Stock Market: 700 अंक फिसला सेंसेक्स, 25,500 के नीचे बंद हुआ निफ्टी; बाजार में गिरावट की 3 बड़ी वजहें
Stock Market: शेयर बाजार में बुधवार को दिन भर उतार-चढ़ाव का खेल चलता रहा। सुबह की तेज रफ्तार दोपहर तक आते-आते धीमी पड़ गई और आखिर में मुनाफावसूली ने बाजार की चमक फीकी कर दी। दिन के उच्च स्तर से सेंसेक्स करीब 700 अंक टूट गया। हालांकि अंत में मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ।
बीएसई सेंसेक्स 50.15 अंक यानी 0.06% की हल्की बढ़त के साथ 82276.07 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी-50 57.85 अंक या 0.23% चढ़कर 25482.50 पर बंद हुआ। दिलचस्प बात यह रही कि निफ्टी 25500 के मनोवैज्ञानिक स्तर के नीचे ही ठहरा। दिन में सेंसेक्स 82957.91 और निफ्टी 25652 तक पहुंचा था। बाजार में 1966 शेयर चढ़े, 2,064 गिरे और 161 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।
किन शेयरों में रही हलचल?
बजाज ऑटो करीब 3% चढ़कर निफ्टी का टॉप गेनर रहा। इसके अलावा टाटा स्टील, एससीएल टेक्नोलॉजी और श्रीराम फाइनेंस 2 फीसदी से ज्यादा उछले। आईटी शेयरों में भी मजबूती दिखी। टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो और टेक महिंद्रा करीब 1 फीसदी ऊपर रहे। ऑटो सेक्टर में महिंद्रा एंड महिंद्रा, मारुति सुजुकी इंडिया, टाटा मोटर्स और आइशर मोटर्स में 1-2 फीसदी की तेजी दिखी।
वहीं दूसरी तरफ आईटीसी, कोटक महिंद्रा बैंक और टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स 1 फीसदी से ज्यादा टूटे। बजाज फाइनेंस, भारती एयरटेल, अल्ट्राटेक सीमेंट और ओएनजीसी में भी कमजोरी रही।
शेयर बाजार में क्यों गिरावट आई?
मुनाफावसूली: सुबह बाजार करीब 0.9% चढ़ा था, लेकिन ऊंचे स्तर पर निवेशकों ने मुनाफा काटना शुरू कर दिया। यही वजह रही कि दिन के उच्च स्तर से बाजार तेजी से फिसला।
एफआईआई की बिकवाली: 24 फरवरी को विदेशी संस्थागत निवेशक 102 करोड़ रुपये के शुद्ध बिकवाल रहे। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 3161 करोड़ रुपये की खरीद कर बाजार को सहारा दिया।
तकनीकी स्तर का दबाव: निफ्टी 25670 के ऊपर टिक नहीं पाया। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि 25800 के ऊपर मजबूत ब्रेकआउट आने पर ही रुझान साफ होगा। वहीं 25300 और सेंसेक्स के लिए 82000 का स्तर बेहद अहम माना जा रहा है। इसके नीचे की फिसलन तेज हो सकती है। कुल मिलाकर बाजार की चाल अभी भी अस्थिर है। ऐसे में निवेशकों को स्तर देखकर ही कदम बढ़ाने की सलाह दी जा रही है।
(प्रियंका कुमारी)
SIP Plan: हर महीने 5000 की SIP...10 साल में कितना बनेगा फंड? रिटर्न और टैक्स का पूरा हिसाब समझिए
SIP Investment Plan: निवेश की दुनिया में अगर कोई एक तरीका सबसे ज्यादा लोकप्रिय हुआ है, तो वह है एसआईपी यानी सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान। सवाल सीधा है कि अगर आप हर महीने 5000 की SIP शुरू करें, तो 10 साल में कितना पैसा बन सकता है? और उस पर कितना टैक्स लगेगा? आइए पूरा गणित साफ-साफ समझते हैं।
5000 हर महीने के हिसाब से साल भर में निवेश होगा 60 हजार रुपये। तो 10 साल में कुल निवेश रकम होगी- 6 लाख रुपये। यानी आपने अपनी जेब से 10 साल में 6 लाख रुपये लगाए। अब असली सवाल है कि ये 6 लाख रुपये बढ़कर कितने बनेंगे?
औसतन 12% सालाना रिटर्न मिले तो क्या होगा?
मान लीजिए आपने इक्विटी म्यूचुअल फंड में एसआईपी की और औसतन 12% सालाना रिटर्न मिला (लंबी अवधि में अच्छा इक्विटी फंड इतना दे सकता है, हालांकि रिटर्न बाजार पर निर्भर करता है)।
SIP कैलकुलेशन के हिसाब से 10 साल बाद आपका फंड लगभग 11 से 12 लाख रुपये के बीच होगा। यानि 6 लाख के निवेश पर करीब 5.5 से 6 लाख रुपये का फायदा। अगर रिटर्न 10% ही मिला तो फंड करीब 10.3-10.50 लाख रुपये के आसपास होगा। अगर 15% मिले तो यह रकम 13 लाख रुपये से ऊपर भी जा सकती है। यानी, समय और कंपाउंडिंग आपके सबसे बड़े साथी हैं।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि पूरी रकम एक ही फंड में लगाने की जगह उसे दो हिस्सों में बांटना ज्यादा अच्छा होता है। उदाहरण के लिए 3 हजार रुपये इंडेक्स में और 2 हजार रुपये फ्लेक्सी कैप फंड में लगाए जा सकते। इससे आपके पोर्टफोलियो में डायवर्सिफिकेशन होता है और खतरा भी कम हो जाता है। अगर कोई निवेशक इक्विटी और डेट का कॉम्बिनेशन चाहता है, तो हाइब्रिड फंड भी अच्छा विकल्प हो सकता है।
एक्सपर्ट्स बताते हैं कि इक्विटी में निवेश तभी करें, जब आप कम से कम 5 साल या उससे ज्यादा रुकने के लिए तैयार हों। वहीं बाजार गिरने पर एसआईपी बंद करना सबसे बड़ी गलती होती है। वहीं, फंड चुनते समय ज्यादा एक्सपेंस रेशियो वाले फंड से बचना चाहिए।
अब समझिए इसपर कितना टैक्स लगेगा?
SIP आमतौर पर इक्विटी म्यूचुअल फंड में की जाती है। इसलिए टैक्स के नियम भी इक्विटी वाले लागू होंगे। इसपर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन वसूला जाता है। अगर आप निवेश 1 साल से ज्यादा समय तक रखते हैं, तो यह लॉन्ग टर्म माना जाएगा। साल में 1 लाख तक का फायदा टैक्स फ्री। 1 लाख से ज्यादा के लाभ पर आपको 10 फीसदी टैक्स (बिना इंडेक्सेशन)
मान लीजिए 10 साल बाद आपका फंड 12 लाख हो गया। आपने 6 लाख निवेश किए थे। तो आपका कुल लाभ हुआ हुआ 6 लाख रुपये। पहले 1 लाख पर कोई टैक्स नहीं। बाकी बचे 5 लाख रुपये पर 10 फीसदी टैक्स लगेगा। यानी आपको कुल 50 हजार रुपये बतौर टैक्स देने होंगे। हाथ में लगभग 11.5 लाख मिल सकते हैं (सेस अलग से जुड़ सकता है)।
अगर 1 साल से पहले पैसा निकाल लिया?
तो यह शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन माना जाएगा। इस पर 15% टैक्स लगेगा। इसलिए SIP हमेशा लंबी अवधि के लिए ही बेहतर मानी जाती है।
क्या SIP में हर किस्त पर अलग टैक्स लगेगा?
जी हां, एसआईपी की हर किस्त अलग निवेश मानी जाती है। हर महीने की रकम का 1 साल पूरा होने पर वह लॉन्ग टर्म में गिनी जाएगी। इसलिए 10 साल बाद निकासी पर ज्यादातर यूनिट्स लॉन्ग टर्म कैटेगरी में होंगी।
किसके लिए सही 5000 की SIP?
नौकरी शुरू करने वाले युवा
मिडिल क्लास परिवार
रिटायरमेंट की प्लानिंग
बच्चों की पढ़ाई या शादी का लक्ष्य
5 हजार शुरू में छोटी रकम लग सकती है, लेकिन 10-15 साल में यही रकम बड़ा फंड बना सकती है। हालांकि, एक बात ध्यान रखना चाहिए कि SIP कोई जादू नहीं लेकिन अनुशासन और समय के साथ यह मजबूत धन बना सकती है। 10 साल में 6 लाख का निवेश 11 से 12 लाख रुपये में बदल सकता है। टैक्स नियम साफ हैं कि 1 लाख तक का फायदा टैक्स फ्री है, बाकी पर 10%। अगर लक्ष्य लंबा है, तो SIP आपके लिए एक मजबूत रास्ता हो सकती है। बस निवेश शुरू करें और बीच रास्ते में घबराएं नहीं।
(प्रियंका कुमारी)
(Disclaimer: ये आर्टिकल सामान्य जानकारी के आधार पर है। हरिभूमि इसकी पुष्टि नहीं करता है। निवेश से जुड़े किसी भी फैसले को लेने से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से जरूर सलाह करें)
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