यूपी के 45 हजार कर्मचारियों को योगी सरकार का तोहफा, सैलरी में की गई इतनी बढ़ोतरी
UP News: योगी सरकार राज्य के कर्मचारियों को लगातार सौगात रही है. अब राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश के सभी डिस्टलरी कर्मचारियों को होली का तोहफा दिया है. दरअसल, योगी सरकार ने डिस्टलरी कर्मचारियों की सैलेरी रिवाइज कर दी गई है. सरकार ने इनके वेतन में 2100 रुपये प्रति माह का इजाफा किया है. यूपी के प्रमुख सचिव श्रम के हस्ताक्षर होते ही कर्मचारियों को बढ़े हुए वेतन के साथ एरियर का लाभ भी मिल जाएगा. बता दें कि उत्तर प्रदेश में 104 डिस्टलरियों का संचालन होता है. जिनमें करीब 45 हजार कर्मचारी काम करते हैं.
सितंबर 2022 में रिवाइज होना था वेतन
बताया जा रहा है कि डिस्टलरी कर्मचारियों का वेतन सितंबर 2022 में ही रिवाइज किया जाना था लेकिन किसी कारण सैलरी रिवाइज नहीं हो पाई ये लगातार आगे बढ़ती रही. पिछले महीने श्रमायुक्त ने डिस्टलरी कर्मियों के वेतन रिवीजन को लेकर तीन पक्षीय बैठक की थी. जिसमें कर्मचारियों के पक्ष से ट्रेड यूनियन, फैक्ट्री प्रबंधन और श्रम विभाग के अधिकारियों ने वेतन वृद्धि पर चर्चा की थी. इसके बाद वेतन वृद्धि पर आम सहमति बन गई और करीब 2100 रुपये बढ़ोतरी का फैसला लिया गया.
टैक्स सबसे अधिक लेकिन सैलरी सबसे कम
उत्तर प्रदेश डिस्टलरी मजदूर संघ के महामंत्री राकेश कुमार वत्स का कहना है कि वेतन वृद्धि के बाद कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 22 से 23 हजार रुपये प्रति माह हो जाएगा. जबकि सुपरवाइजर स्तर पर अधिकतम वेतन 28 से 30 हजार रुपये होगा. उन्होंने कहा कि राज्य में उत्पाद पर अंकित एमआरपी का 50 से 65 प्रतिशत टैक्स डिस्टलरी कंपनियां सरकार को देती हैं. बावजूद इसके इन कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों को सामान्य जीवन यापन के लिए उचित वेतन नहीं मिलता. वहीं श्रमायुक्त मार्कण्डेय शाही ने कहा कि डिस्टलरी कंपनियों के कर्मियों का वेतन रिवाइज कर दिया गया है. जिससे उन्हें करीब 2100 रुपये वेतन वृद्धि का लाभ होगा.
राज्य में डिस्टिलरी प्लांट को मिलेगा बढ़ावा
बता दें कि राज्य में औद्योगिक निवेश को गति देने और राजस्व संसाधनों को सशक्त बनाने के लिए योगी सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है. दरअसल, आबकारी विभाग द्वारा नई आबकारी नीति 2026-27 पर मंथन चल रहा है. नई नीति के तहत राज्य में डिस्टिलरी प्लांट की स्थापना को प्रोत्साहित करने की योजना है. इसके साथ ही निर्यात को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न सुविधाओं पर भी विचार विमर्श किया जा रहा है. नई आबकारी नीति से निवेशकों में भरोसा बढ़ेगा. इसी के लिए आबकारी विभाग को राजस्व वृद्धि के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए हैं.
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ऑस्ट्रेलिया: बोंडी बीच हमले के बाद गठित रॉयल कमीशन ने शुरू की जांच
सिडनी, 24 फरवरी (आईएएनएस)। ऑस्ट्रेलिया में दिसंबर 2025 में बोंडी बीच पर यहूदी त्योहार हनुक्का में हुई सामूहिक शूटिंग के बाद, देश की सबसे शक्तिशाली जांच एजेंसी रॉयल कमीशन ने एंटी-सेमिटिज्म और सोशल कोहेसन को लेकर जांच शुरू कर दी है।
मंगलवार को कमीशन की आयुक्त वर्जीनिया बेल ने उद्घाटन भाषण में कहा कि यह जांच बोंडी टेरर अटैक की परिस्थितियों का परीक्षण करेगी, जिसमें 15 लोगों की मौत हुई थी। उन्होंने यहूदी ऑस्ट्रेलियंस से एंटी-सेमिटिज्म के अनुभव साझा करने की अपील की।
बेल ने कहा, कमीशन को उस इवेंट के लिए सुरक्षा व्यवस्था की जांच करनी है और यह रिपोर्ट करनी है कि क्या हमारी इंटेलिजेंस और कानून लागू करने वाली एजेंसियों ने पूरी तरह से असरदार तरीके से काम किया।
रॉयल कमीशन इस घटना को एंटी-सेमिटिज्म के व्यापक संदर्भ में जांच रही है, जिसमें सोशल कोहेसन (सामाजिक एकता) पर फोकस होगा।
कमीशन यहूदी समुदाय में बढ़ते एंटी-सेमिटिज्म के मामलों और स्कूलों और यूनिवर्सिटी में होने वाली घटनाओं का अध्ययन करेगा और दिसंबर 2026 तक अपनी रिपोर्ट सौंपेगा।
बेल ने ऑनलाइन सबूत पेश किए जाने का भी विकल्प रखा है। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति ऑनलाइन सबमिशन कर सकता है, और किसी पर भी पब्लिक में सबूत देने का दबाव नहीं डाला जाएगा।
कमीशन की मदद कर रहे वरिष्ठ वकील रिचर्ड लैंकेस्टर ने बोंडी शूटिंग को सच में एक डरावनी घटना बताया और माना कि इस हमले से यहूदी ऑस्ट्रेलियाई लोगों को बहुत ज्यादा ट्रॉमा हुआ है।
हनुक्का फेस्टिवल में गोलीबारी करने वाले हमलावरों (साजिद अकरम और उसका बेटा नवीद अकरम) को पुलिस ने इस्लामिक स्टेट से प्रेरित बताया था।
साजिद अकरम को पुलिस ने मौके पर ही गोली मार दी, जबकि घायल नवीद अकरम बच गया था।
24 साल के नवीद की कोर्ट में पेशी भी हो चुकी है। वो 59 मामलों में आरोपी है। जिसमें 15 मर्डर और एक टेररिस्ट अटैक करने का चार्ज भी शामिल है।
--आईएएनएस
केआर/
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