Manipur के कांगपोकपी में SoO शिविर पर सुरक्षाबलों का कब्जा, 17 लोग हिरासत में लिए गए
(सौरव राय बर्मन) इंफाल, 24 अक्टूबर मणिपुर में मई 2023 में जातीय हिंसा भड़कने के बाद पहली बार सुरक्षा बलों ने लगभग दो दशक पुराने संघर्षविराम समझौते के तहत कुकी-जो उग्रवादियों के लिए बनाए गए एक शिविर का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है। शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सुरक्षाबलों ने राज्य में ऐसे सभी 14 शिविरों की जांच करने की योजना बनाई है।
शिविर में पंजीकृत 159 कैडर में से केवल एक के मौजूद मिलने के बाद यह कदम उठाया गया। इससे अभियान निलंबन (एसओओ) समझौते के पालन को लेकर सवाल उठे हैं। यह समझौता चार सितंबर को नवीनीकरण के बिना समाप्त हो गया था।
यह कार्रवाई 19 अक्टूबर को नोंगशुम के पास मेइती समुदाय के तीन नागरिकों की हत्या के कुछ दिन बाद हुई है। मेइती संगठनों की ओर से लंबे समय से एसओओ शिविरों को बंद करने या दूसरी जगह स्थानांतरित करने और समझौते को रद्द करने की मांग की जाती रही है। आरोप हैं कि संघर्षविराम के दायरे में आने वाले उग्रवादियों ने नागरिकों और सुरक्षाबलों पर हमले किए हैं।
अधिकारियों ने बताया कि नोंगशुम हत्याकांड के बाद शुरू किए गए सुरक्षा अभियानों के तहत मणिपुर पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की संयुक्त टीमों ने शनिवार को कांगपोकपी जिले के सिनाई शिविर का पूरा नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने शनिवार को पीटीआई-भाषा को बताया, “शुक्रवार को छापा मारा गया और शनिवार को सुरक्षाबलों ने शिविर का पूरा नियंत्रण संभाल लिया। यह अभियान जारी रहेगा।
जमीनी स्थिति का पता लगाने के लिए सभी निर्धारित शिविरों की जांच की जाएगी।” अधिकारी ने बताया कि सिनाई शिविर में 159 कैडर की अपेक्षित संख्या के मुकाबले केवल एक पंजीकृत कैडर मिला। इसके अलावा 17 ऐसे लोग भी मिले, जिनकी पहचान समझौते के दायरे में आने वाले कैडर के रूप में नहीं हुई। इन 17 लोगों को शनिवार को गिरफ्तार कर लिया गया।
मणिपुर पुलिस ने शनिवार को एक बयान में कहा, “सभी 17 आरोपियों को 31 अक्टूबर तक आठ दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। शिविर के प्रबंधन से जुड़े लोगों की संलिप्तता, पहचान छिपाकर दूसरे व्यक्ति के रूप में पेश होने, हथियारों पर अनधिकृत कब्जे और एसओओ के बुनियादी नियमों के उल्लंघन के संबंध में आगे की जांच की जा रही है।” बयान के अनुसार, सुरक्षाबलों ने शिविर से 24 आग्नेयास्त्र, 38 मैगजीन, बड़ी मात्रा में गोला-बारूद, विस्फोटक, वायरलेस संचार उपकरण और युद्ध संबंधी अन्य सामान जब्त किया। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि लापता कैडर के बारे में यह दलील दी गई कि उनमें से कुछ अपने घर चले गए थे, जबकि कुछ अन्य जगहों पर थे।
उन्होंने कहा कि उनके ठिकानों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच की जा रही है। यह पूछे जाने पर कि क्या समझौते की अवधि समाप्त होने का मतलब है कि उग्रवादी अब अपने शिविर छोड़ सकते हैं, वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि इसकी अनुमति नहीं दी जाएगी क्योंकि समझौते को औपचारिक रूप से रद्द भी नहीं किया गया है। अधिकारी ने कहा, “एसओओ समझौते का नवीनीकरण किया जाना चाहिए या नहीं, इसका फैसला केंद्र को करना है।
लेकिन जब तक इसे रद्द नहीं किया जाता, तब तक कैडर और उनके हथियार निर्धारित शिविरों में ही रहने चाहिए।”
Ken-Betwa Link Project: उमंग सिंघार के समझाने पर पन्ना में 27 दिन बाद समाप्त हुआ धरना
मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ 27 दिन से धरने पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने शनिवार को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के आग्रह पर अपना आंदोलन समाप्त कर दिया। सिंघार के आग्रह पर भटनागर ने नारियल पानी पीकर धरना समाप्त किया। नेता प्रतिपक्ष ने इस दौरान परियोजना से प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने की लड़ाई में कांग्रेस की ओर से समर्थन का आश्वासन दिया।
भटनागर के नेतृत्व में परियोजना से प्रभावित आदिवासी किसानों और ग्रामीणों का मुआवजे, पुनर्वास और अन्य मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी था। प्रदर्शनकारी विस्थापन, उचित पुनर्वास, मुआवजा वितरण में कथित अनियमितताओं और वन अधिकार अधिनियम के उल्लंघन से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं। सिंघार ने कहा कि कांग्रेस अधिकार, न्याय, सम्मान और उचित मुआवजे की लड़ाई में प्रभावित लोगों के साथ खड़ी रहेगी।
प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपनी मांगों के संबंध में ज्ञापन सौंपा। सिंघार ने कहा, ‘‘आदिवासियों, दलितों और किसानों को अनाथ समझने वाली भाजपा सरकार को याद रखना चाहिए कि कांग्रेस अभी जीवित है। कांग्रेस प्रभावित परिवारों के अधिकारों और न्याय की लड़ाई सड़क से लेकर संसद तक लड़ेगी।
विकास के नाम पर किसी परिवार के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए।’’ नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि 14 जुलाई को प्रभावित लोगों से मुलाकात के बाद उन्होंने विधानसभा में उनकी मांगें उठाई थीं। सिंघार के मुताबिक, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रभावित परिवारों का दोबारा सर्वेक्षण कराने और मुआवजे की स्थिति की जांच करने के निर्देश दिए थे लेकिन सरकार ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। उन्होंने सवाल किया, ‘‘दोबारा किए गए सर्वेक्षण की रिपोर्ट कहां है?
छूट गए परिवारों में से कितनों को मुआवजा दिया गया है और कितने परिवार अब भी भुगतान का इंतजार कर रहे हैं?’’ सिंघार ने कहा कि राज्य सरकार को केवल घोषणाएं करने के बजाय प्रभावित परिवारों की समस्याओं का समयबद्ध तरीके से समाधान करना चाहिए। उन्होंने पन्ना जिला जेल जाकर प्रदर्शनकारी दिव्या अहिरवार से भी मुलाकात की, जो पिछले 28 दिन से जेल में बंद हैं। सिंघार ने सत्याग्रहियों के खिलाफ दर्ज मामलों को फर्जी बताते हुए अहिरवार की तत्काल रिहाई की मांग की।
उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारों के लिए आवाज उठाने वालों को जेल में डाला जा रहा है, जबकि सरकार को प्रभावित आदिवासी परिवारों को न्याय दिलाने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए। सिंघार ने कहा कि केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित आदिवासी किसानों, ग्रामीणों और विस्थापित परिवारों को न्याय, पर्याप्त मुआवजा और सम्मानजनक पुनर्वास मिलने तक कांग्रेस उनकी आवाज उठाती रहेगी।
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