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Curd and Sugar Tradition: परीक्षा हो या नई नौकरी, आखिर क्यों खिलाई जाती है दही-चीनी? जानिए इसके पीछे की वजह
Curd and Sugar Tradition: घर से किसी शुभ काम के लिए निकलते समय बड़े-बुजुर्ग अक्सर एक चम्मच दही-चीनी खाने की सलाह देते हैं। यह परंपरा वर्षों से हमारे परिवारों का हिस्सा रही है और आज भी कई लोग इसे शुभ शुरुआत का प्रतीक मानते हैं।
हालांकि, इसके पीछे सिर्फ धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि कुछ दिलचस्प मान्यताएं और खानपान से जुड़े पहलू भी बताए जाते हैं। आइए जानते हैं कि आखिर दही-चीनी खिलाने की यह परंपरा पीढ़ियों से क्यों चली आ रही है।
शुभ काम से पहले दही-चीनी खिलाने की परंपरा क्यों चली आ रही है?
भारत के कई घरों में आज भी किसी खास काम के लिए निकलने से पहले दही-चीनी खिलाई जाती है। चाहे परीक्षा देने जाना हो, नई नौकरी शुरू करनी हो या किसी जरूरी सफर पर निकलना हो, बड़े-बुजुर्ग इसे शुभ मानते हैं। यह परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है और आज भी लोग इसे अच्छी शुरुआत और गुड लक से जोड़कर देखते हैं।
क्या कहती हैं धार्मिक मान्यताएं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दही को शुद्धता और शुभता का प्रतीक माना जाता है। वहीं, चीनी जीवन में मिठास और पॉजिटिविटी का संकेत देती है। यही वजह है कि किसी नए काम की शुरुआत से पहले दही-चीनी खिलाने की परंपरा आज भी कई घरों में निभाई जाती है। माना जाता है कि इससे नए काम की शुरुआत अच्छे माहौल और अच्छी उम्मीदों के साथ होती है।
सेहत के नजरिए से भी हो सकता है फायदेमंद
दही में ऐसे अच्छे बैक्टीरिया होते हैं, जो डाइजेशन को बेहतर रखने में मदद कर सकते हैं। वहीं, चीनी शरीर को तुरंत एनर्जी देने का काम करती है। जब इन दोनों का सीमित मात्रा में सेवन किया जाता है, तो शरीर तरोताजा फील कर सकता है। हालांकि, इसे किसी बीमारी का इलाज या हेल्थ सुधारने का पक्का तरीका नहीं माना जाना चाहिए।
कॉन्फिडेंस बढ़ाने में भी निभा सकती है भूमिका
कई बार किसी शुभ परंपरा का पालन करने से मन में अच्छा फील होता है। यही पॉजिटिविटी व्यक्ति का कॉन्फिडेंस बढ़ाने में मदद कर सकती है। शायद यही कारण है कि परीक्षा, इंटरव्यू या किसी नए काम पर जाने से पहले दही-चीनी खाने की परंपरा आज भी लोगों के बीच बनी हुई है।
किन मौकों पर खाई जाती है दही-चीनी?
भारत के अलग-अलग हिस्सों में यह परंपरा अलग तरीके से निभाई जाती है, लेकिन कुछ मौके लगभग हर जगह एक जैसे हैं। जैसे परीक्षा देने से पहले, नौकरी के इंटरव्यू पर जाने से पहले, नई नौकरी के पहले दिन, लंबी यात्रा शुरू करने से पहले, शादी-विवाह जैसे शुभ अवसरों पर या नए बिजनेस की शुरुआत के समय कई लोग दही-चीनी खाना शुभ मानते हैं।
क्या हर किसी के लिए सही है दही-चीनी?
दही-चीनी का सेवन सामान्य लोग सीमित मात्रा में कर सकते हैं, लेकिन यह हर किसी के लिए जरूरी नहीं है। अगर किसी को डायबिटीज, दूध से एलर्जी या कोई दूसरी हेल्थ प्रॉब्लम है, तो बिना सलाह के इसका सेवन नहीं करना चाहिए। ऐसे लोगों के लिए डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लेना बेहतर रहेगा।
परंपरा के साथ हेल्थ का भी रखें ध्यान
दही-चीनी की परंपरा भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मान्यताओं का हिस्सा है। इसे शुभ शुरुआत और पॉजिटिविटी से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन अच्छी हेल्थ के लिए सिर्फ किसी एक फूड पर निर्भर रहना सही नहीं है। बैलेंस डाइट, नियमित एक्सरसाइज और हेल्दी लाइफस्टाइल ही फिट रहने का सबसे अच्छा तरीका है।
दही-चीनी खिलाने की परंपरा सिर्फ एक रिवाज नहीं, बल्कि अपनों की शुभकामनाओं और पॉजिटिविटी का भी प्रतीक है। अगर इसे सीमित मात्रा में और अपनी हेल्थ को ध्यान में रखकर खाया जाए, तो यह एक अच्छी पारंपरिक आदत का हिस्सा हो सकता है।
(Disclaimer): यह लेख सामान्य जानकारी और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। दही-चीनी खाने से जुड़े स्वास्थ्य संबंधी प्रभाव हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। यदि आपको डायबिटीज, लैक्टोज इनटॉलरेंस है, तो इसे अपनी डाइट में शामिल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
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