'ईमानदार अधिकारियों को सुरक्षा मिलना जरूरी ', हेड कॉन्स्टेबल के पोस्ट पर दी अनुराग ढांडा ने प्रतिक्रिया
Haryana News: हरियाणा में नशे की समस्या को लेकर चिंता लगातार बढ़ती जा रही है. गांवों, कस्बों और शहरों में युवाओं के नशे की चपेट में आने की खबरें सामने आ रही हैं. इंजेक्शन और चिट्टा जैसे खतरनाक नशे का जाल युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले रहा है. ऐसे में एक पुलिसकर्मी की सोशल मीडिया पोस्ट ने पूरे मुद्दे को और गंभीर बना दिया है.
कार्रवाई करने वाले पर बनाया जा रहा दबाव
हरियाणा के पुलिसकर्मी सुनील संधू ने दावा किया है कि वे नशे के खिलाफ कार्रवाई कर रहे थे, लेकिन उन पर दबाव बनाया जा रहा है. उनका कहना है कि जब उन्होंने तस्करों के खिलाफ सख्ती दिखाई तो उन्हें ही कार्रवाई की चेतावनी दी गई. यह मामला सामने आने के बाद नशे के खिलाफ सिस्टम की मजबूती और पारदर्शिता पर चर्चा तेज हो गई है.
अनुराग ढांडा ने मुद्दे को गंभीर बताया
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि नशे के खिलाफ काम करने वाले अधिकारियों को पूरा संरक्षण मिलना चाहिए. उनका कहना है कि यदि कोई अधिकारी ईमानदारी से कार्रवाई करता है, तो उसे सुरक्षा और समर्थन मिलना जरूरी है. पार्टी ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और सच्चाई सामने लाई जाए.
पंजाब में नशे के खिलाफ जंग अभियान जारी
पंजाब में 2022 के बाद से भगवंत मान सरकार ने ‘नशे के खिलाफ जंग’ अभियान चलाने का दावा किया है. वहां बड़े सप्लायरों की गिरफ्तारी और संपत्ति जब्ती जैसी कार्रवाई की बातें सामने आई हैं. आम आदमी पार्टी का कहना है कि नशे के खिलाफ ठोस और सख्त कदम ही युवाओं को बचा सकते हैं.
ईमानदार अधिकारियों को मिले संरक्षण
हरियाणा में भी लोगों की यही मांग है कि नशे के खिलाफ मजबूत रणनीति बनाई जाए. माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे सुरक्षित रहें और युवाओं को रोजगार व बेहतर भविष्य मिले. राजनीतिक बयानबाजी से ज्यादा जरूरी है कि जमीनी स्तर पर कार्रवाई दिखाई दे. नशा एक सामाजिक चुनौती है, जिसका असर पूरे समाज पर पड़ता है. अब जरूरत है पारदर्शी जांच, सख्त कानून और ईमानदार अधिकारियों को संरक्षण देने की, ताकि युवाओं का भविष्य सुरक्षित रह सके.
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ईरान से तनाव के बीच अमेरिकी सैनिकों के बीच टॉयलेट वॉर, क्यों आपस में लड़ रहे ट्रंप के सोल्जर?
एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ सख्त बयानबाज़ी कर रहे हैं और पश्चिम एशिया में सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी नौसेना के सबसे आधुनिक और महंगे विमानवाहक पोत पर तैनात हजारों सैनिक एक अलग ही संकट से जूझ रहे हैं. दुनिया के सबसे बड़े विमानवाहक पोत USS Gerald R. Ford पर इन दिनों असली चिंता किसी संभावित सैन्य कार्रवाई की नहीं, बल्कि जाम हो रहे टॉयलेट्स की है.
करीब 5,000 से अधिक नाविकों को लेकर समुद्र में तैनात यह पोत तकनीकी रूप से अत्याधुनिक है, लेकिन लंबे समय से समुद्र में लगातार मौजूदगी ने इसकी आंतरिक व्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ा दिया है.
जून से समुद्र में तैनाती, बढ़ती मुश्किलें
यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड पिछले साल जून से लगातार समुद्र में है। शुरू में उम्मीद थी कि एक विशेष मिशन के बाद इसकी तैनाती समाप्त हो जाएगी और चालक दल को वापसी का मौका मिलेगा. लेकिन ईरान के साथ बढ़ते तनाव और क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों के चलते इसकी तैनाती को आगे बढ़ा दिया गया.
आमतौर पर शांतिकाल में किसी अमेरिकी विमानवाहक पोत की तैनाती छह महीने तक होती है. हालांकि, फोर्ड पर तैनात सैनिक अब आठ महीने से अधिक समय समुद्र में बिता चुके हैं. संभावना जताई जा रही है कि यह अवधि 11 महीने तक खिंच सकती है. यदि ऐसा हुआ, तो यह अमेरिकी नौसेना के इतिहास में सबसे लंबी तैनातियों में से एक होगी.
13 अरब डॉलर का जहाज और सीवेज संकट
करीब 13 अरब डॉलर की लागत से बना यह पोत तकनीकी चमत्कार माना जाता है. इसमें अत्याधुनिक हथियार प्रणाली, उन्नत रडार और आधुनिक वैक्यूम-आधारित सीवेज सिस्टम लगाया गया है. लेकिन यही जटिल वैक्यूम सिस्टम अब परेशानी की वजह बन गया है.
रिपोर्टों के अनुसार, यदि एक टॉयलेट में गड़बड़ी होती है तो पूरे सेक्शन की व्यवस्था प्रभावित हो जाती है. लंबे समय तक नियमित रखरखाव न हो पाने के कारण लगभग 650 टॉयलेट्स में रुकावट की समस्या सामने आई है.
मनोबल और मेंटिनेंस पर असर
लगातार समुद्र में रहने से न केवल तकनीकी रखरखाव प्रभावित हो रहा है, बल्कि सैनिकों के मनोबल पर भी असर पड़ रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक सैन्य ताकत केवल हथियारों से नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स और मानव संसाधन प्रबंधन से भी तय होती है.
ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच यह स्थिति दिखाती है कि विशाल सैन्य शक्ति के पीछे भी रोजमर्रा की बुनियादी चुनौतियां कितनी अहम होती हैं. फिलहाल, यूएसएस फोर्ड पर तैनात नाविकों के लिए सबसे बड़ा मिशन किसी युद्ध अभियान से पहले अपने जहाज की आंतरिक व्यवस्था को दुरुस्त करना है.
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