होली से पहले एसी-स्लीपर कोच फुल, फ्लाइट महंगी:देहरादून से दिल्ली-प्रयागराज रूट की ट्रेनों का स्टेटस नो रूम; वापसी में भी वेटिंग
होली से पहले ट्रेनें फुल हैं, फ्लाइट के किराए महंगे हो चुके हैं और बसों में सीटों को लेकर मारामारी मची है। देहरादून से देश के अलग-अलग हिस्सों के लिए चलने वाली कई ट्रेनों में नो रूम (इन ट्रेनों में वेटिंग टिकट भी जारी नहीं होगा, यानी सभी सीटें और वेटिंग कोटा फुल) की स्थिति बन गई है, जबकि वापसी की तारीखों में भी लंबी वेटिंग दिख रही है। होली के त्योहारी सीजन में घर लौटने की होड़ तेज हो गई है और 28 फरवरी से 2 मार्च के बीच एसी व स्लीपर कोच में कन्फर्म टिकट मिलना मुश्किल हो गया है। रेलवे के आरक्षण सिस्टम के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, होली से ठीक पहले की तारीखों में यात्रियों का दबाव चरम पर है। देहरादून से दिल्ली, प्रयागराज, अमृतसर, कोटा, गोरखपुर और गुजरात की ओर जाने वाली अधिकांश ट्रेनों में एसी और स्लीपर दोनों श्रेणियों में लंबी वेटिंग चल रही है। कई ट्रेनों में वेटिंग तीन अंकों तक पहुंच चुकी है और कुछ में ‘नो रूम’ का स्टेटस दिख रहा है। 3 मार्च के बाद कुछ ट्रेनों में आंशिक राहत जरूर दिखाई दे रही है, लेकिन 6 से 10 मार्च के बीच वापसी की तारीखों में फिर से आरएसी और वेटिंग तेजी से बढ़ रही है, जिससे साफ है कि त्योहार के बाद लौटने वाली भीड़ भी उतनी ही ज्यादा रहने वाली है। पहले जानिए ट्रेनों की स्थिति… हरादून-कोटा एसी एक्सप्रेस में भारी दबाव देहरादून से कोटा जाने वाली देहरादून-कोटा एसी एक्सप्रेस में होली से पहले जबरदस्त दबाव है। 28 फरवरी को थर्ड एसी (3A) में 26 और सेकंड एसी (2A) में 15 वेटिंग चल रही है। 1 मार्च को भी 3A में वेटिंग और 2A में आरएसी की स्थिति बनी हुई है। 2 मार्च को 3A में RAC 29 है, जबकि 2A में कुछ सीटें उपलब्ध हैं। हालांकि 3 मार्च को 3A में 98 और 2A में 18 सीटें खाली हैं, जिससे आंशिक राहत मिल रही है। लेकिन 6 से 8 मार्च के बीच फिर से 3A में आरएसी शुरू हो गई है, जो त्योहार के बाद लौटने वाली भीड़ का संकेत है। अमृतसर रूट पर भी सीटों की किल्लत देहरादून-अमृतसर एक्सप्रेस में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। 28 फरवरी को 3A में 27 और स्लीपर में RAC 31 की स्थिति है। 1 और 2 मार्च को भी दोनों श्रेणियों में लंबी वेटिंग बनी हुई है। 3 से 5 मार्च तक 3A में लगातार वेटिंग चल रही है। हालांकि 6 और 7 मार्च को स्लीपर में कुछ सीटें उपलब्ध हैं, लेकिन एसी कोच में दबाव बना हुआ है। इससे साफ है कि पंजाब की ओर जाने वाले यात्रियों की संख्या अधिक है। प्रयागराज (सूबेदारगंज) लिंक एक्सप्रेस लगभग फुल देहरादून से सूबेदारगंज (प्रयागराज) जाने वाली लिंक एक्सप्रेस में भी टिकट मिलना मुश्किल हो गया है। 28 फरवरी को 3A में 65 और 2A में 49 वेटिंग दर्ज की गई है। 1 और 2 मार्च को भी वेटिंग लंबी बनी हुई है। 3 मार्च को 3A में 19 और 2A में 11 वेटिंग है। स्लीपर क्लास में 28 फरवरी को वेटिंग 128 तक पहुंच गई है। 4 मार्च को 2A में कुछ सीटें उपलब्ध हैं, लेकिन 3A में आरएसी चल रहा है। वहीं 12 और 13 मार्च को भी आरएसी की स्थिति बनी हुई है, जिससे वापसी के दौरान भी भीड़ अधिक रहने का अनुमान है। काठगोदाम और दिल्ली रूट पर भी बढ़ा दबाव देहरादून-काठगोदाम एक्सप्रेस में 28 फरवरी को स्लीपर में 101 और फर्स्ट एसी में 4 वेटिंग है। 3 मार्च को स्लीपर में RAC 11 है, जबकि 6 मार्च को कुछ सीटें उपलब्ध हैं। देहरादून-नई दिल्ली जनशताब्दी एक्सप्रेस में अधिकांश तारीखों पर सीटें उपलब्ध हैं, लेकिन 5 मार्च को चेयर कार में 30 वेटिंग दर्ज की गई है। देहरादून-शताब्दी एक्सप्रेस में 28 फरवरी से 3 मार्च के बीच चेयर कार और एग्जीक्यूटिव क्लास में सीटें उपलब्ध हैं, जिससे यात्रियों को कुछ राहत मिल सकती है। वंदे भारत एक्सप्रेस में भी होली से पहले वेटिंग देहरादून से दिल्ली और आनंद विहार के बीच चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस में भी होली से पहले वेटिंग बढ़ गई है। 1 मार्च को चेयर कार में 98 तक वेटिंग दर्ज की गई है। 28 फरवरी को चेयर कार और एग्जीक्यूटिव क्लास दोनों में वेटिंग है। हालांकि 2 और 3 मार्च को कुछ सीटें उपलब्ध हैं, लेकिन 8 मार्च को फिर से वेटिंग शुरू हो गई है। गोरखपुर और गुजरात रूट की ट्रेनों में भी लंबी वेटिंग देहरादून-गोरखपुर राप्ती गंगा एक्सप्रेस में स्लीपर और एसी दोनों कोच में लंबी वेटिंग चल रही है। 26 फरवरी को स्लीपर में “नो रूम” की स्थिति है। मार्च के पहले सप्ताह में भी वेटिंग 70 से अधिक बनी हुई है। इसी तरह बंगाल जाने वाली कुंभ एक्सप्रेस और गुजरात के ओखा जाने वाली उत्तरांचल एक्सप्रेस में भी 2A, 3A और स्लीपर में लंबी वेटिंग दर्ज की गई है। कई तारीखों में इन ट्रेनों में भी नो रूम का स्टेटस दिख रहा है। फ्लाइट के किराए में भी जबरदस्त बढ़ोतरी रेलवे में भीड़ बढ़ने के साथ ही हवाई किराए में भी जबरदस्त उछाल आया है। जौलीग्रांट एयरपोर्ट से दिल्ली जाने वाली इंडिगो फ्लाइट का सामान्य किराया करीब 3000 रुपए है, लेकिन 28 फरवरी और 1 मार्च को यह बढ़कर 4174 से 5749 रुपए तक पहुंच गया है। मुंबई के लिए सामान्य किराया 7961 रुपए है, जो 28 फरवरी को 9301 और 1 मार्च को 9660 रुपए तक पहुंच गया। अहमदाबाद के लिए 5536 रुपए का किराया 28 फरवरी को 10,501 रुपए दिखा रहा है। बेंगलुरु के लिए सामान्य 8413 रुपए का किराया 9463 रुपए तक पहुंच गया है। जयपुर के लिए 4423 रुपए का किराया बढ़कर 8938 रुपए तक हो गया। बसों में भी सीटों के लिए मारामारी, किराया दोगुना देहरादून से लखनऊ और कानपुर जाने वाली स्लीपर वॉल्वो बसों में 28 फरवरी से सीटों को लेकर मारामारी है। आम दिनों में 1500 रुपए के आसपास रहने वाला किराया होली के आसपास 2500 से 3000 रुपए तक पहुंच गया है। बस ऑपरेटरों का कहना है कि एडवांस बुकिंग पहले ही फुल हो चुकी है और अब स्पॉट बुकिंग पर किराया ज्यादा लिया जा रहा है। 3 मार्च को आंशिक राहत, वापसी में भी भीड़ रेलवे के आंकड़ों से साफ है कि 28 फरवरी से 2 मार्च तक सबसे ज्यादा दबाव है। 3 मार्च को कई ट्रेनों में सीटें उपलब्ध हैं। हालांकि 6 से 10 मार्च के बीच वापसी की भीड़ के कारण फिर से वेटिंग बढ़ रही है। यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वे वैकल्पिक तारीखों और ट्रेनों की जांच करें। तत्काल कोटे में भी सीमित सीटें हैं, इसलिए अंतिम समय पर टिकट मिलना मुश्किल हो सकता है। होली के मद्देनजर देहरादून से निकलने वाली लगभग सभी प्रमुख ट्रेनों में जबरदस्त भीड़ है। एसी और स्लीपर दोनों श्रेणियों में लंबी वेटिंग लिस्ट चल रही है। फ्लाइट और बस किराए भी बढ़ चुके हैं। ऐसे में यात्रियों को समय रहते टिकट बुक कराने और यात्रा की वैकल्पिक योजना बनाने की जरूरत है। त्योहार पर घर जाने की उत्सुकता के बीच परिवहन साधनों पर बढ़ा दबाव साफ दिखाई दे रहा है। -------------------- ये खबर भी पढ़ें : चारधाम यात्रा में हवाई सफर होगा पहले से ज्यादा सेफ: तय रूटों पर चलेंगे हेलिकॉप्टर, हर दस सेकेंड में ट्रैकिंग, 30% तक कम होंगे टिकट देवभूमि उत्तराखंड में इस साल चारधाम यात्रा के दौरान केदारनाथ और बद्रीनाथ की उड़ान भरने वाले तीर्थयात्रियों के लिए हेलिकॉप्टर का सफर पहले से ज्यादा सेफ रहने वाला है। 2025 की यात्रा में 5 हेलिकॉप्टर हादसों में 13 लोगों की हुई मौत के बाद उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) और नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने सुरक्षा का एक नया 'ब्लूप्रिंट' तैयार किया है। इसमें 5 ऐसे बदलाव हैं जिनके कारण यात्री अब पहले से ज्यादा सुरक्षित तरीके से पवित्र धामों के दर्शन कर पाएंगे। (पढ़ें पूरी खबर)
बंजिंग जंपिंग- 65 वर्षीय गुरमीत ने खाई में लगाई छलांग:बेटे-बेटी ने चीयर कर कहा- गो मम्मी गो; लोग बोले- ये हैं असली वंडर वुमन
डर? वो क्या होता है? जब नीचे 117 मीटर गहरी खाई देखी, तो डर नहीं, रोमांच महसूस हुआ। बस मन में एक ही बात थी- आज तो उड़ना है। यह शब्द उस 65 वर्षीय महिला के हैं, जिन्होंने इस उम्र में वह कर दिखाया जिसे करने में अच्छे-भले युवाओं के पसीने छूट जाते हैं। मेरठ की रहने वाली गुरमीत सिंह ने ऋषिकेश की वादियों में 117 मीटर की ऊंचाई से बंजी जंपिंग कर न केवल एक नया कीर्तिमान रचा है, बल्कि उम्र को महज एक आंकड़ा साबित कर दिया है। उनका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा रहा है और लोग उन्हें 'वंडर वुमन' कह रहे हैं। बीती 18 फरवरी को जब मेरठ का यह परिवार ऋषिकेश पहुंचा, तो किसी ने नहीं सोचा था कि घर की सबसे बुजुर्ग सदस्य कुछ ऐसा करेंगी कि पूरा देश उनका कायल हो जाएगा। गुरमीत अपनी बेटी वर्षा चौधरी और अपने बेटे के साथ छुट्टियां बिताने आई थीं। ऋषिकेश के नीलकंठ रोड स्थित 'हिमालयन वन' बंजी जंपिंग सेंटर पर जब वह पहुंचीं, तो उनकी आंखों में डर की जगह एक चमक थी। बेटी वर्षा बताती हैं, मम्मी का यह प्लान काफी पुराना था। हम पहले भी यहां आए थे, तब भीड़ और वेटिंग की वजह से नंबर नहीं आया। इस बार मौका मिला तो मम्मी ने एक सेकंड की भी देरी नहीं की। हमने उन्हें बिल्कुल रोका नहीं , बल्कि चीयर किया- गो मम्मी गो! 117 मीटर की ऊंचाई से लहराया हाथ वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि जब ट्रेनर्स गुरमीत को हार्नेस (सुरक्षा बेल्ट) बांध रहे थे, तब भी उनके चेहरे पर मुस्कान थी। जैसे ही 'थ्री-टू-वन-बंजी' की आवाज गूंजी, गुरमीत ने बिना झिझके नीले आसमान और गहरी खाई के बीच छलांग लगा दी। हवा में झूलते हुए वह डर के मारे चीखीं नहीं, बल्कि दोनों हाथ लहराकर अपनी खुशी का इजहार करती रहीं। नीचे उतरने के बाद उनका पहला शब्द था- ‘एक बार और करा दो!’ दैनिक भास्कर से बात करते हुए गुरमीत सिंह 117 मीटर की ऊंचाई से छलांग लगाने के अनुभव को याद करते हुए हंस पड़ीं। उन्होंने कहा, “डर बिल्कुल नहीं लगा। नीचे गहरी खाई दिख रही थी, लेकिन मुझे अच्छा लग रहा था। यह मेरी विश-लिस्ट में था। मुझे एडवेंचर पसंद है। जब नीचे गिर रही थी, तो ऐसा लगा जैसे चिड़िया की तरह उड़ रही हूं। उन्होंने बताया- मेरा परिवार ही मेरी ताकत है। बच्चों ने कहा- अगर आपका मन है तो जरूर कीजिए। उनके प्रोत्साहन से ही मैंने छलांग लगाई। फिटनेस के सवाल पर गुरमीत सिंह ने इसे किसी खास डाइट या जिम से नहीं जोड़ा। उन्होंने कहा, मैं सादा जीवन जीती हूं। रोज टहलती हूं और खुश रहने की कोशिश करती हूं। परिवार के साथ समय बिताना ही मुझे ऊर्जा देता है। वही मुझे सक्रिय और जवान महसूस कराता है। बातचीत के दौरान यह साफ था कि उनके लिए यह सिर्फ एक एडवेंचर एक्टिविटी नहीं, बल्कि लंबे समय से संजोई इच्छा पूरी होने का क्षण था। 'स्काई डाइविंग' है अगला प्लान गुरमीत सिंह यहीं रुकने वाली नहीं हैं। उनकी बेटी वर्षा ने बताया कि मम्मी का अगला टारगेट 'स्काई डाइविंग' है। हाल ही में यह परिवार सिंगापुर ट्रिप पर भी गया था, वहां भी गुरमीत ने कई एडवेंचर एक्टिविटीज में हिस्सा लिया था। अब वह किसी विदेशी लोकेशन पर हजारों फीट की ऊंचाई से छलांग लगाने की तैयारी कर रही हैं। वर्षा कहती हैं, मम्मी पूरे परिवार और रिश्तेदारों की फेवरेट हैं। मेरे पैर में फ्रैक्चर था इसलिए मैं नहीं कूद पाई, लेकिन मम्मी को देखकर मेरा सारा दर्द गायब हो गया। आयोजक बोले- ऐसी जज्बे वाली महिला पहली बार देखी बंजी जंपिंग सेंटर 'हिमालयन वन' के संचालक रविंद्र सिंह नेगी ने दैनिक भास्कर को बताया कि उनके सेंटर पर सुरक्षा के अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन किया जाता है। जंप से पहले 4 से 5 बार सुरक्षा उपकरणों की जांच की जाती है। पार्टिसिपेंट से उनकी सेहत के बारे में पूछा जाता है। हालांकि, कोई मेडिकल टेस्ट नहीं होता, लेकिन दिल की बीमारी या गंभीर समस्या होने पर अनुमति नहीं दी जाती। नेगी ने बताया कि इससे पहले एक 73 वर्षीय विदेशी महिला ने जंप किया था, लेकिन भारतीय बुजुर्ग महिलाओं में गुरमीत सिंह का उत्साह और कॉन्फिडेंस मिसाल है। पति बैंक कर्मचारी, खुद रहीं हाउसवाइफ गुरमीत सिंह के पति पंजाब नेशनल बैंक में कार्यरत थे। अब वह एक हाउसवाइफ के तौर पर अपना जीवन बिता रही हैं, लेकिन उनका यह कदम समाज की उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो उम्र के कारण अपने सपनों को दबा देती हैं। गुरमीत सिंह सिंह ने साबित कर दिया है कि 'बूढ़ा' शरीर नहीं, सोच होती है। अगर मन में कुछ कर गुजरने की चाह हो, तो 65 की उम्र में भी आसमान छोटा पड़ जाता है। सोशल मीडिया पर आ रहे मजेदार कमेंट्स वायरल वीडियो पर सोशल मीडिया में लोग जमकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, यही असली जिंदगी है। लोग रिटायरमेंट के बाद बैठ जाते हैं, लेकिन इन्होंने तो उड़ना शुरू किया है। वहीं एक अन्य यूजर ने मजाकिया लहजे में लिखा, इन्होंने अपनी बकेट लिस्ट टिक कर ली है, अब हमारी बारी है। ------------------- ये खबर भी पढ़ें : दिल्ली में राहुल गांधी से मिले 'मोहम्मद दीपक': गले लगाया; बोले- कोटद्वार आकर तुम्हारे जिम की मेंबरशिप लूंगा उत्तराखंड के कोटद्वार में 'बाबा' शब्द को लेकर शुरू हुआ विवाद अब दिल्ली तक पहुंच गया। एक बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार को बचाने के लिए खुद को 'मोहम्मद दीपक' बताने वाले जिम ट्रेनर दीपक कुमार ने आज दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात की। (पढ़ें पूरी खबर)
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