अधूरे प्यार और कठिन बचपन ने गढ़ा संजय लीला भंसाली का रोमांटिक सिनेमा, जिंदगी के जख्मों को पर्दे पर उकेरा
मुंबई, 23 फरवरी (आईएएनएस)। हमेशा ये माना जाता है कि जो हम अपनी असल जिंदगी में नहीं कर पाते हैं, उसे कल्पनाओं में करने की कोशिश करते हैं। कल्पनाओं में कोई बंदिश नहीं होती, वे स्वतंत्र होती हैं और ऐसी स्वतंत्र कल्पनाओं को नया रूप और रंग देकर किरदार और संवाद में पिरो देने का जज्बा सिर्फ संजय लीला भंसाली के अंदर है।
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