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Ranchi में JPSC परीक्षा विवाद पर 5 लोग भूख हड़ताल पर बैठे, विरोध प्रदर्शन तेज हुआ

रांची, पांच अगस्त झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन तेज हो गया है और राज्य विधानसभा का मानसून सत्र बृहस्पतिवार से शुरू होने से पहले यहां दो महिलाओं सहित पांच लोगों ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है। ये पांचों प्रदर्शनकारी जेपीएससी, जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच के बैनर तले मंगलवार रात जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में भूख हड़ताल पर बैठ गए और इसके साथ ही अनशन पर बैठे लोगों की संख्या बढ़कर छह हो गई है। इसी स्थान पर झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के सदस्य देवेन्द्र नाथ महतो का धरना बुधवार को चौथे दिन भी जारी रहा।

पिछले 10 दिनों से दोनों समूह 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) परीक्षा रद्द करने तथा झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) में सुधार की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा प्रदर्शनकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या राज्य से बाहर के उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के एक स्वतंत्र पैनल से जांच कराने की भी मांग कर रहे हैं। जेपीएससी, जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच के प्रवक्ता जीवन कुमार ने कहा, हमारी मांगों के समर्थन में दो महिलाओं समेत हमारे पांच साथी मंगलवार रात से भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं।

उन्होंने बताया कि छात्रों की मांगों के समर्थन में तिरंगा मार्च निकालने पर फैसला करने के लिए जल्द ही कोर कमेटी की बैठक बुलाई जाएगी। भूख हड़ताल पर बैठीं दोनों महिलाओं में से एक सबिता कुमारी ने कहा कि सरकार द्वारा उनकी मांगें पूरी नहीं किए जाने के कारण उन्हें इस तरह से विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ा। वहीं, एक अन्य प्रदर्शनकारी हबीबा ने कहा, मुख्यमंत्री हमारे अभिभावक की तरह हैं।

जब बच्चे भूखे होते हैं तो अभिभावकों को भी दर्द होता है। इसलिए हमें उम्मीद है कि वह हमारी शिकायतों और मांगों पर ध्यान देंगे। उन्होंने कहा, मुख्यमंत्री कहते हैं कि सरकार संवेदनशील है।

हो सकता है कि ऐसा हो, लेकिन हमें आश्वासन नहीं, कार्रवाई और न्याय चाहिए। वहीं, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को कहा था कि उनकी सरकार प्रदर्शन कर रहे नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों की चिंताओं के प्रति गंभीर है और इस संबंध में उचित समय पर निर्णय लिया जाएगा। सोरेन ने रांची में संवाददाताओं से कहा, उनकी मांगों और सवालों के समाधान से जुड़े फैसले पूरी गंभीरता और बारीकी से जांच के बाद उपयुक्त समय पर घोषित किये जाएंगे।

मुझे विश्वास है कि प्रदर्शनकारी इससे आश्वस्त होंगे। झारखंड पुलिस के अपराध जांच विभाग (सीआईडी) ने कथित अनियमितताओं के सिलसिले में अब तक 14 लोगों को गिरफ्तार किया है। वहीं, बढ़ते विरोध-प्रदर्शन के बीच जेपीएससी ने अपरिहार्य परिस्थितियों का हवाला देते हुए 25 से 27 जुलाई तक होने वाली संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा स्थगित कर दी है।

सीआईडी ने भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के सिलसिले में 28 जुलाई से अब तक जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते से चार बार पूछताछ की है। इसके अलावा, जांच के तहत राज्य में रांची, पलामू, हजारीबाग, बोकारो और धनबाद में 18 स्थानों पर छापेमारी की है।

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Supreme Court ने प्रदर्शनों पर कहा: भटके युवाओं को परामर्श दें, पुलिस बरते संयम

नयी दिल्ली, पांच अगस्त उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि विरोध-प्रदर्शनों के दौरान कानून-प्रवर्तन एजेंसियों को संयम बरतना चाहिए और कुछ ‘‘गुमराह तत्व’’ पथराव भी करें, तब भी युवाओं को शांत किया जाना चाहिए। न्यायालय ने 20 जुलाई को आयोजित ‘संसद चलो’ मार्च के आयोजकों के खिलाफ कथित तौर पर हिंसा भड़काने के आरोप में कार्रवाई के अनुरोध वाली याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमति जताई। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने एक सेवानिवृत्त वायुसेना अधिकारी की ओर से दायर इस याचिका को इसी तरह के विषय पर एक याचिका के साथ जोड़ दिया।

याचिकाकर्ता मनीष कुमार सोलंकी की ओर से पेश वकील रिजवान अहमद ने कहा, ‘‘15 दिन बीत चुके हैं... आयोजकों की जवाबदेही का क्या? वे एक चैनल से दूसरे चैनल पर जाकर भड़काऊ बयान दे रहे हैं और आग शांत करने के बजाय उसे भड़काने का काम कर रहे हैं।’’ राजस्थान में हाल में हुई कानून-व्यवस्था से जुड़ी एक घटना का जिक्र करते हुए वकील ने दलील दी कि सरकारों को प्रदर्शनकारियों की बात मानने के लिए ‘‘जरूरत से ज्यादा नहीं झुकना’’ चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘एक युवक की मौत हो चुकी है।

अगर सरकार राष्ट्रीय राजधानी से जुड़े मामले में हद से ज्यादा झुकती, तो क्या इससे राजस्थान में कोई मिसाल कायम नहीं होगी? वहां भी सरकार छात्रों की बात मानने के लिए जरूरत से ज्यादा झुकेगी। कल, अगर लखनऊ में डिग्री कॉलेज के छात्रों की कोई मांग हो और वे बसों पर पत्थर फेंकने लगें तो क्या उत्तर प्रदेश सरकार भी जरूरत से अधिक झुकेगी?’’ उनकी इस दलील पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि भले ही कुछ ‘‘गुमराह तत्व’’ पत्थर फेंके, लेकिन युवाओं को शांत करने और उन्हें सही सलाह देने की जरूरत है।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘उन्हें सलाह और ‘काउंसलिंग’ की जरूरत है। राज्य की ओर से कोई भी आक्रामक रवैया सामाजिक तनाव को और बढ़ा सकता है तथा हिंसा को और भड़का सकता है। इससे हर हाल में बचा जाना चाहिए।’’ वकील ने कहा कि सरकार दबाव में थी, सिर्फ इसी आधार पर पथराव में शामिल लोगों को बिना किसी सजा या जवाबदेही के यूं ही नहीं छोड़ दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘यह एक बहुत खतरनाक मिसाल है। तीन साल पहले किसान सिंघु बॉर्डर पर थे। कल ‘जेनरेशन अल्फा, बीटा, डेल्टा’ आएंगी।’’ वकील ने दलील दी कि संसद ‘‘लोकतंत्र का मंदिर’’ है।

उन्होंने कहा कि अगर 500 लोग परिसर में घुस जाते तो ‘‘कौन जानता है कि उनके पास हथियार था या नहीं?’’ उन्होंने कहा, ‘‘अगर वे गोली चला देते तो क्या होता? वे किसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर मार्च नहीं कर रहे थे। वे रेलवे लाइन पर मार्च नहीं कर रहे थे।

वे लोकतंत्र के मंदिर की ओर मार्च कर रहे थे। हर किसी को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।’’ प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए और किसी घटना के होने पर संयम बरतना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘सबसे जरूरी बात है शांतिपूर्ण मार्च को बढ़ावा देना।

कोई घटना हो भी जाती है, तो पुलिस को भी बहुत संयम बरतना होगा ताकि स्थिति हाथ से न निकले। ऐसी घटनाएं जहां भी हों, हमें उनसे बहुत सावधानी से निपटना चाहिए।’’ प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हमें बहुत सावधानी से कदम उठाने होंगे, ताकि ये युवा हिंसा का रास्ता नहीं अपनाएं। बेहतर तरीका यह है कि उन्हें परामर्श दिया जाए और उनकी नाराजगी को शांत किया जाए।

सबसे प्रभावी उपाय उनकी बात सुनना है। उनकी बात सुनिए और समझिए कि वे क्यों नारे लगा रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन हम इसे कानून-प्रवर्तन एजेंसियों की समझ-बूझ पर छोड़ते हैं। वे आपसे भी बेहतर जानते हैं और हमसे भी बेहतर जानते हैं कि ऐसी स्थिति से कैसे निपटना है।’’ याचिका में यह निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है कि पुलिस और सुरक्षा बलों के कर्मियों के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक का इस्तेमाल करने वालों की पहचान की जाए और उनसे सामुदायिक सेवा कराई जाए।

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