Holi 2026: राजस्थान की अनोखी होली, जहां जिंदा युवक की निकलती है रथ यात्रा, 400 साल से चली आ रही है यह परंपरा
Bhilwara Holi Tradition: राजस्थान में होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं है. यहां हर इलाके की अपनी अलग परंपरा है. इन्हीं परंपराओं में एक बेहद रस्म भीलवाड़ा में देखने को मिलती है. होली के बाद यहां एक जिंदा युवक की शव यात्रा निकाली जाती है. उसे कफन पहनाया जाता है और अंतिम संस्कार तक की तैयारी की जाती है. हालांकि यह कोई शोक नहीं, बल्कि आस्था और उत्सव से जुड़ी परंपरा है. चलिए जानते हैं कैसे निभाई जाती है यह अनोखी परंपरा.
400 साल पुरानी परंपरा की कहानी
भीलवाड़ा में इस अनोखे आयोजन को इला जी का डोल या मुर्दे की सवारी कहा जाता है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह परंपरा लगभग 400 साल पुरानी है. यह आयोजन होली के सात दिन बाद, यानी शीतला सप्तमी के दिन किया जाता है. लोगों का मानना है कि यह रस्म बुराई और नकारात्मकता को विदा करती है. इसके साथ ही जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मक शुरुआत का संदेश देती है.
कैसे निभाई जाती है यह अनोखी परंपरा?
परंपरा के अनुसार, चित्तौड़ वालों की हवेली से एक युवक को चुना जाता है. युवक को कफन ओढ़ाकर अर्थी पर लिटाया जाता है. इसके बाद ढोल-नगाड़ों और गाजे-बाजे के साथ उसकी शव यात्रा निकाली जाती है. युवक पूरी यात्रा के दौरान शांत रहता है. रास्ते में लोग गुलाल उड़ाते हैं. नाचते-गाते जुलूस में शामिल होते हैं. यहां माहौल शोक का नहीं, बल्कि उत्सव जैसा होता है.
श्मशान में होता है सबसे चौंकाने वाला दृश्य
इस परंपरा का सबसे रोमांचक पल श्मशान घाट पर आता है. अंतिम संस्कार से ठीक पहले अर्थी पर लेटा युवक अचानक उठकर भाग जाता है. इसके बाद उसकी जगह घास-फूस से बना पुतला रखा जाता है. फिर उसी पुतले का विधिवत अंतिम संस्कार किया जाता है. इस नजारे को देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं.
क्या है मुर्दे की सवारी का संदेश?
भीलवाड़ा की यह परंपरा केवल एक धार्मिक रस्म नहीं है. इसके पीछे जीवन का गहरा संदेश छिपा है. यह बताती है कि बुराइयों और नकारात्मक सोच का अंत जरूरी है. पुराने दुखों को छोड़कर आगे बढ़ना ही जीवन है. शीतला सप्तमी के दिन पूरे शहर में मेले जैसा माहौल रहता है. स्थानीय लोगों के साथ-साथ अन्य राज्यों से भी पर्यटक आते हैं. इला जी का डोल आज भी यही सिखाता है कि हर अंत के बाद एक नई शुरुआत होती है.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. न्यूज नेशन इसकी पुष्टि नहीं करता है.
उत्तर कोरिया में किम फैमिली की पकड़ और मजबूत, 'उन' की बहन का बढ़ा कद
सोल, 24 फरवरी (आईएएनएस)। नॉर्थ कोरिया की सत्ताधारी पार्टी ने अपने नेता किम जोंग उन की छोटी बहन को एक शीर्ष पद पर बिठा दिया है। सरकारी मीडिया ने मंगलवार को कहा, यह उनके असर का संकेत है।
सत्ताधारी वर्कर्स पार्टी के नामचीन नेता पांच साल में एक बार होने वाले समिट के लिए राजधानी प्योंगयांग में जमा हुए हैं। यह एक ऐसा जमावड़ा है जो डिप्लोमेसी से लेकर युद्ध की प्लानिंग तक हर चीज पर सरकारी कोशिशों को निर्देशित करता है।
योनहाप न्यूज एजेंसी ने कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) के हवाले से बताया कि किम यो जोंग, जिन्हें लंबे समय से अपने भाई के सबसे करीबी लेफ्टिनेंट में से एक माना जाता है, को पार्टी की शीर्ष केन्द्र समिति में डिपार्टमेंट डायरेक्टर (विभाग निदेशक) के पद पर प्रमोट किया गया है।
हालांकि यह साफ नहीं किया गया है कि वह कौन से विभाग का नेतृत्व करेंगी, लेकिन वह पहले पार्टी की प्रोपेगैंडा यूनिट में एक सीनियर रोल निभा चुकी हैं।
कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) ने सत्ताधारी दल की नौवीं सेंट्रल कमेटी की पहली प्लेनरी बैठक से एक प्रेस रिलीज जारी किया, जिसमें किम यो-जोंग को पार्टी की नई सेंट्रल कमेटी के 17 नए चुने गए डिपार्टमेंट डायरेक्टर में से एक बताया गया। एक दिन पहले ही उनके भाई और देश के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन को पार्टी ने दोबारा महासचिव पद के लिए चुना था।
यो पहले कमेटी में विभाग की उप निदेशक थीं। विशेषज्ञों के हवाले से योनहाप ने कहा है कि अपनी नई भूमिका में, वह इंटर-कोरियन रिलेशन या बाहरी स्ट्रेटेजी देख सकती हैं। सोल के यूनिफिकेशन मिनिस्ट्री के एक अधिकारी ने कहा कि सरकार की इस पर पूरी नजर है।
किम यो जोंग 2018 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तब छाई थीं, जब उन्हें प्योंगचांग विंटर ओलंपिक्स के लिए नॉर्थ कोरिया की दूत के तौर पर सोल भेजा गया था। उस ट्रिप के साथ, वह कोरियन वॉर के बाद साउथ में कदम रखने वाली किम खानदान की पहली सदस्य बन गई थीं।
--आईएएनएस
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