पाकिस्तान का कबूलनामा: 'अमेरिका ने हमें टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल किया'; रक्षा मंत्री ने खोली सैन्य तानाशाहों और आतंकवाद की पोल
नई दिल्ली : पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने संसद के पटल पर अपनी ही विदेश नीति और सैन्य इतिहास की धज्जियां उड़ाते हुए बेहद सनसनीखेज बयान दिया है। उन्होंने अमेरिका के साथ पाकिस्तान के दशकों पुराने संबंधों को 'एकतरफा और अपमानजनक' करार देते हुए कहा कि वाशिंगटन ने इस्लामाबाद का इस्तेमाल केवल एक 'टॉयलेट पेपर' की तरह किया, जिसे जरूरत पूरी होने के बाद फेंक दिया गया।
यह बयान महज एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि पाकिस्तान की उस बदहाली का आधिकारिक स्वीकारोक्ति है, जिसे वह पिछले कई दशकों से आतंकवाद और आर्थिक तंगहाली के रूप में झेल रहा है।
अमेरिका के साथ 'इस्तेमाल और फेंकने' वाला रिश्ता
रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि अमेरिका और पाकिस्तान के बीच कभी भी बराबरी का संबंध नहीं रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी अमेरिका को दक्षिण एशिया में अपने हितों को साधना होता था, तो उसने पाकिस्तान को मोहरे की तरह इस्तेमाल किया। जैसे ही उसका रणनीतिक उद्देश्य पूरा हुआ, उसने पाकिस्तान को सुरक्षा और आर्थिक संकटों के बीच अकेला छोड़ दिया।
सैन्य तानाशाहों की ऐतिहासिक भूलों का पर्दाफाश
आसिफ ने पाकिस्तान की बर्बादी के लिए सीधे तौर पर देश के पूर्व सैन्य तानाशाहों—जनरल जिया-उल-हक और जनरल परवेज मुशर्रफ को जिम्मेदार ठहराया।
मजहब का गलत इस्तेमाल: उन्होंने स्वीकार किया कि इन तानाशाहों ने विदेशी ताकतों को खुश करने और सत्ता में बने रहने के लिए इस्लाम और जिहाद का सहारा लेकर पाकिस्तान को पराई जंगों में झोंक दिया।
अफगान युद्ध का सच: रक्षा मंत्री ने कहा कि 1979 के सोवियत हस्तक्षेप को अमेरिका ने 'आक्रमण' का रंग दिया और पाकिस्तान उसके नरेटिव का हिस्सा बन गया, जिसने देश में कलाश्निकोव और ड्रग कल्चर को जन्म दिया।
शिक्षा प्रणाली में जहर घोलने का कबूलनामा
एक बड़ा खुलासा करते हुए ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पिछली सरकारों और तानाशाहों ने जंगों को जनता के बीच सही ठहराने के लिए पाकिस्तान के शिक्षा पाठ्यक्रम तक को बदल दिया।
बच्चों को जिहादी मानसिकता के साथ बड़ा किया गया, जिसका परिणाम आज पाकिस्तान की सड़कों पर फैल रहे चरमपंथ और आतंकवाद के रूप में सामने आ रहा है। उन्होंने कहा कि जो जहर दशकों पहले घोला गया था, उसका असर आज भी कायम है।
आतंकवाद: पाकिस्तान की अपनी बोई हुई फसल
संसद में शिया मस्जिद पर हुए आत्मघाती हमले की निंदा करते हुए आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान आज जो आतंकवाद झेल रहा है, वह बाहरी नहीं बल्कि 'घर का पैदा किया हुआ' है। उन्होंने माना कि टीटीपी जैसे संगठनों को पालने-पोसने की जो नीति अपनाई गई थी, वही अब 'भस्मासुर' बनकर पाकिस्तान को निगल रही है।
अमेरिकी विदेश नीति में पाकिस्तान का घटता कद
अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर भी पाकिस्तान को झटका लगा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका अब पाकिस्तान के साथ अपने रिश्तों को भारत की रणनीतिक साझेदारी की कीमत पर नहीं आगे बढ़ाएगा।
अमेरिका ने साफ संदेश दिया है कि वह भारत के साथ अपनी मजबूत दोस्ती को प्राथमिकता देगा और पाकिस्तान के प्रति उसका रवैया केवल 'जरूरत और शर्तों' तक सीमित रहेगा।
Pariksha Pe Charcha 2026: दूसरे सत्र में PM मोदी ने छात्रों को दिए गुरुमंत्र, बोले- सीखना मंज़िल नहीं, जिंदगी का सफर है
Pariksha Pe Charcha 2026 के दूसरे सत्र का प्रसारण 9 फरवरी 2026 को सुबह 10 बजे किया गया। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक YouTube चैनल और दूरदर्शन पर लाइव देखा गया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने देशभर के छात्रों से सीधे संवाद किया और परीक्षा, जीवन और भविष्य को लेकर कई अहम संदेश दिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उन्हें खुशी है कि आज का छात्र 2047 के भारत के लिए सोच रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर भारत को विकसित देश बनाना है, तो केवल सपने नहीं, बल्कि अपनी आदतों को भी उसी दिशा में ढालना होगा। पीएम मोदी ने बच्चों को समझाया कि सीखना किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी जिंदगी चलने वाला एक सफर है।
Leadership does not only mean contesting elections.
— BJP (@BJP4India) February 9, 2026
For leadership qualities, the first and most important thing is that you should be able to clearly communicate your thoughts to at least ten people.
- PM Shri @narendramodi #ParikshaPeCharcha26
Watch full video:… pic.twitter.com/fTj8PJ4stl
दूसरे सत्र की शुरुआत तमिलनाडु के छात्रों के साथ संवाद से हुई। इसके बाद यह संवाद रायपुर होते हुए गुजरात तक पहुंचा। इस दौरान प्रधानमंत्री ने जीवन में अनुशासन को सबसे अहम बताया। उन्होंने कहा कि अनुशासन प्रेरणा को मजबूती देता है, लेकिन अगर अनुशासन न हो तो वही प्रेरणा बोझ बन जाती है और निराशा पैदा करती है।
परीक्षा के तनाव को लेकर पीएम मोदी ने बच्चों को अच्छी नींद लेने और खुलकर हंसने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अच्छी नींद से दिमाग तरोताजा रहता है और नए विचार आते हैं। तनाव कम करने के लिए हंसी और सकारात्मक माहौल बेहद जरूरी है।
एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) को लेकर एक छात्र की चिंता पर प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी नई तकनीक से डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने समझाया कि तकनीक हमारी मदद के लिए है, लेकिन हमें उसका गुलाम नहीं बनना है। मोबाइल और एआई का इस्तेमाल उतना ही करें, जितना हमारे जीवन और पढ़ाई में वैल्यू एड करे। निर्णय लेने की क्षमता हमेशा अपने हाथ में रखें।
अद्भुत प्रतिभा के धनी हमारे विद्यार्थियों में अपने सपनों को सच करने की पूरी क्षमता है। 'परीक्षा पे चर्चा' का उद्देश्य भी यही है कि कैसे वे अपनी प्रतिभा और कौशल का सार्थक इस्तेमाल कर सकते हैं।
— Narendra Modi (@narendramodi) February 9, 2026
विद्या वितर्को विज्ञानं स्मृतिस्तत्परता क्रिया।
यस्यैते षड्गुणास्तस्य… pic.twitter.com/7QajrvogC5
रिवीजन को लेकर पीएम मोदी की खास सलाह
रिवीजन से जुड़े सवाल पर प्रधानमंत्री ने कहा कि परीक्षा से लगभग एक हफ्ते पहले नियमित दोहराई शुरू कर देनी चाहिए। उन्होंने खेल का उदाहरण देते हुए बताया कि जैसे खिलाड़ी रोज अभ्यास करके बेहतर बनता है, वैसे ही पढ़ाई में भी निरंतर अभ्यास जरूरी है। पीएम मोदी ने एक अनोखा तरीका भी बताया अगर कोई टॉपिक कमजोर लगे तो उसे किसी दोस्त को पढ़ाने की कोशिश करें। इससे खुद की समझ और मजबूत होती है और विषय लंबे समय तक याद रहता है।
भारत घूमने को लेकर क्या बोले पीएम मोदी
देश में घूमने की जगहों पर सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री ने छात्रों को सबसे पहले अपने आसपास की जगहों को जानने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अपने जिले और आसपास के पर्यटन स्थलों की सूची बनाएं और धीरे-धीरे उन्हें एक्सप्लोर करें। यात्रा से न सिर्फ ज्ञान बढ़ता है, बल्कि संस्कृति, खानपान और जीवनशैली को समझने का मौका भी मिलता है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत की विविधता इतनी विशाल है कि इसे समझने के लिए एक पूरी जिंदगी भी कम पड़ सकती है।
परीक्षा पे चर्चा अब देश के सबसे बड़े शिक्षा संवाद कार्यक्रमों में शामिल हो चुका है। इसका उद्देश्य परीक्षा के दबाव को कम करना और छात्रों, अभिभावकों व शिक्षकों के बीच खुली बातचीत को बढ़ावा देना है। अधिकारी बताते हैं कि यह कोई प्रतियोगिता नहीं, बल्कि सीखने और मानसिक मजबूती का मंच है।
इस साल कार्यक्रम को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिला है। 4.5 करोड़ से ज्यादा छात्रों ने रजिस्ट्रेशन किया है, जो पिछले साल के गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड से भी अधिक है। आंकड़ों के अनुसार, 4.19 करोड़ से अधिक छात्र, करीब 24.84 लाख शिक्षक और 6.15 लाख अभिभावक इस पहल से जुड़ चुके हैं। यह साफ दिखाता है कि परीक्षा पे चर्चा छात्रों के बीच कितनी गहरी पहचान बना चुका है।
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