‘एल मेंचो’ की मौत के बाद मैक्सिकन राष्ट्रपति की शांति अपील, बोलीं-राज्यों के साथ पूरा तालमेल
नई दिल्ली, 23 फरवरी (आईएएनएस)। मैक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम ने रविवार को कहा कि न्यू जनरेशन जलिस्को कार्टेल (सीजेएनजी) के लीडर नेमेसियो ओसेगुएरा सर्वेंटेस की हत्या के बाद सभी राज्य सरकारों के साथ पूरा तालमेल है।
सर्वेंटेस को एल मेंचो के नाम से जाना जाता था। दरअसल एल मेंचो एक बड़े आपराधिक गिरोह का सरगना था। मैक्सिको की सेना ने उसे पकड़ने के लिए जलिस्को राज्य के टापालपा इलाके में ऑपरेशन चलाया। इस दौरान सेना पर हमला हुआ, जिसके जवाब में कार्रवाई की गई, जिसमें गिरोह के कई सदस्य मारे गए और कुछ घायल हो गए। दो लोगों को गिरफ्तार भी किया गया और उनके पास से हथियार व बख्तरबंद गाड़ियां बरामद की गईं। एल मेंचो की मौत के बाद कुछ राज्यों में हिंसा भड़क गई थी।
राष्ट्रपति शीनबाम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, सभी राज्यों की सरकारों के साथ पूरा समन्वय है। हमें जानकारी रखनी चाहिए और शांत रहना चाहिए। देश के ज्यादातर हिस्सों में गतिविधि सामान्य चल रही है।
शीनबाम ने ऑपरेशन से हुई अशांति को स्वीकार किया और बताया कि रक्षा मंत्री ने संघीय बलों द्वारा ऑपरेशन के बाद अलग-अलग ब्लॉकेड और दूसरे रिएक्शन के बारे में रिपोर्ट किया था।
उन्होंने कहा, हम हर दिन शांति, सुरक्षा, न्याय और मैक्सिको की भलाई के लिए काम करते हैं।
मैक्सिको के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि विशेष बलों ने ओसेगुएरा को पकड़ने के मकसद से जलिस्को के टापालपा में ऑपरेशन किया, जो सीजेएनजी का जाना-माना गढ़ है। मंत्रालय ने कहा, इस ऑपरेशन के दौरान मैक्सिकन मिलिट्री के लोगों पर हमला किया गया और अपनी ताकत बचाने के लिए उन्होंने हमले को नाकाम कर दिया। इसके चलते सीजेएनजी आपराधिक समूह के चार सदस्य मौके पर ही मारे गए और तीन बुरी तरह घायल हो गए, जिनकी मैक्सिको सिटी ले जाते समय एयरलिफ्ट के दौरान मौत हो गई।
मंत्रालय ने आगे कहा कि कार्टेल के दो और सदस्यों को गिरफ्तार किया गया और आर्मर्ड गाड़ियां और कई तरह के हथियार जब्त किए गए, जिनमें एयरक्राफ्ट को मार गिराने में कैपेबल रॉकेट लॉन्चर भी शामिल हैं।
एल मेंचो की हत्या से कई राज्यों में हिंसक प्रतिक्रिया देखने को मिली। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कई राज्यों में रोड ब्लॉक करने, गाड़ियों को जलाने और हथियारों से लैस झड़पों की घटना सामने आई।
जलिस्को के गवर्नर पाब्लो लेमस नवारो ने सोमवार को रेड अलर्ट जारी किया और स्कूलों में इन-पर्सन क्लास रद्द करने का आदेश दिया।
--आईएएनएस
केके/वीसी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
कनाडा के पीएम कार्नी 26 फरवरी को आ रहे भारत, पीएम मोदी से करेंगे मुलाकात
ओटावा, 23 फरवरी (आईएएनएस)। वैश्विक स्तर पर बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और आर्थिक अनिश्चितता के बीच कनाडा की नई सरकार अपने अंतरराष्ट्रीय रिश्तों को मजबूत और संतुलित बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। इसी रणनीति के तहत प्रधानमंत्री मार्क कार्नी 26 फरवरी से 7 मार्च 2026 तक भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान की आधिकारिक यात्रा पर होंगे। इस दौरे का पहला और अहम पड़ाव भारत होगा, जिसे कनाडा अपने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रमुख साझेदारों में गिनता है।
प्रधानमंत्री कार्नी के कार्यालय ने एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी है। इस रिलीज के अनुसार, कार्नी पहले मुंबई और फिर नई दिल्ली पहुंचेंगे, जहां उनकी मुलाकात भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से निर्धारित है। बैठक का मुख्य फोकस कनाडा-भारत संबंधों को नए सिरे से मजबूती देना और व्यापारिक सहयोग को विस्तार देना होगा।
दोनों नेता व्यापार, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), टैलेंट मोबिलिटी, सांस्कृतिक सहयोग और रक्षा क्षेत्र में संभावित नई साझेदारियों पर चर्चा करेंगे।
कनाडा, जो प्राकृतिक संसाधनों, स्वच्छ ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों से समृद्ध है, भारत जैसे तेजी से उभरते बाजार के साथ दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी को प्राथमिकता दे रहा है। भारत की बढ़ती ऊर्जा मांग, डिजिटल अर्थव्यवस्था और विनिर्माण क्षेत्र में विस्तार कनाडाई निवेश और तकनीकी सहयोग के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं। इसी उद्देश्य से प्रधानमंत्री कार्नी भारतीय और कनाडाई व्यापारिक नेताओं से भी मुलाकात करेंगे, ताकि दो-तरफा निवेश और निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा दिया जा सके।
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक सप्लाई चेन, ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक तकनीकों को लेकर देशों के बीच नए समीकरण बन रहे हैं। कनाडा की नीति स्पष्ट है—अपने पारंपरिक व्यापारिक साझेदारों पर निर्भरता कम करते हुए इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में विविधता लाना। भारत के साथ सहयोग इस रणनीति का केंद्रीय हिस्सा माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री कार्नी का मानना है कि कनाडा के पास वह सब कुछ है जिसकी दुनिया को जरूरत है—स्वच्छ ऊर्जा, जरूरी मिनरल्स, उन्नत तकनीकी विशेषज्ञता और विश्वस्तरीय प्रतिभा। भारत के साथ मजबूत साझेदारी न केवल व्यापार बढ़ाएगी, बल्कि दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच रणनीतिक विश्वास और क्षेत्रीय स्थिरता को भी सुदृढ़ करेगी।
इस यात्रा को कनाडा-भारत संबंधों में संभावित “रीसेट” के रूप में देखा जा रहा है, जो भविष्य में आर्थिक, तकनीकी और रक्षा सहयोग के नए अध्याय खोल सकता है।
--आईएएनएस
केआर/
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