भागवत बोले- आरक्षण 200 साल भी देना पड़े तो सही:उन्होंने दो हजार सालों तक भेदभाव सहा, फिर भी देश के साथ गद्दारी नहीं की
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि हिंदू समाज के एक हिस्से ने करीब दो हजार साल तक छुआछूत और भेदभाव सहा, लेकिन फिर भी उसने देश के साथ कभी विश्वासघात नहीं किया। उन्होंने कहा, ऐसे लोगों को बराबरी का हक दिलाने के लिए अगर दो सौ साल तक भी आरक्षण देना पड़े, तो समाज को इसके लिए तैयार रहना चाहिए। अगर अपने ही भाइयों को आगे बढ़ाने के लिए हमें कुछ नुकसान भी सहना पड़े, तो भी हमें पीछे नहीं हटना चाहिए। RSS प्रमुख सोमवार को उत्तराखंड के देहरादून में हिमालयन कल्चरल सेंटर में आयोजित 'प्रमुखजन गोष्ठी' में पूर्व सैनिकों और अधिकारियों के साथ संवाद कर रहे थे। इस दौरान भागवत ने कहा कि भारत में रहने वाले सभी लोगों के पूर्वज एक हैं और उनकी रगों में एक ही खून बहता है। हिंदू बनने के लिए कुछ छोड़ना नहीं पड़ता, देश के प्रति निष्ठा ही पर्याप्त है और आज जिनका विरोध है, उन्हें भी कल जोड़ना है। सवाल जवाब में पढ़िए कार्यक्रम में क्या बोले भागवत… सवाल: अग्निवीर योजना को लेकर उठ रही शंकाओं और सुधार की जरूरत पर आप क्या सोचते हैं? जवाब: राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए मजबूत नेतृत्व, उच्च सैन्य तैयारी और निरंतर प्रशिक्षण अनिवार्य हैं। अग्निवीर योजना एक प्रयोग है। अनुभवों के आधार पर इसकी समीक्षा की जानी चाहिए और आवश्यकता हो तो सुधार एवं परिमार्जन पर विचार किया जाना चाहिए, ताकि सेना की क्षमता, अनुशासन और दीर्घकालिक मजबूती बनी रहे। सवाल: क्या राष्ट्र की शक्ति सीधे समाज की शक्ति पर निर्भर करती है? जवाब: राष्ट्र के भाग्य निर्माण में समाज की केंद्रीय भूमिका होती है। समाज मजबूत और संगठित होगा तो राष्ट्र की रक्षा भी सशक्त होगी। समाज का सामूहिक सामर्थ्य नागरिकों को बल देता है और नेतृत्व को प्रभावी बनाता है, इसलिए नेतृत्व का चरित्रवान और अनुशासित होना आवश्यक है। सवाल: इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन हमें क्या सिखाते हैं? जवाब: 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर क्रांतिकारी आंदोलनों तक स्वतंत्रता की ज्योति कभी बुझी नहीं। इतिहास से सीख लेना परिपक्व राष्ट्रीय चेतना का लक्षण है। सवाल: क्या स्वतंत्रता के बाद सामाजिक और राजनीतिक दिशा में विचलन आया? जवाब: स्वतंत्रता के बाद कई राजनीतिक दल अपने मूल मार्ग से भटक गए। समाज की एकता ही व्यक्तियों और नेतृत्व को शक्ति देती है; समाज कमजोर होगा तो नेतृत्व प्रभावी नहीं रह सकता। सामाजिक शक्ति ही व्यक्तियों और नेतृत्व को बल देती है। यदि समाज में भेदभाव और विभाजन रहेगा तो राष्ट्र की शक्ति कमजोर होगी। सवाल: आरक्षण को सामाजिक न्याय के रूप में क्यों जरूरी बताया गया? जवाब: हिंदू समाज के एक हिस्से ने लगभग दो हजार वर्षों तक अस्पृश्यता और भेदभाव सहा, फिर भी देश के साथ गद्दारी नहीं की। उन्हें बराबरी का स्थान देने के लिए यदि दो सौ वर्ष भी आरक्षण देना पड़े तो समाज को तैयार रहना चाहिए। अपने भाइयों के उत्थान के लिए नुकसान भी सहना पड़े तो सहेंगे। सवाल: क्या भारत की विविध पूजा पद्धतियों के बावजूद सांस्कृतिक एकता संभव है? जवाब: भारत में अनेक पूजा पद्धतियां हैं और उनसे कोई विरोध नहीं है। सभी के पूर्वज एक हैं और सभी की रगों में एक ही खून है। हिंदू बनने के लिए कुछ छोड़ना नहीं पड़ता; देश के प्रति निष्ठा ही पर्याप्त है। आज जिनका विरोध है, उन्हें भी कल जोड़ना है, वे अपने ही हैं। सवाल: सामाजिक समरसता व्यवहार में कैसे दिखनी चाहिए? जवाब: मंदिर, जल स्रोत और श्मशान जैसे सार्वजनिक संसाधन सभी के लिए समान रूप से खुले होने चाहिए। सामाजिक समरसता का अर्थ व्यवहार में समानता से है। भारतीय दृष्टि जड़ और चेतन सबको अपना मानती है और ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना इसका मूल है। धर्म समाज और मानवता को धारण करने वाला तत्व है और हिंदू विचार स्वभाव से उदार एवं समावेशी है। सवाल: विदेशी घुसपैठ को राष्ट्रीय सुरक्षा से क्यों जोड़ा गया? जवाब: विदेशी घुसपैठ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जा सकती। घुसपैठियों की पहचान स्पष्ट हो और उन्हें रोजगार नहीं दिया जाना चाहिए। यह राष्ट्रीय सुरक्षा और देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ा विषय है। सवाल: कश्मीर और पाकिस्तान के संदर्भ में संतुलित दृष्टिकोण क्यों जरूरी है? जवाब: कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है। भारत-पाक संबंध जैसे भी हों, दोनों देशों के नागरिकों में सद्भावना रहनी चाहिए। पाकिस्तान में स्थिरता और शांति का सकारात्मक प्रभाव भारत पर भी पड़ेगा। सवाल: समान नागरिक संहिता को राष्ट्रीय एकता से कैसे जोड़ा गया? जवाब: भारत विविधता को स्वीकार करता है, लेकिन नागरिक व्यवस्था में समानता लोगों को साथ चलने में मदद करती है। व्यापक संवाद, सुझाव और सहमति के आधार पर समान नागरिक संहिता लागू की जानी चाहिए। इससे समाज में एकरूपता और एकता को बल मिल सकता है। यदि इसे लागू करने से समाज में झगड़े की स्थिति बने तो उस पर विचार करना होगा। व्यापक संवाद और सहमति के आधार पर लागू होने पर इसे स्वीकार करना आसान होता है। सवाल: जनसंख्या असंतुलन को लेकर चिंता जताई जाती है इससे कैसे निपटें? जवाब: जनसंख्या, संसाधन, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण और महिलाओं की स्थिति को ध्यान में रखकर समग्र रणनीति बनानी चाहिए। जनसंख्या असंतुलन से देश टूटते हैं, जबकि संतुलित नीति से जनसंख्या विकास का प्रभावी साधन बन सकती है। मतांतरण, घुसपैठ और जन्मदर को इसके प्रमुख कारणों में बताया गया और इस विषय पर दूरदर्शी नीति बनाने की आवश्यकता है। संतुलित नीति, संसाधनों का सही प्रबंधन और सामाजिक जागरूकता से जनसंख्या बोझ नहीं बल्कि विकास का प्रभावी साधन बन सकती है। ----------- ये खबर भी पढ़ें… 'संघ को कोई अर्धसैनिक संगठन तो कोई मंडली समझता है':देहरादून में बोले RSS प्रमुख भागवत- जो ऊपर से दिखता है वो हमेशा सच नहीं देहरादून में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा- देश संचालन में महिलाओं की भागीदारी 33% तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे 50% तक होना चाहिए। (पढ़ें पूरी खबर)
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Protest Against Congress LIVE: Rahul को फाइनल अल्टीमेटम! पूरी कांग्रेस में पसरा सन्नाटा! | Breaking भारत मंडपम में अंतरराष्ट्रीय एआई समिट के दौरान यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं प्रदर्शन को लेकर बीजेपी नेता संबित पात्रा ने कहा कि यह कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति थी..जिसके बाद राहुल गांधी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं... #BJPProtest #RahulGandhiHouseProtest #RahulGandhi #AISummit #RahulGandhiResidence #BJPvsCongress #SambitPatra #IndiaAISummit #CongressProtest #TughlakLane #YouthCongress #RahulGandhiControversy #PriyankaGandhi #SoniaGandhi #PoliticalRow #AIImpactSummit #ShamefulProtest #RahulMeetsKharge #BJPAttack #CongressBacklash #BreakingNews #IndiaNews #LokSabha #RahulGandhiNews ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------ Disclaimer: Republic Media Network may provide content through third-party websites, operating systems, platforms, and portals (‘Third-Party Platforms’). Republic does not control and has no liability for Third-Party Platforms, including content hosted, advertisements, security, functionality, operation, or availability. ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------ रिपब्लिक भारत देश का नंबर वन न्यूज चैनल है। देश और दुनिया की जनहित से जुड़ी ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल और मनोरंजन की खबरों का खजाना है । इस खजाने तक पहुंचने के लिए रिपब्लिक भारत से जुड़े रहिए और सब्सक्राइब करिए। ► http://bit.ly/RBharat R. Bharat TV - India's no.1 Hindi news channel keeps you updated with non-stop LIVE and breaking news. Watch the latest reports on political news, sports news, entertainment, and much more. आप Republic Bharat से जुड़ें और अपडेट्स पाएं! ???? Facebook: https://www.facebook.com/RepublicBharatHindi/ ???? Twitter: https://twitter.com/Republic_Bharat ???? Instagram: https://www.instagram.com/republicbharat/ ???? WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029Va7GPTi7dmecQ2LFH01I ???? Telegram: https://t.me/RepublicBharatHindi ???? LinkedIn: https://www.linkedin.com/company/republic-bharat/
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