और संघर्ष की ही बात नहीं की, बल्कि उन्होंने गाजा शांति पहल का भी समर्थन किया. उन्होंने कहा कि हालांकि शांति का रास्ता आसान नहीं है, लेकिन भारत इस क्षेत्र में स्थिरता और बातचीत के लिए दुनिया के साथ खड़ा है. नेसेट के स्पीकर अमीर ओहाना ने भी पीएम मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि 7 अक्टूबर के नरसंहार के बाद मोदी उन पहले नेताओं में से थे जिन्होंने बिना झिझक इजरायल का साथ दिया.
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