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Acharya Balkrishna Health Tips: कभी खाया है चने का साग? आचार्य बालकृष्ण से जानिए इन पत्तों के फायदे

Acharya Balkrishna Health Tips: सर्दियों के मौसम में अलग-अलग प्रकार के साग मिलते हैं. पालक, बथुआ, मेथी और चने का साग भी इसमें शामिल है. चने के साग का स्वाद बेहतरीन होता है. ये सर्दी के मौसम में शरीर को गर्माहट और पोषण देता है. हाल ही में पतंजलि के आचार्य बालकृष्ण ने चने के साग के लाभदायक फायदे बताए हैं. आइए जानते हैं.

क्यों खाना चाहिए चने का साग?

आयुर्वेदाचार्य आचार्य बालकृष्ण बताते हैं कि सर्दी के मौसम में चने का साग लाभदायक होता है. उन्होंने पोस्ट शेयर करते हुए कहा कि चने का साग कैल्शियम, फाइबर, आयरन और मिनरलों से भरपूर है. इसे सर्दियों में खाने से शरीर में खून की कमी दूर होती है. इस साग को खाने से शरीर को ऊर्जा भी मिलती है.

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गुणों से भरपूर है चना साग

सर्दियों में चने का साग खाने से कई प्रकार के पोषक तत्व मिलते हैं. इस साग में विटामिन बी, सी, ए और के होता है. इसे खाने से इम्यूनिटी स्ट्रॉन्ग होती है. चने के साग को खाने पर एनीमिया की समस्या दूर होती है. ये शरीर में रेड ब्लड सेल्स और व्हाइट ब्लड सेल्स को बढ़ाता है. चने का साग एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है, जो हमारी रोग-प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है. बुजुर्गों और छोटे बच्चों को सर्दियों में यह साग अवश्य खाना चाहिए. हमारी स्किन के लिए भी चने का साग फायदेमंद होता है.

चने का साग कैसे बनाएं?

इस साग को बनाने के लिए आपको सबसे पहले चने का साग को धोकर काट लेना है. इसके बाद हरी मूंग की दाल को धोकर, प्रेशर कुकर में साग और दाल को मिलाकर पकाना है. कुछ देर बाद उसमें हरी मिर्च, लहसुन और अदरक को पीसकर डाल दें. बीच-बीच में करछी चलाते हुए साग को पका लें. अब एक कटोरी में बेसन का घोल बनाकर साग में मिलाएं. साग को घोटते हुए चलाएं. 

अब दूसरे पैन में सरसों तेल या घी डालकर उसमें प्याज को भूनें. इसमें बारीक कटा लहसुन डालें और गोल्डन होने तक पकाएं. इसके बाद साबुत लाल मिर्च डालें और 1 टमाटर डालकर पकाएं. इसके बाद धनिया पाउडर, नमक और हल्दी डालकर पकाएं. अंत में साग डालकर कुछ समय के लिए पकाएं. देसी घी डालकर साग को सर्व करें.

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भारत सरकार ने जारी की पहली एंटी टेरर पॉलिसी 'प्रहार', जानें कैसे देश के खिलाफ शक्तियों से निपटने में आएगी काम

मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स ने देश की पहली व्यापक एंटी-टेरर पॉलिसी जारी की है. इस पॉलिसी को नाम दिया गया है ‘PRAHAAR'.  यह रणनीति दस्तावेज आतंकवाद के बदलते स्वरूप को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है. इसमें साफ कहा गया है कि भारत आतंकवाद को किसी धर्म, नस्ल या राष्ट्रीयता से नहीं जोड़ता, बल्कि इसे वैश्विक सुरक्षा के लिए साझा खतरा मानता है. 

पॉलिसी के मुताबिक भारत को जमीन, पानी और हवा तीनों माध्यमों से आतंकी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. क्रॉस बॉर्डर आतंकवाद के साथ-साथ साइबर हमले और संगठित आपराधिक नेटवर्क की भूमिका को भी गंभीर खतरे के रूप में रेखांकित किया गया है. 

साइबर स्पेस और डार्क वेब पर बढ़ता खतरा

‘प्रहार’ में डिजिटल मोर्चे पर बढ़ती चुनौतियों को विस्तार से बताया गया है. आतंकी संगठन अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप्स, क्रिप्टो वॉलेट और डार्क वेब का इस्तेमाल फंडिंग और ऑपरेशनल गाइडेंस के लिए कर रहे हैं.

नीति दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि एनॉनिमस ऑनलाइन गतिविधियां जांच एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन रही हैं. इसके अलावा CBRNED (केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल, न्यूक्लियर, एक्सप्लोसिव और डिजिटल) सामग्री तक पहुंच को रोकना काउंटर टेरर एजेंसियों की प्राथमिकता होगी. ड्रोन और रोबोटिक्स के दुरुपयोग की आशंका को भी गंभीर सुरक्षा जोखिम बताया गया है.

युवाओं में कट्टरपंथ रोकने पर जोर

नीति में यह स्वीकार किया गया है कि आतंकी समूह भारतीय युवाओं को भर्ती करने की लगातार कोशिश कर रहे हैं. पहचान होने पर ऐसे मामलों में पुलिस की ‘ग्रेडेड कार्रवाई’ का प्रावधान रखा गया है.

साथ ही सामाजिक और धार्मिक नेताओं की सकारात्मक भूमिका पर भी जोर दिया गया है. मॉडरेट प्रचारकों और एनजीओ के जरिए कट्टरपंथ और चरमपंथी हिंसा के दुष्परिणामों के बारे में जागरूकता फैलाने की बात कही गई है.

वैश्विक नेटवर्क और भारत की तैयारी

दस्तावेज में अल कायदा और इस्लामिक स्टेट ऑफ ईराक और सीरिया जैसे वैश्विक आतंकी संगठनों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि स्लीपर सेल और स्थानीय नेटवर्क के जरिए भारत में अस्थिरता फैलाने की कोशिशें की गई हैं. 

‘प्रहार’ ट्रांसनेशनल आतंकवाद से निपटने के लिए राष्ट्रीय उपायों के साथ अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय सहयोग पर भी जोर देता है. इसमें स्पष्ट किया गया है कि विदेश में बैठे आतंकी समूह स्थानीय लॉजिस्टिक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और भौगोलिक जानकारी का सहारा लेकर हमलों की साजिश रच रहे हैं.

कुल मिलाकर, यह नीति दस्तावेज़ भारत की सुरक्षा रणनीति को अधिक समन्वित, तकनीकी रूप से सक्षम और वैश्विक सहयोग पर आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

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