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CAFE-3 मानकों पर सस्पेंस खत्म? PMO को भेजा गया संशोधित प्रस्ताव, Maruti-Tata के बीच खिंची मतभेदों की लकीर

केंद्र सरकार ने देश में वाहनों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करने और ईंधन दक्षता (Fuel Efficiency) बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाया है। केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एच डी कुमारस्वामी ने बुधवार को जानकारी दी कि 'कैफे-3' (CAFE-3) मानकों का संशोधित प्रस्ताव प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को भेज दिया गया है।

केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एच डी कुमारस्वामी ने बुधवार को यह जानकारी दी। कैफे मानक वाहन विनिर्माताओं के समूचे वाहन बेड़े की औसत ईंधन खपत और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन की सीमा तय करते हैं। इन्हें कंपनी के स्तर पर लागू किए जाने से उसके वाहनों की ईंधन दक्षता में सुधार और प्रदूषण में कमी आती है।

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कुमारस्वामी ने कैफे-3 मानकों को लेकर वाहन उद्योग के भीतर उपजे मतभेदों के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘‘इस बारे में वाहन उद्योग के प्रतिनिधियों और ऊर्जा मंत्रालय के साथ एक बैठक हो चुकी है। मेरी जानकारी के मुताबिक, बैठक के बाद मंत्रालय ने संशोधित प्रस्ताव पीएमओ को भेज दिया है।’’

खासकर छोटी कारों को कैफे-3 मानकों के क्रियान्वयन से संभावित रियायत दिए जाने और तकनीकी परिभाषाओं में बदलाव को लेकर वाहन उद्योग के भीतर मतभेद खुलकर सामने आए हैं। टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी शैलेश चंद्रा ने नवंबर में कहा था कि वजन और वहनीयता के आधार पर छोटी कारों को इन मानकों से छूट नहीं दी जानी चाहिए। उनका तर्क था कि इससे सुरक्षा मानकों से समझौता हो सकता है और टिकाऊ परिवहन की दिशा में ठोस प्रयास प्रभावित होंगे।

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दूसरी तरफ, देश की अग्रणी वाहन कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने छोटी कारों के लिए रियायत देने की मांग रखी है। कंपनी के चेयरमैन आर सी भार्गव कह चुके हैं कि कैफे मानकों का मूल उद्देश्य बड़ी कारों की ईंधन दक्षता सुधारना और उत्सर्जन कम करना है। देश में 2017 से लागू कैफे मानक किसी वाहन विनिर्माता के कुल बेड़े की औसत ईंधन खपत और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन की सीमा तय करते हैं।

कैफे-2 मानक 2022 में लागू किए गए थे जबकि कैफे-3 मानकों के अप्रैल, 2027 से लागू होने की संभावना है। ऊर्जा मंत्रालय के तहत संचालित ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) ने इस वर्ष सितंबर में मसौदा विनियम जारी कर सुझाव आमंत्रित किए थे। अब अंतिम मानकों पर निर्णय के लिए प्रस्ताव पीएमओ के विचाराधीन है।

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OYO की पेरेंट कंपनी 'PRISM' का बड़ा दांव! SEBI के पूर्व चेयरमैन अजय त्यागी बोर्ड में शामिल, IPO की तैयारी तेज


यात्रा एवं आतिथ्य (Travel & Hospitality) क्षेत्र की प्रमुख कंपनी 'प्रिज्म' (ओयो की मूल कंपनी) ने बुधवार को घोषणा की कि उसने भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के पूर्व प्रमुख अजय त्यागी को अपने स्वतंत्र निदेशक के रूप में नियुक्त किया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब कंपनी अपने सार्वजनिक निर्गम (IPO) के जरिए शेयर बाजार में उतरने की अंतिम तैयारियों में जुटी है।
 

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कंपनी ने कहा कि यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब प्रिज्म सार्वजनिक बाजारों में पहुंचने और विस्तार की दिशा में अपने निदेशक मंडल एवं कॉरपोरेट कामकाज ढांचे को और मजबूत करना चाहती है। प्रिज्म के संस्थापक रितेश अग्रवाल ने कहा, ‘‘ अजय को पूंजी बाजार विनियमन और सार्वजनिक संस्थागत नेतृत्व में गहन अनुभव हैं। प्रिज्म जब विस्तार और उच्च कामकाज मानकों के साथ दीर्घकालिक जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब उनका अनुभव अत्यंत मूल्यवान होगा।’’ अजय त्यागी भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के 1984 बैच के अधिकारी हैं। वे भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन रह चुके हैं। 
 

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2017 से 2022 तक सेबी प्रमुख के रूप में उन्होंने भारत के पूंजी बाजार की निगरानी, विनियामक एवं प्रकटीकरण ढांचे को सुदृढ़ करने, निवेशक संरक्षण एवं प्राथमिक व द्वितीयक बाजार गतिविधियों की देखरेख की जिम्मेदारी निभाई। वर्तमान में वे कई भारतीय कंपनियों के निदेशक मंडल में स्वतंत्र निदेशक के रूप में भी कार्यरत हैं। त्यागी इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग (इलेक्ट्रॉनिक्स) में स्नातक तथा कंप्यूटर साइंस में परास्नातक हैं। उनके पास हार्वर्ड विश्वविद्यालय से ‘पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन’ में मास्टर डिग्री भी है। 

गौरतलब है कि 31 दिसंबर को सूत्रों के हवाले से खबर दी थी कि प्रिज्म ने बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास गोपनीय मार्ग के जरिये 6,650 करोड़ रुपये जुटाने के लिए प्रारंभिक दस्तावेज दाखिल किए हैं। प्रस्तावित आईपीओ से कंपनी का मूल्यांकन सात से आठ अरब अमेरिकी डॉलर के दायरे में होने की उम्मीद है।

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