बिहार सरकार शुरू करने जा रही ओला-उबर ऐप से भी सस्ती कैब सेवा, महिला चालकों को प्राथमिकता
Bihar News: बिहार में परिवहन व्यवस्था को नया रूप देने की तैयारी शुरू हो गई है. सहकारिता विभाग ने गुजरात मॉडल की तर्ज पर ‘भारत टैक्सी’ सेवा शुरू करने की योजना बनाई है. यह सेवा जून 2026 से राज्य के कुछ चुनिंदा जिलों में शुरू की जाएगी. सरकार का दावा है कि यह सेवा ओला और उबर जैसी निजी कंपनियों से 20 से 30 प्रतिशत तक सस्ती होगी.
क्यों खास है ये योजना
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें किसी निजी कंपनी या बिचौलिए की भूमिका नहीं होगी. यानी ड्राइवरों को किसी तरह का कमीशन नहीं देना पड़ेगा. इससे किराया कम रहेगा और उसका सीधा फायदा ड्राइवरों को मिलेगा. इस मॉडल में ड्राइवर ही ‘सारथी’ और शेयरधारक होंगे. इससे उनकी आय में स्थिरता आने की उम्मीद है.
ड्राइवरों के लिए भी
राज्य सरकार इस योजना से जुड़े ड्राइवरों को सामाजिक सुरक्षा भी देगी. उन्हें स्वास्थ्य बीमा और दुर्घटना बीमा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. इससे ड्राइवरों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और उनका भरोसा भी बढ़ेगा. यात्रियों की सुविधा के लिए ‘भारत टैक्सी’ नाम से एक मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया जाएगा. इस ऐप के जरिए लोग कैब, ऑटो और बाइक की बुकिंग कर सकेंगे. ऐप के माध्यम से बुकिंग आसान और पारदर्शी होगी.
इस सेवा में बड़े परिवारों के लिए छह सीटों वाले वाहन भी उपलब्ध होंगे. इसके अलावा, शहर के अंदर ही नहीं बल्कि एक जिले से दूसरे जिले तक यात्रा की सुविधा भी दी जाएगी. सरकार ने इसे अक्टूबर 2026 तक पूरी तरह लागू करने का लक्ष्य रखा है.
महिला चालकों को प्राथमिकता
इस योजना की एक और खास बात यह है कि महिला चालकों को प्राथमिकता दी जाएगी. इससे महिलाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और परिवहन क्षेत्र में उनकी भागीदारी बढ़ेगी. सरकार को उम्मीद है कि ‘भारत टैक्सी’ योजना से बिहार में सस्ता, सुरक्षित और भरोसेमंद परिवहन विकल्प उपलब्ध होगा और रोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे.
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संसद का ग्लोबल आउटरीच: भारतीय संसद की बड़ी पहल 60 से ज्यादा देशों के साथ लोकतांत्रिक रिश्तों के नए अध्याय की हुई शुरुआत
Parliamentary Friendship Groups: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 60 से अधिक देशों के साथ संसदीय मैत्री समूहों (Parliamentary Friendship Groups) के गठन को मंजूरी दी है. यह पहल भारत की अंतर-संसदीय कूटनीति को नया आयाम देने और दुनिया की विभिन्न संसदों के साथ प्रत्यक्ष संवाद को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
इन मैत्री समूहों में विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों को शामिल किया गया है, जिससे भारतीय लोकतंत्र की बहुदलीय और समावेशी प्रकृति को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है. प्रमुख सांसदों में रविशंकर प्रसाद, पी. चिदंबरम, राम गोपाल यादव, टी.आर. बालू, गौरव गोगोई, कनिमोझी, मनीष तिवारी, डेरेक ओ’ब्रायन, असदुद्दीन ओवैसी, अखिलेश यादव, सुप्रिया सुले, शशि थरूर और अनुराग ठाकुर समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हैं.
इन देशों के साथ मैत्री समूह
जिन देशों के साथ ये मैत्री समूह बनाए गए हैं, उनमें श्रीलंका, जर्मनी, न्यूजीलैंड, स्विट्जरलैंड, दक्षिण अफ्रीका, भूटान, सऊदी अरब, इज़राइल, मालदीव, अमेरिका, रूस, यूरोपीय संसद, दक्षिण कोरिया, नेपाल, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, इटली, ओमान, ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, सिंगापुर, ब्राजील, वियतनाम, मेक्सिको, ईरान और यूएई शामिल हैं.
द्विपक्षीय संबंधों को अधिक गहराई मिलेगी
इन समूहों का उद्देश्य सांसदों के बीच प्रत्यक्ष संवाद को बढ़ाना, विधायी अनुभवों का आदान-प्रदान करना और द्विपक्षीय संबंधों को अधिक गहराई देना है. इसके जरिए व्यापार, तकनीक, सामाजिक नीति, संस्कृति और वैश्विक चुनौतियों जैसे विविध मुद्दों पर भी समन्वित बातचीत को बढ़ावा मिलेगा.
संसदीय और पारंपरिक कूटनीति का कदम
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस पहल को भारत की वैश्विक पहचान को मजबूत करने का एक अहम माध्यम बताया है. उनका कहना है कि संसदीय कूटनीति, पारंपरिक कूटनीति के समानांतर एक प्रभावी प्लेटफॉर्म के रूप में उभर रही है, जो “पार्लियामेंट-टू-पार्लियामेंट” और “पीपल-टू-पीपल” संपर्क को मजबूती देती है.
संसदीय भागीदारी होगी स्थायी
पहले चरण में 60 से अधिक देशों के साथ मैत्री समूह बनाए गए हैं, जबकि आने वाले समय में और देशों को इसमें शामिल करने की तैयारी है. यह पहल भारत की कूटनीतिक रणनीति में संसदीय भागीदारी को एक स्थायी और सशक्त स्तंभ के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
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