ये हैं भारत की हार के 4 सबसे बड़े 'गुनहगार', परफॉर्म करते तो जीत जाती टीम इंडिया
IND vs SA: रविवार को साउथ अफ्रीका के साथ खेले गए सुपर-8 मुकाबले में टीम इंडिया को 76 रनों से हार का सामना करना पड़ा. टी-20 विश्व कप 2026 के सुपर-8 में ये भारत की पहली हार है. इसके चलते अब भारत पर टूर्नामेंट से बाहर होने का खतरा मंडराने लगा है. इस मैच में साउथ अफ्रीका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 188 रनों का लक्ष्य तय किया था, लेकिन टीम इंडिया बल्लेबाजी में फ्लॉप हो गई और महज 111 रन पर ही ऑलआउट हो गई. नतीजन, भारत को 76 रनों से हार का सामना करना पड़ा. तो आइए इस वीडियो में उन 4 खिलाड़ियों के बारे में जानते हैं, जिनके चलते इस मैच में भारत को हार का सामना करना पड़ा.
बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने यूनुस पर लगाए गंभीर आरोप, कहा- मेरे खिलाफ रची साजिश, कभी नहीं रखा संवैधानिक जिम्मेदारी का मान
ढाका, 23 फरवरी (आईएएनएस)। बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि यूनुस ने अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों को ठीक से नहीं निभाया। राष्ट्रपति को न सिर्फ अहम चर्चाओं से दूर रखा बल्कि उन्हें हटाने तक की साजिश रच देश को अस्थिर करने का प्रयास किया।
बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शाहबुद्दीन ने हाल ही में एक साक्षात्कार में मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
उन्होंने दावा किया कि उस दौर में राष्ट्रपति की संवैधानिक शक्तियों को कमजोर किया गया, और उन्हें असंवैधानिक तरीके से हटाने की साजिश रची गई। शाहबुद्दीन ने कहा कि अंतरिम सरकार ने उन्हें अलग-थलग कर दिया, कोई जानकारी साझा नहीं की, और यहां तक कि उनके प्रेस विभाग को हटा दिया गया।
ढाका में अपने आधिकारिक आवास बंगभवन में बांग्ला डेली कालेर कंठो को दिए एक इंटरव्यू में राष्ट्रपति ने कहा, “उन डेढ़ वर्षों में, मैं किसी भी चर्चा में नहीं रहा, फिर भी मेरे खिलाफ कई तरह की साजिशें रची जा रही हैं। देश की शांति और व्यवस्था को हमेशा के लिए खत्म करने और एक संवैधानिक खालीपन पैदा करने की कई कोशिशें की गईं।”
जब उनसे पूछा गया कि क्या वे कोशिशें सफल रहीं, तो उन्होंने कहा, “मैं अपने फैसले पर अड़ा रहा। इसीलिए कोई साजिश सफल नहीं हुई। खासकर गैर-संवैधानिक तरीकों से राष्ट्रपति को हटाने की कई साजिशें नाकाम हो गईं। इसलिए, बंगभवन में डेढ़ साल का अनुभव अच्छा नहीं कहा जा सकता। मुझे नहीं पता कि मेरे ऊपर से गुजरे इस तूफान को झेलने की ताकत किसी और में थी या नहीं।”
इस सवाल का जवाब देते हुए कि क्या पूर्व चीफ एडवाइजर ने राज्य के फैसलों पर राष्ट्रपति से कोई मशविरा किया, जिसमें 133 अध्यादेश जारी करना भी शामिल है, शहाबुद्दीन ने कहा कि हालांकि कुछ हालात की वजह से जरूरी हो सकते हैं, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में जारी करने का कोई मतलब नहीं था।
शहाबुद्दीन ने आरोप लगाया कि हालांकि पूर्व चीफ एडवाइजर ने कई विदेशी दौरे किए, लेकिन लौटने पर उन्होंने न तो राष्ट्रपति से मुलाकात की और न ही कोई लिखित जानकारी दी; राष्ट्रपति के मुताबिक, ये उनकी संवैधानिक जिम्मेदारी थी।
कालेर कंठो से बात करते हुए उन्होंने कहा, मुख्य सलाहकार ने संविधान के किसी भी नियम का पालन नहीं किया। संविधान में कहा गया है कि जब भी वह विदेश दौरे पर जाएं, तो वहां से लौटने के बाद उन्हें राष्ट्रपति से मिलना चाहिए और मुझे नतीजे के बारे में बताना चाहिए। उन्हें मुझे लिखित में बताना चाहिए कि क्या चर्चा हुई, क्या हुआ, क्या कोई समझौता हुआ, और किस तरह की बातचीत हुई। वह 14 से 15 बार विदेश दौरे पर गए होंगे, लेकिन उन्होंने मुझे कभी नहीं बताया। वह कभी मेरे पास नहीं आए।
शहाबुद्दीन के मुताबिक, अंतरिम सरकार के समय में वह “पूरी तरह अंधेरे में” रहे और उन्होंने दावा किया कि उनके दो प्रस्तावित विदेश दौरे—कोसोवो और कतर—रोक दिए गए थे।
जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें चुनावों से पहले अंतरिम सरकार द्वारा अमेरिका के साथ किए गए आखिरी समझौते के बारे में पता था, तो राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं थी, और इस तरह के डेवलपमेंट के बारे में उन्हें आधिकारिक तौर पर बताया जाना चाहिए था।
राष्ट्रपति ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए कहा, “नहीं, मुझे कुछ नहीं पता। ऐसे सरकारी समझौते के बारे में मुझे बताया जाना चाहिए था। चाहे वह छोटा हो या बड़ा, बेशक, पिछली सरकारों के प्रमुखों ने राष्ट्रपति को बताया था। और यह एक संवैधानिक जिम्मेदारी है। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्होंने मुझे न तो बोलकर बताया, न ही लिखकर। वे नहीं आए।”
--आईएएनएस
केआर/
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