सफाई कर्मियों की हड़ताल से बिगड़े पटना के हालात, निगम के दावों और हकीकत में जमीन-आसमां का अंतर
पटना नगर निगम के सफाई कर्मचारियों की हड़ताल पांच दिन से लगातार जारी है. हड़ताल का असर प्रदेश की राजधानी पटना में साफ दिखाई दे रहा है. गली-मोहल्लों में कचरे के ढेर लगे हुए हैं. स्थानीय लोगों का गंदगी और बदबू में रहना दूभर हो गया है. लोगों को संक्रमण फैलने का डर भी सता रहा है.
सोमवार को करीब 300 टन कचरा उठाया- निगम
पटना नगर निगम का दावा है कि सीमित संसाधनों के बावजूद सफाई व्यवस्था को बनाए रखने के लिए स्पेशल अभियान चलाया जा रहा है. निगम की मानें सोमवार को करीब 300 टन कचरा उठाया जा रहा है. करीब 100 डोर-टू-डोर वाहनों की मदद से सोमवार को घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों से कचरा एकत्रित किया गया. निगम के अनुसार, नूतन राजधानी, अजीमाबाद, पटना सिटी, पाटलिपुत्र और बांकीपुर अंचलों में अतिरिक्त वाहनों की व्यवस्था की गई. मतगणना को देखते हुए ए.एन. कॉलेज परिसर में भी सफाई की विशेष व्यवस्था की गई. वहीं, एग्जीबिशन रोड, गोरिया टोली और जमाल रोड स्थित कूड़ा प्वाइंट पर जेसीबी और ट्रैक्टरों से सफाई अभियान चलाया गया.
सफाई व्यवस्था प्रभावित होने की वजह से नगर निगम ने अनुबंधित एजेंसियों पर कार्रवाई तेज कर दी. निगम का आरोप है कि एजेंसियों ने तय मानकों के अनुसार, पर्याप्त कर्मचारी और वाहन उपलब्ध नहीं करवाए. इसी आधार पर 1 और 2 अगस्त को तीन एजेंसियों द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किया गया. कुल 21.95 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त आर्थिक दंड लगाया गया.
कचरों का ढेर बयां कर रही है नगरनिगम के दावों की हकीकत
वहीं, पटना नगर निगम संयुक्त कर्मचारी समन्वय समिति के बैनर तले हड़ताली कर्मियों ने नगर निगम मुख्यालय, मौर्यालोक में प्रदर्शन जारी रखा. कर्मचारियों ने सम्मानजनक वार्ता के जरिए मांगों का समाधान करने की अपील की. समिति के नेताओं का आरोप है कि नगर निगम सफाई व्यवस्था सामान्य होने का दावा कर रही है लेकिन शहर के कई हिस्सों में कचरों का ढेर नगरनिगम के दावों का हकीकत बयां कर रही है. उनका कहना है कि सिर्फ औपचारिक अभियान चलाने से समस्या का समाधान नहीं होगा. मांगे पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा.
सफाई कर्मियों के समर्थन में उतरे श्रमिक संगठन
खास बात है कि अब श्रमिक संगठन भी इसको समर्थन देने लगे हैं. एक्टू ने नगर निकाय सफाई कर्मियों की मांगों के समर्थन में बिहार के सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करने की घोषणा की है. अगर ऐसे में जल्द समाधान नहीं किया गया तो राजधानी में सफाई व्यवस्था को सामान्य बनाना और भी बड़ी चुनौती बन सकती है. वर्तमान में नगर निगम और हड़ताली कर्मचारियों के बीच गतिरोध बरकरार है, जिसका असर सबसे अधिक आम नागरिकों को हो रहा है.
तीन दिन और बढ़ा सकता है संसद का मानसून सेशन, विपक्ष के भारी हंगामे के बीच क्यों सरकार ले रही ऐसा फैसला
केंद्र सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन विधेयकों को पारित कराने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर रही है. मौजूदा मानसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त होना है, लेकिन इसके बाद सत्रावसान (प्रोरोगेशन) नहीं किया जाएगा, ताकि आवश्यकता पड़ने पर जल्द ही संसद का विशेष सत्र बुलाया जा सके.
बताया जा रहा है कि सरकार संशोधन विधेयकों को पारित कराने के लिए दोनों सदनों में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रही है. सूत्रों का कहना है कि जैसे ही पर्याप्त समर्थन का भरोसा मिलेगा, 16 अगस्त से तीन दिन का विशेष सत्र बुलाया जा सकता है. हालांकि, इस संबंध में सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है.
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