Dhaka में सत्ता बदलते ही भारत की बड़ी पहल, नए Foreign Minister से मिले उच्चायुक्त Pranay Verma
ढाका में नियुक्त उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने रविवार को कहा कि बांग्लादेश की नयी सरकार के साथ संवाद को आगे बढ़ाने के लिए भारत उत्सुक है। उन्होंने नयी दिल्ली की ओर से ढाका के साथ फिर से सक्रिय रूप से बातचीत की इच्छा व्यक्त की। तारिक रहमान के 17 फरवरी को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के कुछ दिनों बाद बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान से मुलाकात के बाद उच्चायुक्त वर्मा पत्रकारों से बात कर रहे थे।
वर्मा ने मुलाकात के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘‘विदेश मंत्री के साथ आज की बैठक में मैंने अपना रुख दोहराया कि हम बांग्लादेश में नयी सरकार के साथ संवाद के लिए उत्सुक हैं। बैठक में विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद भी शामिल थीं। उच्चायुक्त के अनुसार, उन्होंने बताया कि ‘‘हम परस्पर हित और पारस्परिक लाभ के आधार पर सकारात्मक, रचनात्मक और भविष्योन्मुखी सोच के साथ मिलकर काम करते हुए हर क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करना चाहते हैं।’’
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वर्मा ने इस मुलाकात को एक “शिष्टाचार भेंट” और “प्रारंभिक विचार-विमर्श” बताया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में नयी सरकार के कार्यभार संभालने के बाद विदेश मंत्री और राज्य मंत्री के साथ यह उनकी पहली बैठक थी। बारह फरवरी को हुए चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) को दो-तिहाई बहुमत मिलने के बाद तारिक रहमान (60) ने 17 फरवरी को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। इसके साथ ही मोहम्मद यूनुस के अंतरिम शासन का अंत हो गया। यूनुस के कार्यकाल के दौरान भारत के साथ संबंधों में गिरावट आई थी और 1971 के बाद यह अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे।
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उच्चायुक्त ने चुनाव में 13 फरवरी को बीएनपी की जीत के तुरंत बाद तारिक रहमान को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बधाई संदेश की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘‘आप बांग्लादेश के साथ हमारे हालिया उच्च स्तरीय संवाद से अवगत हैं।’’ वर्मा ने रविवार को कहा, ‘‘उन्होंने उस दिन बाद में फोन पर भी बातचीत की।’’ उन्होंने यह भी याद दिलाया कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए नयी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने के लिए ढाका का दौरा किया और बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की।
Kim Jong Un का 'परमाणु राज्याभिषेक', फिर बने North Korea के बेताज बादशाह, दुनिया के लिए खतरे की नई घंटी!
उत्तर कोरिया में एक बार फिर वही हुआ जिसकी उम्मीद थी, लेकिन जिस अंदाज़ में हुआ उसने पूरी दुनिया की नींद उड़ा दी है। तानाशाह किम जोंग उन को सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी के महासचिव पद पर फिर से निर्विरोध चुन लिया गया है। सोमवार को सरकारी मीडिया (KCNA) ने घोषणा की कि हजारों प्रतिनिधियों ने "एकमत" से किम के नाम पर मुहर लगाई है। यह चुनाव महज एक औपचारिकता नहीं, बल्कि किम के उस 'परमाणु शस्त्रागार' को सलाम था जिसने एशिया से लेकर अमेरिका तक दहशत फैला रखी है।
गत बृहस्पतिवार से शुरू हुई पार्टी कांग्रेस में किम अगले पांच वर्षों के लिए अपने प्रमुख राजनीतिक और सैन्य लक्ष्यों की रूपरेखा पेश कर सकते हैं। संकेत मिल रहे हैं कि वह परमाणु कार्यक्रम को और तेज करने पर जोर देंगे। उत्तर कोरिया के पास पहले से ही ऐसी मिसाइल मौजूद हैं जो एशिया में अमेरिकी सहयोगियों और अमेरिकी मुख्य भूमि तक को निशाना बना सकती हैं।
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विश्लेषकों का मानना है कि किम पारंपरिक सैन्य बलों को मजबूत करने और उन्हें परमाणु क्षमताओं के साथ एकीकृत करने के नए लक्ष्य घोषित कर सकते हैं। साथ ही वह चीन के साथ व्यापार में सुधार और रूस को हथियार निर्यात से मिली आर्थिक बढ़त के बीच ‘‘आत्मनिर्भरता’’ अभियान पर भी पुन: जोर दे सकते हैं। उत्तर कोरिया की आधिकारिक कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) ने बताया कि हजारों प्रतिनिधियों की ‘‘एकमत इच्छा’’ से किम को पार्टी का महासचिव चुना गया।
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वर्ष 2016 से हर पांच वर्ष में आयोजित इस कांग्रेस में शीर्ष नेता का चुनाव होता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि किम दक्षिण कोरिया के प्रति अपने कड़े रुख को और संस्थागत रूप दे सकते हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ 2019 में वार्ता विफल होने के बाद से उत्तर कोरिया का अमेरिका और दक्षिण कोरिया के साथ कूटनीतिक संवाद ठप है। किम ने दक्षिण कोरिया को 2024 में स्थायी दुश्मन घोषित कर संबंधों को और तनावपूर्ण बना दिया था।
परमाणु शक्ति को 'अजेय' बनाने का मिशन
पार्टी कांग्रेस में प्रतिनिधियों ने किम को उत्तर कोरिया के क्षेत्रीय प्रभाव और घातक परमाणु हथियारों को मजबूत करने का पूरा श्रेय दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि किम का यह नया कार्यकाल दुनिया के लिए और भी खतरनाक होने वाला है:
मिसाइल टारगेट: उत्तर कोरिया के पास पहले से ही ऐसी मिसाइलें हैं जो अमेरिकी मुख्य भूमि और एशिया में उसके सहयोगियों को खाक करने की ताकत रखती हैं।
नया सैन्य लक्ष्य: अटकलें हैं कि किम अब पारंपरिक सेना को परमाणु क्षमताओं के साथ पूरी तरह एकीकृत (Integrate) करने का नया ब्लूप्रिंट पेश करेंगे
आत्मनिर्भरता का ढोंग: रूस को हथियारों के निर्यात और चीन के साथ व्यापार से मिली आर्थिक मजबूती के दम पर किम ने फिर से 'आत्मनिर्भरता' का राग अलापा है।
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