Explainer: पंजाब चुनाव 2027 से पहले सुखबीर बादल का बड़ा दांव! कांग्रेस-AAP को किया बाहर, क्या BJP के साथ फिर बनेगी सरकार बनाने की रणनीति?
Punjab Assembly Election 2027: पंजाब में विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं लेकिन प्रदेश में राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. इस बीच शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने गठबंधन को लेकर बड़ा बयान दिया है. अपने बयान में उन्होंने साफ कहा कि उनकी पार्टी कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) के साथ गठबंधन नहीं करेगी लेकिन दूसरे दलों के लिए उनके दल के दरवाजे हमेशा खुले हैं. ऐसे में बीजेपी के साथ अकाली दल के पुराने रिश्तों की बहाली की अटकलें भी तेज हो गई हैं. पंजाब के राजनीतिक गलियारों में अकाली और बीजेपी के साथ आने की अटकलें लगाई जा रही हैं.
बता दें इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया कि 2027 में पंजाब में NDA की सरकार बनेगी. हालांकि, बीजेपी की पंजाब इकाई अभी सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की बात कह रही है. लेकिन सूत्रों के हवाले से खबर है कि बीजेपी का अन्य दलों से सीटों के बंटवारे और राजनीतिक शर्तों पर बातचीत जारी है.
अकाली दल सुप्रीमो सुखबीर बादल का बड़ा बयान
— Ajit patel (@patelajit) October 23, 2026
कांग्रेस और AAP पंजाब की सबसे बड़ी दुश्मन, इनसे कभी गठबंधन नहीं होगा: सुखबीर बादल
अकाली दल पंजाब की विचारधारा से सहमत दलों के साथ गठबंधन को तैयार।
सुखबीर सिंह बादल ने गठबंधन को लेकर क्या कहा?
सुखबीर बादल ने संकेत दिया है कि अकाली दल उन राजनीतिक दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने को तैयार है जिनकी विचारधारा और नीतियां पार्टी से मेल खाती हैं. उन्होंने अपने बयान में साफ कहा कि कांग्रेस और AAP को उन्होंने इस संभावित गठबंधन से बाहर रखा है. बादल के इस बयान से राजनीतिक गलियारों में अकाली दल के बीजेपी समेत अलग गुटों के साथ संभावित समीकरण के समीकरण बनाए जा रहे हैं.
क्या बीजेपी और अकाली दल फिर साथ आ सकते हैं?
दरअसल, अमित शाह के बयान के बाद पंजाब में राजनीतिक हलचल तेज हा गई है. बता दें 22 अक्टूबर को केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद पंजाब में NDA की सरकार बनेगी. उनके इस बयान को बीजेपी और अकाली दल के बीच दोबारा नजदीकी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है. दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता काफी उत्साहित हैं और अपने अपने समर्थकों को साधने में जुटे हुए हैं. बता दें इससे पहले भी दोनों दल लंबे समय तक एक दूसरे के सहयोगी रहे हैं.
#WATCH | Chandigarh: After meeting Punjab Governor Gulab Chand Kataria, SAD chief Sukhbir Singh Badal says, "A Shiromani Akali Dal delegation met the Governor today to discuss the current situation in Punjab. A useless Chief Minister has destroyed Punjab. Law and order is in… pic.twitter.com/QsrCqW5qcB
— ANI (@ANI) October 23, 2026
बीजेपी और अकाली दल का गठबंधन 2020 में क्यों टूटा था?
मीडिया रिर्पोटों के अनुसार बीजेपी और अकाली दल का रिश्ता करीब दो दशक से ज्यादा समय तक पंजाब की राजनीति का अहम हिस्सा रहा. दोनों पार्टियों का गठबंधन विपक्षियों के लिए सिरदर्द बना रहा. फिर कुछ बदलते राजनीतिक घटनाक्रर्मों के चलते सितंबर 2020 में अकाली दल ने NDA से अपना नाता तोड़ लिया. बताया जाता है कि इसके मूल में कृषि कानूनों का विरोध और किसानों का आंदोलन रहा था. बता दें उस समय पंजाब में किसानों का आंदोलन एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका था. अकाली दल ने किसानों के विरोध को देखते हुए बीजेपी से दूरी बनाई थी. अब बदले हुए राजनीतिक हालात दोनों को फिर करीब ला रहे हैं. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ये सब राजनीति और चुनावों का हिस्सा है.
2022 के चुनाव में अकाली दल और बीजेपी का प्रदर्शन कैसा रहा था?
2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने बड़ी जीत दर्ज की थी. जानकारी के मुताबिक उस दौरान पंजाब की 117 सदस्यीय विधानसभा में AAP को 92 सीटें मिली थीं. कांग्रेस 18 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही जबकि अकाली दल को केवल तीन और बीजेपी को दो सीटें मिली थीं.
#WATCH | Chandigarh: Speaking on the possibilities of alliance for the upcoming Punjab elections, SAD chief Sukhbir Singh Badal says, "Akali Dal is a regional party. Punjab is number 1 priority for Akali Dal. Whether we come to power or not, we have to keep fighting for Punjabis.… pic.twitter.com/s4vOqiWF5c
— ANI (@ANI) October 23, 2026
2024 के लोकसभा चुनाव में किसे कितना फायदा हुआ?
2024 के लोकसभा चुनावों की बात करें तो पंजाब में राजनीतिक समीकरणों की जटिलता देखने को मिली थी. राज्य की 13 लोकसभा सीटों में अकाली दल को एक सीट मिली थी. जबकि बीजेपी को तो कोई सीट नहीं मिल सकी थी. बीते नतीजों के बाद अब बीजेपी के सामने दो विकल्प बनते हैं. पहले वह अकेले चुनाव लड़कर अपने वोट आधार को बढ़ाने की कोशिश कर सकती है या अकाली दल के साथ मिलकर ग्रामीण और शहरी मतदाताओं के बीच व्यापक समर्थन जुटाने का प्रयास कर सकती है.
अकाली दल और बीजेपी के बीच गठबंधन में सबसे बड़ा पेंच क्या है?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक सीटों का बंटवारा संभावित गठबंधन की सबसे बड़ी बाधाओं में से एक है. बता दें पंजाब विधानसभा में कुल 117 सीटें हैं. अभी तक बीजेपी की ओर से सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की बात कही गई है जबकि गठबंधन की चर्चाओं में बीजेपी के लिए करीब 60 सीटों की मांग का जिक्र आया है. यहां बता दें कि पहले बीजेपी और अकाली दल के गठबंधन में अकाली दल 94 सीटों पर और बीजेपी 23 सीटों पर चुनाव लड़ी थी. अब अगर बीजेपी ज्यादा सीटें मांगती है तो अकाली दल को अपने पुराने हिस्से से काफी कम सीटों पर समझौता करना पड़ सकता है.
कांग्रेस और AAP के सामने क्या चुनौती होगी?
सुखबीर बादल के बयान से कांग्रेस और AAP को लेकर अकाली दल का रुख साफ होत गया है. हालांकि बदलते समीकरण में आने वाले समय में क्या होगा ये तो वक्त ही बताएगा. वहीं, कांग्रेस पंजाब में विपक्ष के रूप में AAP सरकार को घेरने की तैयारी कर रही है. दूसरी ओर AAP के सामने 2022 की बड़ी जीत को दोहराने की चुनौती होगी. उसे सरकार के कामकाज, रोजगार, नशे और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर मतदाताओं के सवालों का जवाब देना होगा.
पंजाब विधानसभ चुनाव 2027 में किन मुद्दों पर नजर रहेगी?
आगामी चुनाव में केवल गठबंधन की राजनीति ही निर्णायक नहीं होगी. बता दें पंजाब में नशे की समस्या, रोजगार, किसानों की चिंताएं, कानून-व्यवस्था, राज्य की आर्थिक स्थिति और युवाओं के भविष्य जैसे मुद्दे भी अहम रहेंगे. बीजेपी और अकाली दल यदि साथ आते हैं तो उन्हें यह बताना होगा कि उनके साझा एजेंडे में पंजाब के लिए क्या खास होगा. वहीं, कांग्रेस और AAP अपने-अपने कामकाज और नीतियों के आधार पर मतदाताओं को आकर्षित करने की कोशिश करेंगी.
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