SC Hearing on Student Protests: 'कल जेनरेशन अल्फा, बीटा आ जाएगी'- वकील के इस दलील पर क्या बोले CJI सूर्य कांत?
देश की सबसे बड़ी अदालत में इन दिनों एक ऐसा संवेदनशील और दूरगामी सवाल खड़ा हो गया है, जो आने वाली कई पीढ़ियों के आंदोलनों की दिशा तय कर सकता है। मामला सिर्फ छात्र प्रदर्शनों में दर्ज मुकदमों को वापस लेने का नहीं है, बल्कि उस कानूनी और नैतिक लकीर का है, जिसे राजनीतिक फैसलों के नाम पर धुंधला किया जा रहा है।
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में जब यह बहस छिड़ी कि क्या सियासी समझौतों के तहत विरोध और प्रदर्शन के मामलों को माफ कर देना चाहिए, तो अदालत के भीतर वकीलों के तीखे तर्कों ने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया कि यदि आज व्यवस्था झुकी, तो कल इसके परिणाम क्या होंगे।
याचिकाकर्ता की दलील: भविष्य के आंदोलनों के लिए बनेगी खतरनाक मिसाल
याचिकाकर्ता मनीष कुमार सोलंकी की ओर से पेश वकील रिजवान अहमद ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि यह प्रदर्शन मंत्री और पुलिस की जवाबदेही को लेकर था, जिसे स्वीकार किया गया है, लेकिन 15 दिन बीत जाने के बाद इन तथाकथित आयोजकों की जवाबदेही क्या है? उन्होंने 'कॉकरोच जनता पार्टी' का जिक्र करते हुए कहा कि यह कोई पंजीकृत संगठन नहीं है, जिसने नीट 2026 पेपर लीक के विरोध में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ प्रदर्शन का आह्वान किया था।
वकील की चेतावनी: 'कल जेनरेशन अल्फा, बीटा आएगी और संसद तक पहुंच जाएंगे समूह'
वकील ने कड़ी चेतावनी देते हुए दलील दी कि यदि राजनीतिक समझौते के तहत ऐसे मामलों को माफ किया गया, तो यह भविष्य के आंदोलनों के लिए एक खतरनाक मिसाल बन जाएगा। "कल जेनरेशन अल्फा, बीटा, डेल्टा आएगी... किसान शंभू बॉर्डर से ट्रैक्टर लेकर संसद आ जाएंगे और शाहीन बाग के लोग भी संसद पहुंच जाएंगे।" उन्होंने स्पष्ट किया कि वे छात्रों को भारी सजा देने की मांग नहीं कर रहे हैं, जो नाबालिग हैं उनसे सामुदायिक सेवा कराई जा सकती है, लेकिन पथराव या हिंसा करने वालों को सिर्फ इसलिए नहीं छोड़ा जा सकता क्योंकि सरकार की गलती सामने आ गई थी।
सीजेआई सूर्य कांत का बयान: युवाओं के साथ सख्ती नहीं, संयम और संवाद की जरूरत
इस संवेदनशील मामले पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहन की बेंच ने स्थिति को बेहद नाजुक बताया। सीजेआई सूर्य कांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इस स्थिति को बहुत सावधानी से संभालने की जरूरत है क्योंकि यह देश के युवाओं से जुड़ा मामला है। युवाओं को यह भरोसा दिलाना होगा कि उनकी बात सुनी जा रही है।
उन्होंने कहा कि पुलिस को भी बहुत संयम बरतना चाहिए ताकि यदि कोई अप्रिय घटना हो भी जाए, तो हालात नियंत्रण से बाहर न जाएं। अदालत ने साफ किया कि ताकतवर राज्य की ओर से किसी भी तरह की आक्रामक कार्रवाई हालात को और बिगाड़ सकती है, इसलिए बेहतर तरीका यही है कि युवाओं को प्यार से समझाया जाए। इसके बाद बेंच ने इस मामले को पहले से लंबित अन्य संबंधित मामलों के साथ संलग्न कर दिया।
Monsoon Tips : बारिश के मौसम में AC की हवा स्किन की दुशमन, थोड़ी सी चूक बढ़ा देगी खुजली, जानिए बचाव
Monsoon Health Tips : क्या आप भी बारिश के मौसम में एसी चलाकर रखते हैं. यह आदत आपकी त्वचा के लिए घातक हो सकती है. बाहर की नमी और अंदर की ठंडी-सूखी हवा का लगातार असर त्वचा का प्राकृतिक संतुलन बिगाड़ देता है. गाजियाबाद की त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. दिव्या द्विवेदी लोकल 18 से बताती हैं कि लंबे समय तक एसी में रहने से त्वचा की नमी धीरे-धीरे कम होने लगती है. जो लोग ऑफिस में कई घंटे एसी में काम करते हैं या घर पर लगातार एसी चलाकर बैठते हैं, उन्हें इस मौसम में सावधान रहने की जरूरत है. डॉ. दिव्या के मुताबिक, एसी का तापमान भी बहुत कम नहीं रखना चाहिए. दिन में कम से कम दो बार अच्छे साबुन से स्नान करें. चेहरे को भी दिन में दो-तीन बार साफ पानी से धोते रहें.
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