गोरखमुंडी के फायदे : सिरदर्द से किडनी स्टोन तक का करे असरदार प्राकृतिक इलाज
नई दिल्ली, 25 फरवरी (आईएएनएस)। आज के समय में एलोपैथिक दवाओं का सेवन इतना ज्यादा बढ़ गया है कि ज्यादातर लोग, खासकर युवा पीढ़ी, प्राकृतिक तौर पर मौजूद जड़ी-बूटियों का उपयोग और लाभ लगभग भूल चुकी हैं।
आधुनिक दवाएं शरीर को तुरंत राहत पहुंचाती हैं, लेकिन इनके कई नकारात्मक प्रभाव भी हो सकते हैं। वहीं, प्राकृतिक जड़ी-बूटियां से राहत भले ही धीरे-धीरे मिलती है, लेकिन ये सस्ती होने के साथ कम हानिकारक होती हैं। उन्हीं जड़ी-बूटियों में से एक गोरखमुंडी है। गोरखमुंडी एक अत्यंत महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है, जिसके पौधे के लगभग पूरे हिस्से, फूल, पत्ते, जड़, और तना में औषधीय गुण पाए जाते हैं।
गोरखमुंडी का इस्तेमाल शरीर से संबंधित कई प्रकार की समस्याओं को ठीक करने के लिए किया जाता है। गोरखमुंडी मुख्य रूप से चर्म रोगों, पाचन समस्याओं, किडनी की पथरी, आंखों से जुड़ी समस्या, सूजन, सिरदर्द और खून साफ करने में फायदेमंद है।
गोरखमुंडी के एंटी-बैक्टीरियल गुण त्वचा रोग, गैस और यूरिन इन्फेक्शन में राहत पहुंचाता है। वहीं, गोरखमुंडी के पत्तों का लेप स्किन से जुड़ी समस्या जैसे खुजली और पुराने घावों को ठीक करने में मदद करता है।
इस जड़ी-बूटी के उपयोग से अपच, पेट दर्द और दस्त जैसी समस्या में राहत मिलती है। गोरखमुंडी में खून को साफ करने का भी गुण होता है, इसलिए इसके इस्तेमाल से बॉडी डिटॉक्स होता है। यह शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालकर रक्त को साफ करती है।
गोरखमुंडी का सेवन करने से किडनी की पथरी और पेशाब से जुड़ी समस्याओं में भी राहत मिलती है। इससे दर्द और सूजन जैसी समस्याएं कम होती हैं। इसके इस्तेमाल से जोड़ों के दर्द, सूजन और सिरदर्द में राहत मिलती है।
गोरखमुंडी के पत्तों के रस का उपयोग आंखों की जलन और शरीर की कमजोरी को दूर करने के लिए किया जाता है। हालांकि, इस जड़ी-बूटी का बहुत अधिक मात्रा में सेवन करने से पेट में जलन हो सकती है। वहीं, किसी गंभीर बीमारी के दौरान इसका उपयोग करने से पहले एक बार डॉक्टर से राय जरूर से लेनी चाहिए। इसी के साथ गर्भवती महिलाओं को इसके सेवन से बचना चाहिए।
--आईएएनएस
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मेट्रो और रैपिड रेल में क्या है अंतर? जानें कौन सी ट्रेन आपके सफर के लिए है बेस्ट
भारत में आजकल रेल सफर की तस्वीर बदल रही है. शहरों में मेट्रो के जाल के बाद अब 'नमो भारत' जैसी रैपिड रेल पटरियों पर दौड़ने लगी है. पहली बार देखने में ये दोनों ट्रेनें भले ही एक जैसी लगें, लेकिन इनके काम करने का तरीका और मकसद पूरी तरह अलग है.
1. रफ़्तार का बड़ा अंतर
मेट्रो ट्रेनें मुख्य रूप से शहर के अंदर चलती हैं और इनकी रफ़्तार आमतौर पर 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा होती है. वहीं, नमो भारत जैसी रैपिड रेल (RRTS) सेमी-हाई-स्पीड ट्रेनें हैं, जो 160 से 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से दौड़ सकती हैं.
2. सफर की दूरी और स्टेशन
मेट्रो का इस्तेमाल शहर के भीतर छोटी दूरियों के लिए किया जाता है, जहाँ स्टेशन बहुत पास-पास (लगभग हर 1-2 किलोमीटर पर) होते हैं. इसके उलट, रैपिड रेल दो अलग-अलग शहरों (जैसे दिल्ली और मेरठ) को जोड़ने के लिए है. ये ट्रेनें 100 से 250 किलोमीटर तक का सफर तय करती हैं और इनके स्टेशन मेट्रो के मुकाबले काफी दूर-दूर होते हैं.
3. बैठने और खड़े होने की जगह
मेट्रो में खड़े होकर यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए ज्यादा जगह होती है क्योंकि यहाँ लोग कम समय के लिए सवार होते हैं. लेकिन रैपिड रेल में लंबी दूरी का सफर होने की वजह से बैठने पर ज्यादा ध्यान दिया गया है. इसमें आरामदेह 'रिक्लाइनिंग' सीटें होती हैं जिन्हें आप पीछे झुका सकते हैं.
4. कोच और प्रीमियम सुविधाएं
मेट्रो में आमतौर पर 6 से 8 कोच होते हैं और सभी कोच एक जैसे होते हैं. रैपिड रेल में शुरू में 3 से 6 कोच होते हैं और इसमें एक 'प्रीमियम कोच' की सुविधा भी दी गई है. साथ ही, रैपिड रेल में यात्रियों को वाई-फाई (Wi-Fi), मोबाइल चार्जिंग पॉइंट और सामान रखने के लिए अलग से जगह जैसी आधुनिक सुविधाएं मिलती हैं, जो किसी लग्जरी ट्रेन जैसी लगती हैं.
5. मकसद अलग-अलग
सीधे शब्दों में कहें तो मेट्रो शहर की भीड़भाड़ और ट्रैफिक से बचाने का एक पर्यावरण अनुकूल जरिया है. वहीं, रैपिड रेल का मकसद दो शहरों के बीच लगने वाले घंटों के सफर को मिनटों में बदलना है.
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