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PM Modi के नए PMO 'सेवा तीर्थ' में पहली Cabinet बैठक, लिया 'नागरिक देवो भव' का महासंकल्प

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की ऐतिहासिक पहली बैठक मंगलवार, 24 फरवरी को नए प्रधानमंत्री कार्यालय, 'सेवा तीर्थ' में आयोजित की गई। यह उद्घाटन बैठक युगाब्द 5127, विक्रम संवत 2082 और शक संवत 1947 के फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी के शुभ दिन हुई। यह भवन नए भारत के पुनर्निर्माण का प्रत्यक्ष प्रतीक है। इस शुभ आरंभ के साथ, मंत्रिमंडल ने एक ऐसे भविष्य का स्वागत किया जिसकी नींव सदियों के प्रयासों से रखी गई है। यह देखा गया कि स्वतंत्रता के बाद कई दशकों तक, सरकारों ने दक्षिण ब्लॉक स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय से कार्य किया, अतीत की विरासत को संरक्षित करते हुए भविष्य की परिकल्पना की।
 

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यह भी कहा गया कि 'सेवा तीर्थ' का निर्माण ब्रिटिश काल की अस्थायी बैरकों के स्थान पर किया गया है। उस स्थान पर राष्ट्रीय शासन की एक सक्रिय संस्था की स्थापना भी नए भारत के रूपांतरण का प्रतीक है। मंत्रिमंडल ने कहा कि औपनिवेशिक शासन काल से पहले, भारत एक ऐसा राष्ट्र था जो अपनी भौतिक समृद्धि और मानवीय मूल्यों दोनों के लिए जाना जाता था। सेवा तीर्थ की अवधारणा इन्हीं दोनों आदर्शों के संगम से उत्पन्न हुई है। कर्तव्य, सेवा और समर्पण के पवित्र संगम के साथ, इस कार्यस्थल को तीर्थस्थल के समान पवित्र माना जाता है; यही इसकी मूल भावना है।

'सेवा तीर्थ' में आयोजित इस पहली बैठक के साथ, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अपने संकल्प को दोहराया कि यहां लिए गए प्रत्येक निर्णय 1.4 अरब नागरिकों के प्रति सेवा की भावना से प्रेरित होंगे और राष्ट्र निर्माण के व्यापक लक्ष्य से जुड़े होंगे। इसमें उल्लेख किया गया कि संवैधानिक मूल्य उस नैतिक प्रतिबद्धता की अभिव्यक्ति हैं जो शासन को प्रत्येक नागरिक की गरिमा, समानता और न्याय से जोड़ती है। 'सेवा तीर्थ' की कार्य संस्कृति इसी भावना से प्रेरित होगी, जहाँ प्रत्येक नीति संविधान के मूलभूत सिद्धांतों के अनुरूप होगी और प्रत्येक निर्णय जनता की आकांक्षाओं के प्रति जवाबदेह होगा।
 

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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अपने संकल्प को दोहराया कि इस परिसर में लिए गए प्रत्येक निर्णय 'नागरिक देवो भव' की भावना से प्रेरित होंगे। यह स्थान शक्ति प्रदर्शन का केंद्र नहीं, बल्कि प्रत्येक भारतीय के सशक्तिकरण का केंद्र होगा। सेवा तीर्थ से संचालित शासन का प्रत्येक प्रयास देश के अंतिम व्यक्ति के जीवन को सरल बनाने की भावना से जुड़ा रहेगा। मंत्रिमंडल ने पुनः पुष्टि की कि अपनी दृष्टि के अनुरूप, वे पारदर्शी, जागरूक और नागरिकों की भावनाओं के प्रति संवेदनशील शासन मॉडल को और मजबूत करेंगे।

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Seva Teerth में Modi Cabinet की पहली बैठक में लिये गये कई ऐतिहासिक फैसले

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज सेवा तीर्थ में केंद्रीय मंत्रिमंडल की पहली बैठक हुई जिसमें अनेक महत्वपूर्ण फैसले लिये गये। इन निर्णयों में विकास, रोजगार, किसानों की आय, बेहतर रेल और हवाई संपर्क तथा हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने जैसे महत्वपूर्ण पहलू शामिल हैं। इन फैसलों से देश के विभिन्न क्षेत्रों में नई ऊर्जा, बेहतर सुविधाएं और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।

जहां तक मंत्रिमंडल की बैठक में लिये गये फैसलों की बात है तो आपको बता दें कि सरकार ने केरल राज्य का नाम बदलकर केरलम करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। यह निर्णय राज्य विधानसभा के सर्वसम्मत प्रस्ताव के अनुरूप है। संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। यह कदम भाषा आधारित राज्यों की ऐतिहासिक भावना का सम्मान है और स्थानीय पहचान को संवैधानिक मान्यता देने का उदाहरण भी है।

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इसके अलावा, करीब 9072 करोड़ रुपये की लागत से महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड के आठ जिलों में तीन मल्टी ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। 307 किलोमीटर रेल नेटवर्क का विस्तार लगभग 5407 गांवों और 98 लाख आबादी को बेहतर संपर्क देगा। इससे माल परिवहन क्षमता में 52 मिलियन टन प्रतिवर्ष की वृद्धि होगी। कोयला, इस्पात, सीमेंट और खाद्यान्न जैसी वस्तुओं के परिवहन में सुगमता आएगी। तेल आयात में कमी और कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय गिरावट से पर्यावरणीय लक्ष्यों को भी बल मिलेगा।

इसके अलावा, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने POWERGRID को प्रति सहायक कंपनी 7500 करोड़ रुपये तक निवेश की अनुमति देकर ऊर्जा क्षेत्र को नई गति दी है। इससे 500 गीगावाट गैर जीवाश्म ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी। अल्ट्रा हाई वोल्टेज और हाई वोल्टेज डायरेक्ट करंट जैसी उन्नत ट्रांसमिशन परियोजनाओं में भागीदारी से सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा उपभोक्ताओं तक पहुंचेगी।

साथ ही विपणन सत्र 2026-27 के लिए कच्चे जूट का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5925 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जो उत्पादन लागत से 61.8 प्रतिशत अधिक है। 2014-15 में 2400 रुपये से बढ़कर अब 5925 रुपये तक पहुंचना किसानों की आय में ठोस वृद्धि का संकेत है।

साथ ही श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 1677 करोड़ रुपये की लागत से सिविल एन्क्लेव का विस्तार कश्मीर घाटी में पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा देगा। 1 करोड़ वार्षिक यात्रियों की क्षमता वाला आधुनिक टर्मिनल स्थानीय संस्कृति की झलक के साथ विकसित किया जाएगा। इससे डल झील और अन्य पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी। इसी तरह अहमदाबाद मेट्रो का विस्तार गिफ्ट सिटी से शाहपुर तक 3.33 किलोमीटर तक किया जाएगा। लगभग 1067 करोड़ रुपये की इस परियोजना से व्यापार, रोजगार और शिक्षा से जुड़ी आवाजाही सुगम होगी तथा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

देखा जाये तो हाल ही में उद्घाटित प्रधानमंत्री के नये कार्यालय सेवा तीर्थ की पहली कैबिनेट बैठक का महत्व प्रतीकात्मक भी है। यह संदेश देता है कि सरकार विकास को राष्ट्र सेवा का माध्यम मानती है। रेल, ऊर्जा, कृषि और विमानन में लिए गए निर्णय समावेशी विकास की सोच को प्रतिबिंबित करते हैं। आधारभूत ढांचे के विस्तार से रोजगार सृजन, क्षेत्रीय संतुलन और पर्यावरण संरक्षण तीनों को समान महत्व दिया गया है।

आज के फैसलों को देखें तो एक चीज और उभर कर आती है कि आगामी केरल, पश्चिम बंगाल और असम विधानसभा चुनावों पर इन निर्णयों का सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। केरल में नाम परिवर्तन का निर्णय सांस्कृतिक सम्मान का संदेश देगा। पश्चिम बंगाल और असम में जूट किसानों को बढ़ा एमएसपी सीधा लाभ पहुंचाएगा। पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में रेल तथा हवाई संपर्क के विस्तार से विकास की नई संभावनाएं खुलेंगी, जिससे मतदाताओं में विश्वास मजबूत होगा। समग्र रूप से देखा जाए तो मोदी सरकार के ये फैसले दीर्घकालिक विकास, आत्मनिर्भरता और जनकल्याण के स्पष्ट संकेत हैं। सेवा और समर्पण की भावना से प्रेरित यह दृष्टिकोण भारत को नई ऊंचाइयों की ओर ले जाने में सहायक सिद्ध होगा।

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