रिलेशनशिप एडवाइज- पार्टनर चैट्स का स्क्रीनशॉट रखता है:झगड़े में पुरानी बातें ले आता है, फिर सबूत दिखाता है, क्या ये रेड फ्लैग है?
सवाल- मैं दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन कर रही हूं। एक साल से रिलेशनशिप में हूं। मेरा बॉयफ्रेंड मेरी हर बात का रिकॉर्ड रखता है, चैट के स्क्रीनशॉट रखता है। मैंने कब क्या कहा, कैसे कहा, सबकुछ। फिर जब भी हमारे बीच झगड़ा होता है, वो पुराने चैट्स निकालकर दिखाने लगता है। जब पहली बार उसने चैट का स्क्रीनशॉट दिखाया तो मुझे बहुत शॉक लगा था। क्या ये बिहेवियर नॉर्मल है, क्या ये ट्रस्ट की कमी है या मैं जरूरत से ज्यादा सेंसिटिव हूं? मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा है कि मैं क्या करूं? एक्सपर्ट: डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा जवाब- सबसे पहले तो शुक्रिया कि आपने अपनी भावनाओं को शब्दों में इतने अच्छे से व्यक्त किया। कॉलेज लाइफ में रिश्ते की इतनी गहरी समझ होना और ये सवाल पूछना आसान नहीं होता। ज्यादातर लड़कियां ऐसे मामलों में खुद को ही दोष देती रहती हैं, लेकिन आपने सवाल किया यानी आप सजग हैं। ये अपने आप में बहुत बड़ी बात है। आपका सवाल पार्टनर की सिर्फ एक आदत को लेकर नहीं है। यह सवाल इमोशनल सेफ्टी और उस भरोसे को लेकर है, जो किसी भी रिलेशनशिप की बुनियाद है। इसलिए सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि आप जो महसूस कर रही हैं, वह न तो छोटी बात है और न ही आप ओवर-सेंसिटिव हैं। आपकी फीलिंग्स पूरी तरह वैलिड हैं। रिश्ते में अगर हर बात पर सबूत मांगे जाएं, तो अविश्वास पैदा हो सकता है। चलिए, इस समस्या को स्टेप-बाई-स्टेप समझते हैं और देखते हैं कि आप क्या कर सकती हैं। हर बात का रिकॉर्ड रखना हेल्दी नहीं है अगर कोई पार्टनर बातचीत के स्क्रीनशॉट संभालकर रखता है और झगड़े के समय उन्हें दिखाता है, तो यह हेल्दी पैटर्न नहीं है। रिकॉर्ड्स कोर्टरूम में जरूरी होते हैं क्योंकि वहां जज को सच और झूठ तय करने के लिए सबूत चाहिए। लेकिन ये समझना चाहिए कि रिश्ता कोर्टरूम नहीं है। इसलिए इसमें सबूत नहीं, समझ, भरोसा और भावनाओं की जरूरत होती है। इस तरह का बिहेवियर टॉक्सिक हो सकता है। इसके सभी संकेत ग्राफिक में देखिए- रिकॉर्ड रखने का पार्टनर पर क्या असर पड़ता है? ऐसे रिश्ते में इंसान पर अक्सर ये तीन भावनाएं हावी हो जाती हैं। यह टॉक्सिक रिलेशनशिप का संकेत हो सकता है, अगर आपको लग रहा है कि- ऐसे मामलों में अक्सर लड़कियां खुद को कमतर महसूस करने लगती हैं। उन्हें ऐसा लगता है, जैसे हर बात एक टेस्ट है, जहां फेल होने पर पुराने पेपर निकालकर दिखाए जाते हैं। ये न सिर्फ गुस्सा बढ़ाता है, बल्कि रिश्ते की खुशी को भी छीन सकता है। इसके सभी साइकोलॉजिकल इफेक्ट ग्राफिक में देखिए- क्या यह सिर्फ ट्रस्ट इश्यू है? अक्सर लोग ऐसी सिचुएशन को सीधे ट्रस्ट इश्यू कह देते हैं, जबकि यह इससे ज्यादा गहरी बात है। पार्टनर के ऐसे बिहेवियर के पीछे उसका कोई ट्रॉमा, पास्ट रिलेशनशिप या परवरिश हो सकती है। ऐसे लोग अक्सर खुद को सुरक्षित रखने के लिए हर चीज डॉक्यूमेंट करने लगते हैं। यह उनका डिफेंस मेकेनिज्म हो सकता है। पार्टनर के ऐसे बिहेवियर के पीछे के सभी संभावित कारण ग्राफिक में देखिए- आपको क्या करना चाहिए? भले ही पार्टनर की ऐसी आदतों के पीछे उसकी जिंदगी के पुराने अनुभव हों, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आपको ऐसे व्यवहार को सहन करना चाहिए। किसी की इनसिक्योरिटी को समझना इंसानियत है, लेकिन उसी इनसिक्योरिटी की कीमत पर अपनी मानसिक शांति गंवाना समझदारी नहीं है। आप दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ रही हैं, आपकी जिंदगी में पढ़ाई, दोस्त, करियर भी महत्वपूर्ण हैं। रिश्ता ऐसा होना चाहिए, जो आपको सपोर्ट करे, न कि बोझ बन जाए। पार्टनर को काउंसलिंग की जरूरत अगर कोई इंसान रिश्ते में रहते हुए भी हर बात का रिकॉर्ड रखने की जरूरत महसूस करता है, तो यह संकेत है कि उसके अंदर डर और अविश्वास जैसी भावनाएं बहुत गहरे बैठी हैं। इसके लिए उसे प्रोफेशनल हेल्प और काउंसलिंग की जरूरत है। काउंसलिंग के दौरान सपोर्ट करें, लेकिन दोस्त की तरह यहां आपको एक अहम बात समझनी होगी कि आप पार्टनर को सपोर्ट कर सकती हैं। आप यह कह सकती हैं कि आप उसकी तकलीफ को समझ रही हैं। आप उसे काउंसलिंग लेने के लिए प्रोत्साहित कर सकती हैं। लेकिन सपोर्ट का मतलब यह बिल्कुल नहीं होता है कि आप रिश्ते में रहकर खुद तकलीफ सहती रहेंगी। सपोर्ट करना है तो दोस्त बनकर किया जा सकता है। पार्टनर बनकर खुद की जिंदगी खराब करना, सपोर्ट नहीं कहलाता। बाउंड्री तय करना जरूरी आपको साफ-साफ यह कहना होगा कि झगड़े में पुरानी चैट्स निकालना आपको असहज करता है। यह तरीका आपको सुरक्षित महसूस नहीं कराता और आप रिश्ते में इस पैटर्न को नहीं सहन करेंगी। बाउंड्री रखने का मतलब रिश्ता खत्म करना नहीं होता। इसका मतलब है कि आप अपनी सेफ्टी तय कर रही हैं। अगर पैटर्न न बदले तो क्या करें? अगर पार्टनर आपकी फीलिंग्स को बार-बार नजरअंदाज करे, आपको ही ओवर-सेंसिटिव कहे, हर बार सबूत से चुप कराने की कोशिश करे तो आपको खुद से एक ईमानदार सवाल पूछना होगा- क्या मैं इस रिश्ते में खुद को मानसिक रूप से सुरक्षित महसूस करती हूं? रिलेशनशिप के मजबूत और स्थाई होने के लिए जरूरी है कि कोई इंसान खुद को कमतर न महसूस करे। दोनों एक-दूसरे को बराबरी पर आकें। रेड फ्लैग कैसे पहचानें? अगर पार्टनर बदलने को तैयार नहीं है, तो यह रेड फ्लैग है। यह रिश्ते को री-इवैल्यूएट करने का समय है। रेड फ्लैग की पूरी लिस्ट ग्राफिक में देखें- रिश्ते में भरोसा जरूरी रिश्ते भरोसे से चलते हैं, डॉक्यूमेंटेशन से नहीं। जहां हर बात का रिकॉर्ड रखना पड़े, वहां लोग दिल खोलकर नहीं बोल पाते हैं। आपका असहज महसूस करना जायज है। आपकी भावनाएं वैलिड हैं। सबसे जरूरी बात ये है कि किसी को ठीक करने की कोशिश में खुद को परेशानी में डालना प्यार नहीं है। ……………… ये खबर भी पढ़िए रिलेशनशिप एडवाइज- शादी-बच्चे की जिम्मेदारियों में फंस गई हूं: मुझे पर्सनल स्पेस चाहिए, लेकिन हसबैंड समझते नहीं, क्या मैं गलत हूं? हिंदुस्तान से लेकर जॉर्जिया तक औरतें ये करना चाहती हैं। लेकिन बहुत कम में यह हिम्मत होती है कि वो आपकी तरह सवाल लिखकर अपने दिल की बात कहें। आपका सवाल ही बता रहा है कि आप एक संजीदा इंसान हैं। आप खुद को जानने-समझने की यात्रा तय करना चाहती हैं। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। आगे पढ़िए…
जरूरत की खबर- इन फूड्स में सबसे ज्यादा एंटीऑक्सिडेंट्स:इम्यूनिटी बढ़ाए, हेल्दी हार्ट के लिए जरूरी, जानें डाइट में कैसे शामिल करें
एक मशहूर कहावत है- ‘ईट द रेनबो।’ इसका मतलब है, अपनी थाली में अलग-अलग रंगों वाले नेचुरल फूड शामिल करिए। ये सिर्फ कहावत नहीं बल्कि साइंटिफिक एडवाइज भी है। दरअसल, रेड स्ट्रॉबेरी, बैंगनी प्लम, हरी पत्तेदार सब्जियां और नीली ब्लूबेरी जैसे रंगीन फूड्स में पावरफुल एंटीऑक्सिडेंट ‘पॉलीफेनॉल्स’ होते हैं। ‘लंदन के किंग्स कॉलेज’ की हालिया स्टडी के मुताबिक, लंबे समय तक पॉलीफेनॉल रिच डाइट लेने से हार्ट हेल्दी रहता है। ये स्टडी पीयर रिव्यू मेडिकल जर्नल ‘BMC मेडिसिन’ में पब्लिश हुई है। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. पूनम तिवारी, सीनियर डाइटीशियन, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ सवाल- एंटीऑक्सिडेंट फूड क्या होते हैं? जवाब- एंटीऑक्सिडेंट फूड को समझने के लिए पहले हमें दो बातें समझनी होंगी– फ्री रेडिकल्स क्या है? एंटीऑक्सिडेंट क्या है? सवाल- एंटीऑक्सिडेंट फूड शरीर में जाकर क्या काम करते हैं? यह हेल्थ के लिए क्यों जरूरी हैं? जवाब- एंटीऑक्सिडेंट फूड सेल्स को सुरक्षित रखने में मदद करते हैं। ये लंबे समय तक सेहत की सुरक्षा करने वाली ढाल की तरह काम करते हैं। पॉइंटर्स से समझते हैं कि ये शरीर में क्या काम करते हैं- जब शरीर में एंटीऑक्सिडेंट का स्तर बैलेंस्ड रहता है, तो इम्यून सिस्टम भी ज्यादा प्रभावी ढंग से काम करता है। सवाल- कौन–कौन से फूड एंटीऑक्सिडेंट रिच होते हैं? जवाब- आइए ग्राफिक से जानते हैं कि किन फूड्स में एंटीऑक्सिडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। सवाल- एंटीऑक्सिडेंट फूड हार्ट हेल्थ के लिए क्यों जरूरी है? जवाब- हार्ट डिजीज की शुरुआत अक्सर आर्टरीज में इंफ्लेमेशन और अंदरूनी डैमेज से होती है। जब शरीर में मौजूद LDL (बैड कोलेस्ट्रॉल) ऑक्सिडाइज्ड हो जाता है, तो वह आर्टरीज की वॉल्स पर जमा होने लगता है। समय के साथ यही जमाव प्लाक बनाता है, जिससे ब्लड फ्लो प्रभावित होता है। इसके कारण हार्ट अटैक का रिस्क बढ़ जाता है। एंटीऑक्सिडेंट फूड इस पूरे प्रोसेस को कंट्रोल करने में मदद करते हैं। इससे ब्लड फ्लो बेहतर रहता है और दिल पर दबाव कम पड़ता है। सवाल- क्या एंटीऑक्सिडेंट रिच फूड इम्यूनिटी बढ़ाते हैं? जवाब- हां, विटामिन C, E और बीटा-कैरोटीन जैसे तत्व संक्रमण से लड़ने वाली इम्यून सेल्स को मजबूत बनाते हैं। सवाल- क्या एंटीऑक्सिडेंट्स रिच फूड एजिंग स्पीड को कम करते हैं? जवाब- हां, एजिंग की मुख्य वजह ऑक्सिडेटिव डैमेज होती है। जब सेल्स बार-बार फ्री रेडिकल्स के संपर्क में आती हैं, तो उनके डीएनए, प्रोटीन और लिपिड्स (बॉडी फैट, जो एनर्जी स्टोर करने और शरीर के सही कामकाज में मदद करते हैं।) डैमेज होते हैं। इससे उम्र बढ़ने की प्रक्रिया तेज होती है। एंटीऑक्सिडेंट रिच फूड इस डैमेज को कम करके सेल्स की उम्र बढ़ाने में मदद करते हैं। इससे एजिंग स्पीड कम होती है। सवाल- एंटीऑक्सिडेंट्स सप्लीमेंट्स की जरूरत कब पड़ती है? जवाब- अगर आप बैलेंस्ड डाइट लेते हैं तो आमतौर पर सप्लीमेंट की जरूरत नहीं पड़ती है। फिर भी कुछ लोगों को डॉक्टर सप्लीमेंट की सलाह दे सकते हैं। जैसे- सवाल- रोजाना कितनी मात्रा में एंटीऑक्सिडेंट फूड लेना पर्याप्त है? जवाब- एंटीऑक्सिडेंट की कोई तय मात्रा निर्धारित नहीं है। इन्हें संतुलित डाइट से लेना बेहतर माना जाता है। पर्याप्त एंटीऑक्सिडेंट्स के लिए रोज कम-से-कम 4–5 सर्विंग फल और सब्जियां लेना पर्याप्त है। सवाल- क्या ज्यादा एंटीऑक्सिडेंट लेने से हेल्थ को कोई नुकसान भी हो सकता है? जवाब- एंटीऑक्सिडेंट्स शरीर के लिए फायदेमंद जरूर हैं, लेकिन हर चीज की तरह इनकी भी एक सीमा है। खासकर जब इन्हें हाई-डोज सप्लीमेंट्स के रूप में लिया जाता है, तो यह उल्टा असर डाल सकते हैं। शरीर में फ्री रेडिकल्स पूरी तरह ‘दुश्मन’ नहीं होते, उनका एक नेचुरल बैलेंस भी जरूरी होता है। इसलिए– सवाल- एंटीऑक्सिडेंट फूड को अपनी डाइट में कैसे शामिल करें? जवाब- इसके लिए किसी खास या महंगे डाइट प्लान की जरूरत नहीं होती। कोशिश करें कि आपकी थाली में अलग-अलग रंग के फल और सब्जियां शामिल हों और प्रोसेस्ड स्नैक्स की जगह नेचुरल ऑप्शन चुनें। कुल मिलाकर, एंटीऑक्सिडेंट रिच फूड कोई ट्रेंड नहीं, बल्कि साइंस-बेस्ड हेल्थ स्ट्रैटेजी है। हार्ट हेल्थ बेहतर रखनी हो, इम्यूनिटी मजबूत करनी हो या उम्र बढ़ने की रफ्तार को संतुलित रखना हो, तो रंगीन और नेचुरल डाइट अहम भूमिका निभाती है। यह डाइट न सिर्फ शरीर को जरूरी पोषण देती है, बल्कि लंबे समय तक सेहतमंद रहने में भी मदद करती है। …………………….., जरूरत की ये खबर भी पढ़ें… जरूरत की खबर- विटामिन-C कम तो जल्दी-जल्दी पड़ेंगे बीमार:रोज चाहिए 75mg, जानें डेफिशिएंसी के संकेत, इन फूड्स में है सबसे ज्यादा हमें स्वस्थ रहने के लिए कई जरूरी पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। विटामिन C इनमें से एक है, जो इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने, स्किन को हेल्दी रखने, घाव भरने में मदद करने और आयरन के अवशोषण में अहम भूमिकाएं निभाता है। पूरी खबर पढ़िए…
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