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जनवरी में कमर्शियल व्हीकल बिक्री में जोरदार उछाल, वित्त वर्ष 2026 में 7-9 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान

नई दिल्ली, 24 फरवरी (आईएएनएस)। भारतीय कमर्शियल व्हीकल (सीवी) उद्योग में जनवरी में थोक बिक्री (होलसेल) में 27 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई और कुल 99,544 यूनिट्स की बिक्री हुई। यह दिसंबर 2025 में दर्ज 97,682 यूनिट्स के मुकाबले 1.9 प्रतिशत की क्रमिक बढ़ोतरी भी दर्शाती है।

आईसीआरए की रिपोर्ट के अनुसार, यह सालाना वृद्धि मुख्य रूप से 22 सितंबर 2025 से जीएसटी दर 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किए जाने के कारण हुई। साथ ही, माल ढुलाई गतिविधियों में बढ़ोतरी ने भी इस वृद्धि को समर्थन दिया।

मीडियम और हैवी कमर्शियल व्हीकल (एम एंड एचसीवी) सेगमेंट में जनवरी के दौरान रिटेल बिक्री में सालाना आधार पर 15.4 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। वहीं, क्रमिक आधार पर इसमें 22.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

वित्त वर्ष 2026 के पहले 10 महीनों में एम एंड एचसीवी सेगमेंट की रिटेल बिक्री में 6.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो जीएसटी दरों में कटौती के बाद मांग में सुधार का संकेत देती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, लाइट कमर्शियल व्हीकल (एलसीवी) सेगमेंट में जनवरी के दौरान रिटेल बिक्री में 14.9 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई।

वित्त वर्ष 2026 के पहले 10 महीनों में एलसीवी सेगमेंट की रिटेल बिक्री 11.1 प्रतिशत बढ़ी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 2026 के पहले 10 महीनों के दौरान घरेलू सीवी थोक बिक्री में 11.3 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई, जबकि इसी अवधि में रिटेल बिक्री में 8.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

घरेलू सीवी उद्योग वित्त वर्ष 2026 में थोक बिक्री में 7-9 प्रतिशत की मध्यम सालाना वृद्धि दर्ज कर सकता है। वित्त वर्ष 2027 में यह वृद्धि 4-6 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

एम एंड एचसीवी (ट्रक) सेगमेंट में 7-9 प्रतिशत और एलसीवी (ट्रक) सेगमेंट में 9-11 प्रतिशत सालाना वृद्धि की संभावना है।

रिपोर्ट के मुताबिक, बस सेगमेंट में चालू वित्त वर्ष के दौरान 8-10 प्रतिशत की सालाना वृद्धि देखने को मिल सकती है।

--आईएएनएस

डीबीपी/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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बिल्लियों को नहीं होती अपने मालिक की चिंता! क्या नहीं होती वफादार? रिसर्च में हुआ ये खुलासा

Cat Loyality: सालों से यह धारणा चली आ रही है कि कुत्ते अपने मालिकों से ज्यादा जुड़ाव रखते हैं जबकि बिल्लियां स्वभाव से ज्यादा स्वतंत्र होती हैं. अब एक नए अध्ययन ने इस सोच को वैज्ञानिक रूप से सही साबित कर दिया है. शोध के मुताबिक, बिल्लियां कुत्तों की तुलना में अधिक आत्मनिर्भर होती हैं और भावनात्मक रूप से अपने मालिकों पर उतनी निर्भर नहीं रहती हैं जितना की एक कुत्ता होता है. वे उनके बिना भी अपना भोजन का इंतजाम कर सकती है.

कहां की गई है रिसर्च?

यह अध्ययन हंगरी के इओट्वोस लोरैंड विश्वविद्यालय (Eötvös Loránd University) में किया गया है, जिसका नेतृत्व डॉ. पीटर पोंग्राकज ने किया है. उनके द्वारा किए गए शोध में पाया गया है कि जहां कुत्ते किसी समस्या या तनाव की स्थिति में अपने मालिक से आश्वासन और सुरक्षा की उम्मीद रखते हैं तो वहीं बिल्लियां ऐसी परिस्थितियों में अपने मालिक और अजनबी के बीच कोई खास फर्क नहीं करती है.

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6 स्थितियों में बिल्लियों को रखकर किया गया टेस्ट

इस अध्ययन के दौरान 'स्ट्रेंज सिचुएशन टेस्ट' का उपयोग किया गया, जिसे पहले कुत्तों पर भी आजमाया जा चुका है. इस प्रयोग में 15 'थेरेपी बिल्लियों' को छह अलग-अलग परिस्थितियों में रखा गया. इस परिस्थिति में कभी वे कमरे में अपने मालिक के साथ अकेली थीं, कभी अजनबी के साथ और कभी दोनों के साथ थी. कुछ समय के लिए मालिक को कमरे से बाहर भी भेजा गया और फिर वापस बुलाया गया, मगर उस बिल्ली को कोई फर्क महसूस नहीं हुआ.

रिजल्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

टेस्ट के परिणामों में पाया गया कि बिल्लियां अपने मालिक को अजनबी की तुलना में ज्यादा नहीं खोजती थीं. बिल्लियां मालिक के करीब न आने, दरवाजे तक पीछा करने या कमरे में आने पर एक्साइटिड भी नहीं दिखी जबकि कुत्तों में ऐसी भावनाएं होती है .

कुत्तों को होती है मालिक की ज्यादा जरूरत

शोधकर्ताओं के अनुसार, यह संकेत देता है कि बिल्ली और मालिक के बीच सुरक्षा जैसा कोई रिश्ता नहीं होता है जैसा अक्सर कुत्तों में देखा जाता है. कुत्ते अपने मालिक को एक सुरक्षित आधार मानते हैं, जहां से वे नई जगहों की खोज करने का आत्मविश्वास पाते हैं. लेकिन बिल्लियां अजनबियों के साथ भी कंफर्टेबल हो जाती है.

क्यों होती है बिल्लियां ऐसी?

रिसर्च करने वाली टीम के साइंटिस्टों का मानना है कि बिल्लियों के ऐसे व्यवहार का कारण उनका प्राकृतिक रूप से शिकारी होना हो सकता है. वे अपने भोजन का शिकार स्वयं करने में सक्षम होती हैं, इसलिए वे मनुष्यों पर अधिक निर्भर नहीं रहती है. वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर कोई मालिक अपनी बिल्ली को छोड़ देता है तो भी वह अपना खाना खुद शिकार करके खा सकती है और वह जंगली हो जाती है.

क्या बिल्लियां इंसान की दोस्त नहीं है?

हालांकि, वैज्ञानिकों का मानना है कि बिल्लियां इंसान की दोस्त होती है या नहीं ऐसा कहना मुश्किल है. बिल्ली दोस्त हो सकती है लेकिन भावनात्मक रूप से उतनी जुड़ी हुई नहीं होती है, जितना की कोई अन्य जानवर होता है. 

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