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Mutual Funds: क्या आप बिना केवायसी के भारत में म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते? क्या है नियम

Mutual Funds tips: म्यूचुअल फंड में निवेश शुरू करने वाले ज्यादातर लोगों के मन में एक सवाल जरूर आता है कि क्या बिना केवायसी के भी निवेश किया जा सकता है? पहली बार निवेश करते समय फॉर्म भरना, डॉक्यूमेंट अपलोड करना और वीडियो वेरिफिकेशन जैसी प्रक्रिया कई लोगों को थोड़ा झंझट लग सकती। लेकिन सच यह है कि भारत में म्यूचुअल फंड निवेश के लिए केवायसी लगभग अनिवार्य है।

दरअसल देश में म्यूचुअल फंड्स को सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया यानी सेबी रेगुलेट करता है। मनी लॉन्ड्रिंग रोकने और निवेशकों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए केवायसी जरूरी रखा गया है। इसका मतलब है कि आप किसी एएमसी, बैंक, ऐप या डिस्ट्रीब्यूटर के जरिए निवेश करें, केवायसी के बिना आम तौर पर निवेश की अनुमति नहीं मिलती।

केवायसी आपके पैनकार्ड से जुड़ा होता है और इससे आपकी पहचान, पता और टैक्स से जुड़ी जानकारी की पुष्टि होती है। इसी वजह से फंड हाउस बिना केवायसी बड़े निवेश स्वीकार नहीं कर सकते। हालांकि एक छोटी सी छूट जरूर मौजूद है, जिसके कारण लोगों के बीच भ्रम पैदा हो जाता है। 

नियमों के मुताबिक, अगर किसी निवेशक ने पूरा केवायसी नहीं कराया है तो वह एक वित्त वर्ष में कुल मिलाकर 50 हजार रुपये तक निवेश कर सकता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह सीमा हर फंड या एएमसी के लिए अलग नहीं है, बल्कि सभी म्यूचुअल फंड्स को मिलाकर कुल सीमा है।

इस विकल्प को कभी-कभी 'पैन एक्सेम्प्ट' निवेश कहा जाता है, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप बिना पहचान बताए निवेश कर सकते हैं। इस स्थिति में भी आपको पैन कार्ड या कोई वैध पहचान दस्तावेज देना होता है। यानी यह पूरी तरह छूट नहीं, बल्कि केवल सीमित राहत है।

असल में आजकल कई प्लेटफॉर्म और फंड हाउस इस सुविधा को देते ही नहीं हैं। वजह यह है कि इसे मैनेज करना काफी जटिल होता है। इसलिए ज्यादातर ऑनलाइन ऐप्स और वेबसाइट्स केवायसी पूरा होने से पहले निवेश की अनुमति ही नहीं देते।

अगर किसी तरह आपने इस सीमित छूट के तहत निवेश कर भी लिया और बाद में 50 हजार रुपये की सीमा पार कर दी, तो दिक्कत शुरू हो सकती है। ऐसे में आपके नए ट्रांजेक्शन रुक सकते हैं। एसआईपी शुरू नहीं कर पाएंगे और कई मामलों में रिडेम्प्शन यानी पैसा निकालने में भी परेशानी आ सकती है। डिविडेंड या भुगतान भी अटक सकता है।

यही वजह है कि विशेषज्ञ भी सलाह देते हैं कि केवायसी से बचने की कोशिश करने का कोई खास फायदा नहीं है। आजकल केवायसी एक बार की प्रक्रिया है और एक बार पूरा होने के बाद यह सभी म्यूचुअल फंड्स और प्लेटफॉर्म्स पर मान्य होता है। ऑनलाइन केवायसी और वीडियो वेरिफिकेशन आम तौर पर दस मिनट से भी कम समय में पूरा हो जाता है।

सीधी बात यह है कि भारत में बिना केवायसी म्यूचुअल फंड में निवेश करना लगभग नामुमकिन है। छोटी सी छूट जरूर है, लेकिन गंभीर निवेशकों के लिए केवायसी कराना ही सबसे आसान और सुरक्षित रास्ता है।

(प्रियंका कुमारी)

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