अब पढ़ाई का तरीका तेजी से बदल रहा है और तकनीक कक्षा तक पहुंच चुकी है। इसी बदलाव को ध्यान में रखते हुए माइक्रोसॉफ्ट ने भारत में ‘एलिवेट फॉर एजुकेटर्स’ नाम से एक खास ट्रेनिंग प्रोग्राम की शुरुआत की है। यह पहल खास तौर पर शिक्षकों और स्कूल लीडर्स को एआई टूल्स के सही और जिम्मेदार उपयोग के लिए तैयार करने के उद्देश्य से लाई गई है।
बता दें कि कंपनी ने पहले ही भारत में 2 करोड़ लोगों को एआई से जुड़ी ट्रेनिंग देने का लक्ष्य तय किया है। उसी बड़े अभियान का यह हिस्सा माना जा रहा है। मौजूद जानकारी के अनुसार भारत में 20 करोड़ से अधिक छात्र और लगभग 1 करोड़ शिक्षक हैं। इतनी बड़ी शिक्षा व्यवस्था को देखते हुए कंपनी का मानना है कि एआई का भविष्य सिर्फ कॉर्पोरेट दफ्तरों में नहीं बल्कि स्कूलों और कक्षाओं में तय होगा।
इस प्रोग्राम के तहत शिक्षकों को डिजिटल स्किल्स, कोडिंग और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग को कक्षा में शामिल करने की ट्रेनिंग दी जाएगी। साथ ही यह भी सिखाया जाएगा कि एआई का इस्तेमाल सुरक्षित और नैतिक तरीके से कैसे किया जाए। गौरतलब है कि तकनीक के बढ़ते प्रभाव के बीच डेटा सुरक्षा, भरोसा और मानवीय निर्णय क्षमता को बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।
कंपनी के वाइस चेयर और प्रेसिडेंट ब्रैड स्मिथ के अनुसार, एआई अब धीरे-धीरे शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा बन रही है। उनका कहना है कि अगर भारत इस तकनीक को व्यापक स्तर पर अपनाता है तो इससे छात्रों और शिक्षकों दोनों के लिए नए अवसर खुल सकते हैं। उनका यह भी मानना है कि शिक्षक इस बदलाव में केंद्रीय भूमिका निभाएंगे, क्योंकि वही छात्रों को तकनीक के जिम्मेदार उपयोग की समझ दे सकते हैं।
यह पहल भारत की नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप भी बताई जा रही है। शिक्षा मंत्रालय द्वारा लागू की गई इस नीति में कक्षा 3 से ही एआई और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग की बुनियादी जानकारी देने की बात कही गई है। ऐसे में ‘एलिवेट फॉर एजुकेटर्स’ को उसी दिशा में एक व्यावहारिक कदम माना जा रहा है।
इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए कंपनी कई प्रमुख शैक्षणिक संस्थाओं के साथ मिलकर काम कर रही है। इनमें केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद, राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद और प्रशिक्षण महानिदेशालय शामिल हैं।
मौजूद आंकड़ों के अनुसार यह पहल करीब 2 लाख स्कूलों और 25,000 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंचेगी। इससे लगभग 80 लाख छात्रों को एआई से जुड़ी बुनियादी और उन्नत जानकारी मिल सकेगी। साथ ही शिक्षकों की क्षमता में भी वृद्धि होगी, जिससे वे नई तकनीकों को कक्षा में बेहतर तरीके से लागू कर सकें।
गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल प्लेटफॉर्म और स्मार्ट क्लासरूम का दायरा तेजी से बढ़ा है। ऐसे समय में एआई को शिक्षा से जोड़ना एक स्वाभाविक अगला कदम माना जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीक का संतुलित उपयोग ही इसकी असली सफलता तय करेगा।
अगर यह कार्यक्रम अपने निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप लागू होता है तो भारत एआई आधारित शिक्षा के क्षेत्र में एक मजबूत उदाहरण बन सकता है। फिलहाल शिक्षा व्यवस्था में डिजिटल बदलाव की यह नई पहल आने वाले समय की दिशा तय करती नजर आ रही है और इसके असर दूरगामी होने की संभावना है।
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Punjab News: पंजाब में खाद्य और पोषण सुरक्षा को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने ‘मेरी रसोई’ योजना की घोषणा की है. इस योजना के तहत राज्य के 40 लाख परिवारों को अप्रैल महीने से हर तिमाही मुफ्त फूड किट दी जाएगी. खास बात यह है कि ये किट राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत मिलने वाले गेहूं से अलग होंगी.
योजनाओं को लागू करने के लिए AAP प्रतिबद्ध
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जनकल्याण योजनाओं को ईमानदारी और दूरदर्शिता के साथ लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि हर बच्चे तक पौष्टिक भोजन पहुंचाना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है. आने वाले बजट में भी समाज के सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए लोक-हित से जुड़ी योजनाओं को और मजबूत किया जाएगा.
मासिक खपत के हिसाब से दी जाएगी सामग्री
योजना के तहत प्रत्येक परिवार को मासिक खपत के हिसाब से सामग्री दी जाएगी. हर किट में दो किलो दाल, दो किलो चीनी, एक किलो नमक, 200 ग्राम हल्दी पाउडर और एक लीटर सरसों का तेल शामिल होगा. ये सभी सामान पूरी तरह मुफ्त दिए जाएंगे.
मार्कफेड को नोडल एजेंसी बनाया
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस योजना के संचालन के लिए मार्कफेड को नोडल एजेंसी बनाया गया है. खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की ओर से किटों की सप्लाई की जाएगी. सरकार ने वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी और सुचारू बनाने के लिए मजबूत व्यवस्था तैयार की है. उन्होंने कहा कि पंजाब ने हमेशा देश को अनाज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. अब राज्य सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि पंजाब का कोई भी परिवार भोजन की कमी से परेशान न हो. खास तौर पर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है.
किटों की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि किटों की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा. सभी खाद्य वस्तुओं की सख्त जांच की जाएगी और किसी भी तरह की शिकायत पर तुरंत कार्रवाई होगी. अप्रैल से शुरू होकर हर तीन महीने में इन किटों का वितरण किया जाएगा. सरकार का मानना है कि इस पहल से बच्चों और परिवारों को पौष्टिक भोजन मिलेगा और राज्य में खाद्य सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी.
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